Submit your work, meet writers and drop the ads. Become a member
न बांधो
न दिशा दो
बस थोड़ा प्रकाश दो
और उड़ने को आकाश दो
कोई रहस्य नहीं, एक बेल हूँ मैं
तुम पर अवलंबित हूँ पर अमरबेल नहीं
बढ़ रही हूँ तुम्हारे संग
गुँथ गयी हूँ तुम्हारे अंग
अंत तक के लिये....
Hindi translation of "creeper"
Pyar tujhe nahi hua hai usse ye mere dil ko yahin hai!
tu laut ke ayyegi... ye mere kadi hai...
dil se jada hai tabhi too samaj nahi aa raha mai tujhe...
jo dikhta hai tujhe ussme wo pyar nahi...
banda hoga mujhse acha lenkin wo tera yaar nahi...
tune kia hoga nadaniya dosti samaj ke...
apun bhi kia tujhse pyar... tujhe jindge samajke...
socha nahi ki mere galatfaime hai ki mujhe lagta hai... tu mujhse pyar karti hai...
tere ankho me dekha hai maine usse...
tere muskan me maine khoja hai usse...
tere har addad ki wazah tha mai...
tu saas leti thi apne liye lekin ussme basta tha mai...
tujhe jana hai tu ja apun rokega nahi...
tujhe laga ki... attraction wali feelings aye... to wo pyar hai...
ye tera dimag ka dhoka hai... par maine tujhe kabhi toka nahi...
tere duniya me jake tere dil ko chua hu...
har adhuri cheez jo tune ki hai... ussme bhi pura dia hu...
ye jo lakir hai tere dimag me mere liye tune hai baniye...
usse mitane hi mai yaha aya hu...
jab tu... ankho se nahi... dil se mujhe dekhe gi...
jab tera lamha ruk jaye ga aur uss har wakt jo apna tha usse dil ki nazro se dekhe gi...
eshq ka dariya ... sare hado ko paar kar dega...
tere ess pathar dil me... mere jassbat ka pyar bhar dega...
mumkin na hota too... hum nahi koi aur hota yaha...
kafilo me honge lakho... magar mujsa nahi koi yaha...
uss wakt ka enzzar hai mujhe jab fir se tu sare raza todegi...
mere ban jayegi tu... jab tere sari ye wazah tutegi!!!
Kabhi apne aap ko bhoolti ***
Kabhi apne aap ko chunti ***
Bas dhundhti *** khud ko

Kabhi inn bikhre panno mein
Kabhi inme likhe lafzon mein
Padhti *** khud ko

Kabhi dhokha kha jane mein
Fir khud ko saza de jane mein
Maarti *** khud ko

Kabhi baarish ki awaz mein
Kabhi hawaon ki aahat mein
Dekhti *** khud ko

Kabhi bajte huwe piano mein
Kabhi gaano ke taraano mein
Sunti *** khud ko

Kabhi uski aankhon ke paani mein
Kabhi uski di hui zubani mein
Paati *** khud ko

Bas dhundhti *** khud ko
Bas dhundhti *** khud ko
Aaditya Jul 2
वो हसीन चेहरा, तड़पता है मन देखने को,
मुस्कुराती हो तुम जब, घायल कर देती हो।
पलके झपकाती तुम धीरे से या धीरे हुआ समय
पता नहीं हकीकत क्या है, खो गए हैं हम।

तुम्हारे मीठे लफ़्ज़ों का रहता इंतज़ार हमें
वक्त से पूछते हम, कब सुनने को मिले।
आरज़ू है मन में कई ज़्यादा, पड़ता ना फर्क
दिल में बस रहती हो तुम, दिल में बसती हो तुम।

फिदा हैं हम तुम्हारे हर करनी के,
बता ना सके हम कभी विस्तार से।
नासमझ तो हम हैं ही, सच है ये,
पर तुम ना समझी इशारों को हमारे।
Khamoshi bahut kuch kehati hai
Aur woh aksar khamosh rehati hai

Silence speaks more than words
And she remains silent quite often
कह रहे हो तुम ये  ,
मैं भी करूँ ईशारा,
सारे  जहां  से अच्छा ,
हिन्दुस्तां हमारा।


ये ठीक भी बहुत  है,
एथलिट सारे जागे ,
क्रिकेट में जीतते हैं,
हर गेम में  है आगे।


अंतरिक्ष  में उपग्रह
प्रति मान फल  रहें है,
अरिदल पे नित दिन हीं
वाण चल रहें हैं,


विद्यालयों में बच्चे
मिड मील भी पा  रहें है,
साइकिल भी मिलती है
सब गुनगुना रहे हैं।


हाँ ठीक कह रहे हो,
कि फौजें हमारी,
बेशक  जीतती हैं,
हैं दुश्मनों  पे भारी।


अब नेट मिल रहा है,
बड़ा सस्ता बाजार में,
फ्री है वाई-फाई ,
फ्री-सिम भी व्यवहार में।


पर  होने से नेट भी
गरीबी मिटती कहीं?
बीमारों से समाने फ्री
सिम टिकती नहीं।


खेत में  सूखा है और
  तेज बहुत धूप है,
गाँव में मुसीबत अभी,
रोटी है , भूख है।


सरकारी हॉस्पिटलों में,
दौड़ के हीं ऐसे,
आधे तो मर रहें  हैं,
इनको बचाए कैसे?


बढ़ रही है कीमत और
बढ़ रहे बीमार हैं,
बीमार करें  छुट्टी  तो
कट रही पगार हैं।


राशन हुआ है महंगा,
कंट्रोल घट रहा है,
बिजली हुई न सस्ती,
पेट्रोल चढ़ रहा है।


ट्यूशन  फी है हाई,
उसको चुकाए कैसे?
इतनी सी नौकरी में,
रहिमन पढ़ाए कैसे?


दहेज़ के अगन में ,
महिलाएं मिट रही है ,
बाज़ार में सजी हैं ,
अबलाएँ बिक रहीं हैं।


क्या यही लिखा है ,
मेरे देश के करम में,
सिसकती रहे बेटी ,
शैतानों के हरम में ?


मैं वो ही तो चाहूँ ,
तेरे दिल ने जो पुकारा,
सारे  जहाँ  से अच्छा ,
हिन्दुस्तां   हमारा।


पर अभी भी बेटी का
बाप है बेचारा ,
कैसे कहूँ है बेहतर ,
है देश ये हमारा?


अजय अमिताभ सुमन:
सर्वाधिकार सुरक्षित
Sagar May 31
हम सोचते थे आएगी तुम्हारे गालों पर लाली..

पर हमारे शेर पर तो तुमने बजा दी ताली..
She is difficult :-
Sagar May 31
अभी तो तुम जवान हो..

एक अधुरी दास्तान हो..

जन्नत की इश्किया जुबान हो..

सब आशिकों का अरमान हो..

कितने कितनो की जान हो..

जवानी का गुमान हो..

मेरी मोहब्बतों की शान हो..

प्यार के खेल की मेजबान हो..
More from the jugalbandi with the poetess...
Sagar May 30
हर मुश्किल से तुम्हे पार करा दे, मैं वो नाव बन जाऊं..

थका देंगे तुम्हे ये शहर, तुम्हे आराम दे सके वो गांव बन जाऊं..

हर दर्द की धूप से बचाएं तुम्हे, मैं वो छांव बन जाऊं..

आओ तुम मेरी मस्तानी बन जाओ, और मैं तुम्हारा बाजीराव बन जाऊं..

तुम्हारे पापा खुद करें, मैं वो सुझाव बन जाऊं..

जिस में कोई दोहराई ना हो, मैं वो चुनाव बन जाऊं..

मीठा दर्द दे जो इश्क का, तुम पर मैं वो घाव बन जाऊं..

आओ तुम मेरी मस्तानी बन जाओ, और मैं तुम्हारा बाजीराव बन जाऊं..
This one's the outcome of a jugalbandi with a brilliant poetess...
If I could, I would capture you in my eyes and turn blind out of the fear of losing you
but then there is this thought
that opens my eyes.

If I could, I would cuddle you all day and all night till eternity
but then there is this thought
and I refrain from touching you..

When you smile
I simply want to freeze the time
but then there is this thought
that takes away the time from my clutches.

I want to spend countless sleepless nights
by just wondering about you
but then there is this one thought
that envelopes me with slumber of despair.

I want to write a lot,
express tons of feelings
but then there is this thought
and I feel helpless.

  "Kyon *** main tera raahi,
                     Jab tu hai kisi aur ki manzil"
Next page