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Megha Thakur Aug 21
मेरे पास छोड़ जाओ,
अपनी खुशबू, अपनी बाते।
उन्हें सम्भाल कर रखूंगी मैं,
चाहे दिन हो या हो रातें।
- मेघा ठाकुर
Megha Thakur Aug 14
कभी चाहते थे,
तुम्हें ना खोना।

अभी चाहते हैं,
की काश तुम हमे कभी मिले ही ना होते।
-मेघा ठाकुर
Megha Thakur Aug 8
Everybody has their own flaws,
And it makes them glow.
So stop judging yourself,
And just go with the flow.
-Megha Thakur
Megha Thakur Aug 7
मन काग़ज़ की नाव,
जज़्बातों के समन्दर में बस बहें जा रहा है।
जो ये थम गया तो हैं डूब जाने का डर,
फिर भी ये आगे बढे जा रहा हैं।
-मेघा ठाकुर
Megha Thakur Aug 5
कुछ कहानियाँ,
कहानियाँ ही रह जाती हैं।
न वो अधूरी होती हैं,
न वो कभी पूरी हो पाती हैं।
वो अक्सर लोगों को,
समझ नहीं आती हैं।
पर फिर भी ये कहानियाँ,
लोगों को करीब लाती हैं।
-मेघा ठाकुर
Megha Thakur Aug 4
I
I don't want anyone to blame,
Whatever I have done I just want to claim.
I have my aim,
And my own game.
-Megha Thakur
Megha Thakur Jul 23
कौन क़ुबूल करता है,
की कोन कितना सच्चा है।
चाहे पतझड़ कितना भी लम्बा हो,
फूल तों फिर भी खिलता है।
क्या तुमने कभी किसीको मानते देखा है,
की वो मन से आज भी एक बच्चा है।
जितना जिसकी किस्मत में हो,
उतना उसको जरूर मिलता है।
-मेघा ठाकुर
Megha Thakur Jul 19
Freedom for me is,
Speaking my mind without being judged.
Laugh out loud,
Without getting nudged.
Why you always asks me to compromise,
When you know that you are the one who cannot adjust.
You ask me to keep my mouth shut,
then who gave you the right to burst.
If you cannot understand me,
Trust me I don't need your words.
For me you, your feelings, your thinking,
Everything related to you is absurd.
-Megha Thakur
Megha Thakur Jul 13
The first time we met, you gave me a book.
A book full of dreams and hopes, that I didn't took.
I was so lost in my pain and sorrow, that I didn't even gave it a look.
At that time, I had tolerated so much that I thought enough is enough and now is the extent of brook.
And wanted to take the revenge so badly, that I didn't realised that I have become a crook.
-Megha Thakur
Megha Thakur Jul 12
क्या कहें क्या दिल को चाहिए,
क्या इसको मिलता हैं।
कहाँ सुबह होती हैं,
कहाँ दिन ढलता हैं।
बिना उसकी मर्जी के,
क्या एक भी पत्ता हिलता हैं।
किस्मत पर कहाँ जनाब,
किसका ज़ोर चलता हैं।
- मेघा ठाकुर
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