Submit your work, meet writers and drop the ads. Become a member
(धर्म के ठेकेदारों से परमात्मा कहते है)

दिखावटी सा लगता है ये प्रेम तुम्हारा,
जो तुम मुझे बार बार दिखलाते हो।
बनावटी सी लगती है तुम्हारी सारी बातें,
जो तुम मेरे बारे मे औरों को बतलाते हो।

पहले खुद ही लड़ते हो, फिर खुद ही डर जाते हो,
बार बार मेरे ही नाम पर, ये हथियार क्यों उठाते हो?
मै ही तुम्हारा निर्माता, मै ही जगत रचयिता,
फिर मुझको किससे भय, जो तुम हर बार मेरी रक्षा करने चले आते हो?

दिखावटी सा लगता है ये प्रेम तुम्हारा,
जो तुम मुझे बार बार दिखलाते हो।


मुझको बाँट दिया तुमने धर्मों मे, दे दिये कई भिन्न नाम,
फिर क्यों दिन ओ रात खुद के दिए उसी नाम को गलियाते हो?
तुम भी मेरे ही बच्चे, वो भी है संतानें मेरी,
फिर क्यों एक दूसरे को भाई बोलने से तुम कतराते हो?

हर मुश्किल में, हर एक मुसीबत मे साथ तुम्हारे खड़ा मैं,
बावज़ूद इसके, क्यो तुम मेरा नाम लेने से हिचकिचाते हो?
जब सत्य जानते हो कि मै ही अल्लाह, मैं ही येशु, मैं ही हुं श्रीराम,
तो इतनी सी बात को स्वीकार करने मे तुम इतना क्यों सकुचाते हो?

दिखावटी सा लगता है ये प्रेम तुम्हारा,
जो तुम मुझे बार बार दिखलाते हो।
A poem about rising religious intolerance in the name of Almighty.
[अज़ान-हनुमान तो बहाना है,
असल मे तो महंगाई से ध्यान हटाना है!
]

(एक आदमी दूसरे कौम के आदमी से)
प्रदर्शन की सुनाई दे रही आहट है,
तभी सत्ता के गलियारों मे हरबड़ाहट है।
ऊपर से अपने लिए कोई संदेशा आया है,
फिर से उन्होंने आपसी सौहार्द बिगाड़ने को फरमाया है।

(संदेश पढ़ने के बाद वही आदमी)
मै लूंगा लाठी हाथ मे,
तुम भी पत्थर रखना साथ मे।
मै जोर जोर से चिल्लाऊंगा हनुमान,
तुम भी लाउडस्पीकर मे ही गाना अज़ान।

मै अपने लोगो मे, तुम अपने लोगो मे, फैला देना ये बात,
की सामने वाले कर रहे हमारे धर्म पर चोट की शुरुआत।
अगर हमने अभी ही नही बदले अपने ये हालात,
तो अगले ही पल खतरे मे आ जायेगी हमारी पूरी ज़मात।

उसके बाद, हमारे आका सामने आयेंगे, (हा वही आका जिन्होंने संदेशा भेजा था)
दोनो कौम मे नफरती आग फैलायेंगे।
मुझे और तुम्हे आपस मे लड़ाएंगे,
फिर खुद ही शांतिदूत बन जाएंगे।

(लेकिन उसके पहले, उनके शांतिदूत बनने से पहले)
खून की नदियाँ बहेंगी सड़को पर,
दंगों की गाज़ गिरेगी हमारे लड़कों पर।
खून के आँसू रायेगी मासूमियत,
किसी कब्र मे लेटी होगी इंसानियत।

आग की लपटे होंगी चारों ओर,
हर तरफ होगी चीख पुकार की शोर।
आपसी भाईचारे की तो कट ही जाएगी डोर,
हर तरफ धर्मांधता की होगी एक नई भोर।

कट्टर हो जायेगा इंसान, कट्टरता होगी हर रस्ते मे,
पेट्रोल-डिजल का तो पता नही, पर इंसानी जान मिलेगी सस्ते मे।
निंबू का दाम कोई नही पूछेगा, क्योकि खटास तो होगी हमारे ही भाईचारे मे,
हमे लड़ता देख वे हँसेंगे, और अट्टाहस होगी सत्ता के गलियारे मे।

(फिर वही आदमी कहता है)
लेकिन इससे हमे क्या, हम तो है नफरती मजदूर,
लाश पर इंसानो की चलके, बन चुके है हम बहुत क्रूर।
जरूरत कुछ हमारी भी है, तभी तो तलवे चाटने को है मज़बूर,
देखने मे लगते इंसान ही है, पर इंसानियत से अभी है कोशों दूर।

(अंत मे वही आदमी)
हमारा तो है बस इतना ही काम ,
हम तो सिर्फ है अपने आकाओं के गुलाम ।
जिस पल हमे मिलता उनका फरमान ,
निकल जाते उसी वक़्त, हम बर्बाद करने को सारा हिंदुस्तान।
It's my observation that riots don't occur by themselves. The people in power plan and create it; they appoint goons from both religions (Hinduism and Islam) and ask them to spread hatred against the other religions in their own community; these people are known as "नफ़रती मज़दूर" or "Labours of Hatred," don't know about others, but at least I call them. Riots are usually created when the people in power think any protest is going to happen against them regarding their policy. And this time the issue is "inflation" in India, which is why several riots are occurring in the name of Azaan (ISLAM) and Hanuman (HINDUISM)..! 


Planning to recite it out on my YouTube channel... So that, it may create more awareness.
You are so beautiful Ma Sha Allah Allahouma Barik.
Yes! I'm talking about you!

Imagine someone putting you together, piece by piece.
Every detail, every inch, every atom that makes you YOU was put together with utmost wisdom. His wisdom.
He swt wants you to look the way you actually look; amazing.

He wants you to have that skin color and texture. He wants you to have those beautiful eyes, even if you can't see through them. He wants you to have that beautiful nose, lashes, eyebrows, arms, legs, hands, feet and so on. Even if certain parts do not work properly, even if you do not fit into the beauty standards of today's world. And even if people start calling you names.

Remember, He named you first.
He swt named you with utmost wisdom, care and love.
Don't lose that name. Please, don't lose the way He created you just to fit into a beautified lie..

Love, I want you to understand that there is wisdom in every inch of your body; His wisdom. Meaning you're constantly carrying His wisdom around. That way you're constantly reminded of your name, of who you truly are;
A servant of Allah swt, crowned with the beauty of His wisdom

🤍
देख तेरे भारत की क्या हाल हो गयी राम,
हर तरफ अब बाकी रह गए है केवल दन्गो के निशान।
तेरे ही बच्चे सताये जा रहे है, लेकर तेरा ही नाम,
तुझपे ही हो रहे है ज़ुल्म, और तुझे ही किया जा रहा है बदनाम।

भगवा चोला ओढ़कर, ढोंगी बन बैठे है तेरे भक्त,
दूसरे कौम का बोलकर बहा रहे है तेरे ही संतानो के रक्त।
अब ये पता नही की वो दहशतगर्द है या है इस बात से अंजान,
की तु ही अल्लाह, तु ही नानक और तु ही है श्रीराम।
Happy RAM NAVAMI everyone.

A little truth..!

50th poem here 😅
I fell in love
With His words, His promises, His ways

And I fell, hard
Into sujood

The day I had fallen in love
With Death
Ceyhun Mahi Dec 2021
The tears I shed for you, all one by one,
Are more precious than moon or sun.
I hope they come alive at Judgment Day,
So they will intercede, before it's done.
Yousra Amatullah Nov 2021
Like an autumn tree
Let us absorb reality
Starting at the roots
Until our branches rain mastery

Reflect upon us like the sun does
Enlighten my trunk, my fiber
Sweeten the fruits of my leaves
Only to match the touch of saffron soil

To grow green, silk & brocade, I pray
Ending fall season, turned into gold, I supplicate
Naggingly I ask You, ٱلْمُعِزُّ
Gather this four-season-Ummah with just one breeze
Yousra Amatullah Aug 2021
You love yourself
As much as you love obeying Him
Next page