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"iglesia" poems
Ilang Huwebes at Linggo na ba ang nagdaan? Ang aking mga bestida na nakalagay sa aparador ay laging pinagmamasdan. Sa oras ng alas singko'y tumutunog na ang aking selpon Magiinat at babangon. Sinisikap kong laging makapunta sa kapilya Doon sa tahanan Mo'y laging nadarama Ang pag-ibig mo at pagyakap sa akin sa tuwina Doon sa tahanan Mo'y naidudulog lahat ng aking nadaramang sakit at problema Hindi na po kami makapaghintay Ama Nais na po naming makabalik sa mahal **** Iglesia Kung saan itinuturo sa amin ang iyong totoo at mahahalagang aral at salita Ngunit alam kong darating ang araw, kami'y muling magsasama samang sa Iyo'y sasamba. Nagkaroon man ng isang pandemya Ngunit hindi nito napigil ang aking pananampalataya Narito pa rin at masigla Tunay na maawain at magpamahal Ka. Kahit sa aming sambahayan ay iginagawad pa rin ang pagsamba Sapagkat hangad naming Ika'y bigyan ng papuri at awitan ng kanta. Ang laging panalangin ay 'wag sana kaming kalilimutan, o Mahal kong Ama Kaming Iyong hinirang na sa Iyo'y lubos na nagtitiwala. Nasasabik na ang puso't kaluluwa ko Ang magpunta sa tahanan Mo Sa madaling araw na pagsamba Bumabangon ng maaga at mapapasabing, "Oras na upang maghanda, hinihintay na ako ng Ama."
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May 15, 2020
May 15, 2020 at 12:30 PM UTC
Sa Tahanan Mo
Exiliado soy equilibrista en virgen colina del planeta Gran Cantante . Con un verso de maldicion rompo el candado de la historia . La ley es alambrada, calabozo,cuartel, casa-celda, noche de prostituta, alba del moribundo, theoria del adepto pobre, religiosos empastillados, iglesia drogadicta. Yo el amante del dia absoluto no tengo Visa para la libertad .
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Sep 27, 2011
Sep 27, 2011 at 6:04 AM UTC
No tengo Visa para la libertad
π‘«π’Šπ’π’† 𝒂 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, 𝒆𝒍 𝒄𝒖𝒓𝒂 𝒑𝒖𝒆𝒅𝒆 𝒉𝒂𝒃𝒍𝒂𝒓 π’š 𝒍𝒂𝒅𝒓𝒂𝒓 𝒕𝒐𝒅𝒐 𝒍𝒐 𝒒𝒖𝒆 π’’π’–π’Šπ’†π’“π’‚, 𝒔𝒖𝒔 𝒑𝒂𝒍𝒂𝒃𝒓𝒂𝒔 𝒏𝒐 𝒔𝒐𝒏 𝒍𝒂 𝒗𝒆𝒓𝒅𝒂𝒅, 𝒆𝒔 𝒐𝒕𝒓𝒐 π’‰π’π’Žπ’ƒπ’“π’†; 𝒆𝒏 𝒆𝒍 π’‡π’Šπ’π’‚π’ 𝒅𝒆 𝒕𝒐𝒅𝒐, é𝒍 𝒏𝒖𝒏𝒄𝒂 𝒔𝒆𝒓Ñ π‘«π’Šπ’π’”. π‘«π’Šπ’π’† 𝒂 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, 𝒍𝒐𝒔 π’„π’“π’†π’šπ’†π’π’•π’†π’” 𝒏𝒐 𝒔𝒐𝒏 π’”π’†π’ˆπ’–π’Šπ’…π’π’“π’†π’” π’„π’Šπ’†π’ˆπ’π’”, 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚ 𝒏𝒐 𝒆𝒔 𝒑𝒆𝒓𝒇𝒆𝒄𝒕𝒂, 𝒆𝒔 𝒖𝒏𝒂 π’Šπ’π’”π’•π’Šπ’•π’–π’„π’ŠΓ³π’; 𝑨 𝒗𝒆𝒄𝒆𝒔 𝒆𝒔 π’Šπ’π’„π’π’–π’”π’ 𝒍𝒂 π’π’”π’„π’–π’“π’Šπ’…π’‚π’… 𝒂𝒍 π’‡π’Šπ’π’‚π’ 𝒅𝒆𝒍 𝒕ú𝒏𝒆𝒍. π‘«π’Šπ’π’† 𝒂 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, 𝒆𝒍 𝒑𝒖𝒆𝒃𝒍𝒐 𝒏𝒐 𝒔𝒐𝒏 𝒔𝒖𝒔 π’Žπ’‚π’”π’„π’π’•π’‚π’” 𝒑𝒂𝒓𝒂 π’…π’†π’”π’‡π’Šπ’π’‚π’“, Β‘π‘Ίπ’π’Žπ’π’” π’‰π’Šπ’‹π’π’” 𝒅𝒆 π‘«π’Šπ’π’”, 𝒏𝒐 𝒆𝒔𝒄𝒍𝒂𝒗𝒐𝒔 𝒅𝒆 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚! Β‘π‘Ίπ’Š 𝒍𝒂𝒔 𝒄𝒐𝒔𝒂𝒔 π’†π’Žπ’‘π’†π’π’“π’‚π’, 𝒆𝒔 𝒑𝒐𝒓 𝒄𝒖𝒍𝒑𝒂 𝒅𝒆 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚! Β‘π‘«π’Šπ’π’” 𝒆𝒔 𝒂𝒃𝒔𝒐𝒍𝒖𝒕𝒐, 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚ 𝒏𝒐! Β‘π‘«π’Šπ’π’” 𝒆𝒔 π’‚π’Žπ’π’“π’π’”π’ π’š π’π’Šπ’ƒπ’†π’“π’‚π’…π’π’“, 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚ 𝒏𝒐! 𝑬𝒍 π’‚π’Žπ’π’“ 𝒅𝒆 π‘«π’Šπ’π’” 𝒆𝒔 π’Šπ’π’„π’π’π’…π’Šπ’„π’Šπ’π’π’‚π’, 𝒄𝒐𝒏 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, ¿𝒅ó𝒏𝒅𝒆 𝒆𝒔𝒕Ñ 𝒆𝒍 π’‚π’Žπ’π’“? ‘𝒀 π‘«π’Šπ’π’” 𝒆𝒔 π’…π’Šπ’—π’Šπ’π’, 𝒃𝒐𝒏𝒅𝒂𝒅𝒐𝒔𝒐 π’š 𝒑𝒆𝒓𝒇𝒆𝒄𝒕𝒐, π’š 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚ 𝒏𝒖𝒏𝒄𝒂 𝒍𝒐 𝒔𝒆𝒓Ñ! 𝑬𝒏𝒕𝒐𝒏𝒄𝒆𝒔 π’…π’Šπ’π’† 𝒂 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, 𝒑𝒖𝒆𝒅𝒆𝒏 𝒉𝒂𝒄𝒆𝒓 𝒅𝒆 π’ŽΓ­ 𝒖𝒏 π’†π’π’†π’Žπ’Šπ’ˆπ’, π’’π’–π’†π’Žπ’‚π’…π’Žπ’† 𝒆𝒏 𝒍𝒂 π’‰π’π’ˆπ’–π’†π’“π’‚ 𝒐 π’‚π’‰π’π’“π’„π’‚π’…π’Žπ’† 𝒉𝒂𝒔𝒕𝒂 𝒒𝒖𝒆 π’”π’‚π’π’ˆπ’“π’†; ‘𝑨𝒍 π’‡π’Šπ’π’‚π’ 𝒅𝒆𝒍 𝒅í𝒂, 𝒑𝒐𝒓 π‘«π’Šπ’π’” 𝒕𝒐𝒅𝒂𝒗í𝒂 𝒄𝒓𝒆𝒆𝒓í𝒂! 𝒀 π’…π’Šπ’π’† 𝒂 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, 𝒑𝒖𝒆𝒅𝒆𝒏 π’”π’Šπ’π’†π’π’„π’Šπ’‚π’“π’Žπ’† 𝒐 π’‚π’•π’‚π’“π’Žπ’† 𝒍𝒐𝒔 𝒃𝒓𝒂𝒛𝒐𝒔, 𝒅𝒆𝒔𝒉𝒂𝒛𝒕𝒆 𝒅𝒆 π’ŽΓ­, π’„π’π’π’—π’Šπ’†π’“π’•π’† π’Žπ’Šπ’” 𝒉𝒖𝒆𝒔𝒐𝒔 𝒆𝒏 π’‚π’Žπ’–π’π’†π’•π’π’”; ‘𝑯𝒂𝒔𝒕𝒂 𝒆𝒍 π’‡π’Šπ’ 𝒅𝒆𝒍 π’Žπ’–π’π’…π’, 𝒍𝒐 ΓΊπ’π’Šπ’„π’ 𝒒𝒖𝒆 𝒉𝒂𝒄𝒆𝒏 𝒆𝒔 𝒅𝒂ñ𝒂𝒓! π‘ͺπ’‚π’šπ’‚'𝒕 π’”π’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’; ‘𝑬𝒍 𝒄𝒖𝒓𝒂 𝒏𝒖𝒏𝒄𝒂 𝒄𝒖𝒓𝒂𝒓Ñ, 𝒉𝒂𝒔𝒕𝒂 𝒒𝒖𝒆 𝒔𝒖 π’‚π’π’Žπ’‚ 𝒔𝒆𝒂 𝒑𝒖𝒓𝒂! ~~ π‘¨π’Œπ’Šπ’π’ˆ π’Žπ’Šπ’π’‚π’Žπ’‚π’‰Γ‘π’ 𝒏𝒂 π’„π’‚π’ƒπ’‚π’ƒΓ’π’šΓ‘π’, π‘Ίπ’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’, 𝒏𝒂 π’‚π’π’ˆ π’‘π’‚π’“π’Š π’‚π’š π’Žπ’‚Γ’π’‚π’“π’Šπ’π’ˆ π’Žπ’‚π’ˆπ’”π’‚π’π’Šπ’•π’‚ 𝒂𝒕 π’…π’–π’Žπ’‚π’π’…Γ‘π’ π’‰π’‚π’π’ˆπ’ˆπ’‚π’π’ˆ π’π’‚π’Šπ’”π’Šπ’ π’π’Šπ’šπ’‚, π’π’ˆπ’–π’π’Šπ’• π’‚π’π’ˆ π’„π’‚π’π’Šπ’šπ’‚π’π’ˆ π’Žπ’ˆπ’‚ π’”π’‚π’π’Šπ’•Γ’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’‚π’π’ˆ 𝒄𝒂𝒕𝒐𝒕𝒐𝒉Ñ𝒏𝒂𝒏, π’…π’‚π’‰π’Šπ’ π’”π’Šπ’šπ’‚ π’‚π’š π’Šπ’”π’‚π’π’ˆ 𝒕𝒂𝒐 π’π’‚π’Žπ’‚π’π’ˆ; π’”π’‚π’Žπ’‚π’Œπ’‚π’•π’–π’˜π’Šπ’…, π’‰π’Šπ’π’…π’Šπ’π’ˆ-π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’”π’Šπ’šπ’‚ π’Žπ’‚π’ˆπ’Šπ’ˆπ’Šπ’π’ˆ π’‚π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’”. π‘Ίπ’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’, π’‚π’π’ˆ π’Žπ’ˆπ’‚ π’Žπ’‚π’π’‚π’π’‚π’Žπ’‘π’‚π’π’‚π’•Γ’π’šπ’‚ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’Žπ’ˆπ’‚ π’ƒπ’–π’π’‚π’ˆ 𝒏𝒂 π’•π’‚π’ˆπ’‚π’”π’–π’π’π’… π’Γ‘π’Žπ’‚π’π’ˆ, π’‚π’π’ˆ π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰π’‚π’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’‘π’†π’“π’‘π’†π’Œπ’•π’, π’Šπ’•π’ π’‚π’š π’Šπ’”π’‚π’π’ˆ π’Šπ’π’”π’•π’Šπ’•Γ»π’”π’šπ’π’; π’Žπ’Šπ’π’”π’‚π’ π’Šπ’•π’ 𝒑𝒂 π’π’ˆπ’‚ π’‚π’π’ˆ π’…π’Šπ’π’Šπ’Ž 𝒔𝒂 𝒅𝒖𝒍𝒐 π’π’ˆ π’Žπ’‚π’‰π’‚π’ƒπ’‚π’π’ˆ π’π’‚π’ˆπ’–π’”π’‚π’. π‘Ίπ’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’, π’‚π’π’ˆ π’•π’‚π’π’π’ˆπ’ƒπ’‚π’šπ’‚π’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’„π’‚π’π’Šπ’π’‚π’π’ˆ π’Žπ’ˆπ’‚ π’‚π’π’‚π’ˆπ’‚π’π’ˆ π’‰π’‚π’šπ’π’‘ 𝒏𝒂 π’Žπ’‚Γ’π’‚π’“π’Šπ’π’ˆ π’Šπ’‘π’‚π’“π’‚π’…π’‚, π’•π’‚π’šπ’ π’‚π’š π’Žπ’ˆπ’‚ π’‚π’π’‚π’Œ π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’”, π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’Žπ’ˆπ’‚ π’‚π’π’Šπ’‘π’Šπ’ π’π’ˆ π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’! 𝑨𝒕 π’‘π’‚π’ˆ π’π’–π’Žπ’‚π’π’‚ 𝒑𝒂 𝒍𝒂𝒍𝒐 π’‚π’π’ˆ π’Žπ’‚π’”π’‚π’Žπ’‚, π’Šπ’•π’ π’“π’Šπ’ π’‚π’š π’…π’‚π’‰π’Šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰π’‚π’! π‘¨π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’” π’‚π’š π’•π’Šπ’šπ’‚π’Œ, π’‚π’π’ˆ π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š! π‘¨π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’” π’‚π’š π’Žπ’‚π’‘π’‚π’ˆπ’Žπ’‚π’‰π’‚π’ 𝒂𝒕 π’π’‚π’ˆπ’‘π’‚π’‘π’‚π’π’‚π’šπ’‚, π’‚π’π’ˆ π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š! π‘¨π’π’ˆ π’‘π’‚π’ˆ-π’Šπ’ƒπ’Šπ’ˆ π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’” π’‚π’š π’˜π’‚π’π’‚π’π’ˆ π’Œπ’–π’π’…π’Šπ’”π’šπ’π’, 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰π’‚π’, 𝒏𝒂𝒔𝒂𝒂𝒏 π’‚π’π’ˆ π’‘π’‚π’ˆ-π’Šπ’ƒπ’Šπ’ˆ?! 𝑨𝒕 π’‚π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’” π’‚π’š 𝒃𝒂𝒏𝒂𝒍, π’Žπ’‚π’ƒπ’‚π’Šπ’• 𝒂𝒕 π’˜π’‚π’π’‚π’π’ˆ π’Œπ’‚π’Žπ’‚π’π’Š-π’Žπ’‚π’π’Š, 𝒂𝒕 π’‚π’π’ˆ π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰π’‚π’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’Œπ’‚π’Šπ’π’‚π’π’Žπ’‚π’ π’Žπ’‚π’ˆπ’Šπ’ˆπ’Šπ’π’ˆ! π‘ͺπ’‚π’šπ’‚'𝒕 π’”π’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’, π’Žπ’‚Γ’π’‚π’“π’Š π’π’Šπ’π’‚ π’‚π’Œπ’π’π’ˆ π’Šπ’•π’–π’“π’Šπ’π’ˆ 𝒏𝒂 π’Šπ’”π’‚π’π’ˆ 𝒄𝒂𝒍𝒂𝒃𝒂𝒏, π’‚π’Œπ’'π’š π’”π’–π’π’–π’ˆπ’Šπ’ 𝒔𝒂 𝒕𝒖𝒍ô𝒔 𝒐 π’ƒπ’Šπ’•π’‚π’šπ’Šπ’ 𝒔𝒂 𝒆𝒏𝒕𝒂𝒃𝒍𝒂𝒅𝒐, π’”π’‚π’Œπ’”π’‚π’Œπ’Šπ’ π’‰π’‚π’π’ˆπ’ˆπ’‚π’π’ˆ 𝒔𝒂 π’…π’–π’Žπ’‚π’π’‚π’Œ π’‚π’π’ˆ π’…π’–π’ˆπ’ π’Œπ’; π’‘π’‚π’ˆπ’„π’‚π’•π’‚π’‘π’π’” π’π’ˆ 𝒍𝒂𝒉𝒂𝒕 π’π’ˆ π’Šπ’•π’, π’Žπ’‚π’π’Šπ’π’Šπ’˜π’‚π’Γ‘ 𝒑𝒂 π’“π’Šπ’ π’‚π’Œπ’ 𝒔𝒂 π‘«π’Šπ’šπ’π’”! 𝑨𝒕 π’”π’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’, π’Žπ’‚Γ’π’‚π’“π’Š π’π’Šπ’π’‚ π’‚π’Œπ’π’π’ˆ π’‘π’‚π’•π’‚π’‰π’Šπ’Žπ’Šπ’Œπ’Šπ’ 𝒐 π’Šπ’•π’‚π’π’Š π’Žπ’‚π’ π’π’Šπ’π’‚ π’‚π’π’ˆ π’‚π’Œπ’Šπ’π’ˆ π’Žπ’ˆπ’‚ 𝒃𝒓𝒂𝒔𝒐, π’Šπ’‘π’‚π’•π’‚π’‘π’π’ π’π’Šπ’π’‚ π’‚π’Œπ’, π’ˆπ’‚π’˜π’Šπ’π’ˆ π’‚π’π’•π’Šπ’π’ˆ-π’‚π’π’•π’Šπ’π’ˆ π’‚π’π’ˆ π’‚π’Œπ’Šπ’π’ˆ π’Žπ’ˆπ’‚ 𝒃𝒖𝒕𝒐; π’‰π’‚π’π’ˆπ’ˆπ’‚π’π’ˆ 𝒔𝒂 𝒄𝒂𝒕Ñ𝒑𝒖𝒔𝒂𝒏 π’π’ˆ π’Žπ’–π’π’…π’, 𝒍𝒂𝒉𝒂𝒕 π’π’ˆ π’ˆπ’Šπ’π’‚π’ˆπ’‚π’˜π’‚ π’π’Šπ’π’‚ π’‚π’š π’‘π’‚π’π’‚π’Γ‘π’Œπ’Šπ’• 𝒂𝒕 π’‘π’‚π’π’ˆ-𝒂𝒂𝒃𝒖𝒔𝒐! π‘Ίπ’–π’Žπ’‚π’”π’‚π’Šπ’π’šπ’, 𝑳𝒂 π‘­π’Šπ’π’Šπ’ƒπ’–π’”π’•π’†π’“π’‚
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Jun 7, 2024
Jun 7, 2024 at 4:46 AM UTC
DΓ­le a la Iglesia (Sabihin Ninyo sa Simbahan)
π‘«π’Šπ’π’† 𝒂 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, 𝒆𝒍 𝒄𝒖𝒓𝒂 𝒑𝒖𝒆𝒅𝒆 𝒉𝒂𝒃𝒍𝒂𝒓 π’š 𝒍𝒂𝒅𝒓𝒂𝒓 𝒕𝒐𝒅𝒐 𝒍𝒐 𝒒𝒖𝒆 π’’π’–π’Šπ’†π’“π’‚, 𝒔𝒖𝒔 𝒑𝒂𝒍𝒂𝒃𝒓𝒂𝒔 𝒏𝒐 𝒔𝒐𝒏 𝒍𝒂 𝒗𝒆𝒓𝒅𝒂𝒅, 𝒆𝒔 𝒐𝒕𝒓𝒐 π’‰π’π’Žπ’ƒπ’“π’†; 𝒆𝒏 𝒆𝒍 π’‡π’Šπ’π’‚π’ 𝒅𝒆 𝒕𝒐𝒅𝒐, é𝒍 𝒏𝒖𝒏𝒄𝒂 𝒔𝒆𝒓Ñ π‘«π’Šπ’π’”. π‘«π’Šπ’π’† 𝒂 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, 𝒍𝒐𝒔 π’„π’“π’†π’šπ’†π’π’•π’†π’” 𝒏𝒐 𝒔𝒐𝒏 π’”π’†π’ˆπ’–π’Šπ’…π’π’“π’†π’” π’„π’Šπ’†π’ˆπ’π’”, 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚ 𝒏𝒐 𝒆𝒔 𝒑𝒆𝒓𝒇𝒆𝒄𝒕𝒂, 𝒆𝒔 𝒖𝒏𝒂 π’Šπ’π’”π’•π’Šπ’•π’–π’„π’ŠΓ³π’; 𝑨 𝒗𝒆𝒄𝒆𝒔 𝒆𝒔 π’Šπ’π’„π’π’–π’”π’ 𝒍𝒂 π’π’”π’„π’–π’“π’Šπ’…π’‚π’… 𝒂𝒍 π’‡π’Šπ’π’‚π’ 𝒅𝒆𝒍 𝒕ú𝒏𝒆𝒍. π‘«π’Šπ’π’† 𝒂 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, 𝒆𝒍 𝒑𝒖𝒆𝒃𝒍𝒐 𝒏𝒐 𝒔𝒐𝒏 𝒔𝒖𝒔 π’Žπ’‚π’”π’„π’π’•π’‚π’” 𝒑𝒂𝒓𝒂 π’…π’†π’”π’‡π’Šπ’π’‚π’“, Β‘π‘Ίπ’π’Žπ’π’” π’‰π’Šπ’‹π’π’” 𝒅𝒆 π‘«π’Šπ’π’”, 𝒏𝒐 𝒆𝒔𝒄𝒍𝒂𝒗𝒐𝒔 𝒅𝒆 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚! Β‘π‘Ίπ’Š 𝒍𝒂𝒔 𝒄𝒐𝒔𝒂𝒔 π’†π’Žπ’‘π’†π’π’“π’‚π’, 𝒆𝒔 𝒑𝒐𝒓 𝒄𝒖𝒍𝒑𝒂 𝒅𝒆 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚! Β‘π‘«π’Šπ’π’” 𝒆𝒔 𝒂𝒃𝒔𝒐𝒍𝒖𝒕𝒐, 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚ 𝒏𝒐! Β‘π‘«π’Šπ’π’” 𝒆𝒔 π’‚π’Žπ’π’“π’π’”π’ π’š π’π’Šπ’ƒπ’†π’“π’‚π’…π’π’“, 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚ 𝒏𝒐! 𝑬𝒍 π’‚π’Žπ’π’“ 𝒅𝒆 π‘«π’Šπ’π’” 𝒆𝒔 π’Šπ’π’„π’π’π’…π’Šπ’„π’Šπ’π’π’‚π’, 𝒄𝒐𝒏 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, ¿𝒅ó𝒏𝒅𝒆 𝒆𝒔𝒕Ñ 𝒆𝒍 π’‚π’Žπ’π’“? ‘𝒀 π‘«π’Šπ’π’” 𝒆𝒔 π’…π’Šπ’—π’Šπ’π’, 𝒃𝒐𝒏𝒅𝒂𝒅𝒐𝒔𝒐 π’š 𝒑𝒆𝒓𝒇𝒆𝒄𝒕𝒐, π’š 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚ 𝒏𝒖𝒏𝒄𝒂 𝒍𝒐 𝒔𝒆𝒓Ñ! 𝑬𝒏𝒕𝒐𝒏𝒄𝒆𝒔 π’…π’Šπ’π’† 𝒂 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, 𝒑𝒖𝒆𝒅𝒆𝒏 𝒉𝒂𝒄𝒆𝒓 𝒅𝒆 π’ŽΓ­ 𝒖𝒏 π’†π’π’†π’Žπ’Šπ’ˆπ’, π’’π’–π’†π’Žπ’‚π’…π’Žπ’† 𝒆𝒏 𝒍𝒂 π’‰π’π’ˆπ’–π’†π’“π’‚ 𝒐 π’‚π’‰π’π’“π’„π’‚π’…π’Žπ’† 𝒉𝒂𝒔𝒕𝒂 𝒒𝒖𝒆 π’”π’‚π’π’ˆπ’“π’†; ‘𝑨𝒍 π’‡π’Šπ’π’‚π’ 𝒅𝒆𝒍 𝒅í𝒂, 𝒑𝒐𝒓 π‘«π’Šπ’π’” 𝒕𝒐𝒅𝒂𝒗í𝒂 𝒄𝒓𝒆𝒆𝒓í𝒂! 𝒀 π’…π’Šπ’π’† 𝒂 𝒍𝒂 π’Šπ’ˆπ’π’†π’”π’Šπ’‚, 𝒑𝒖𝒆𝒅𝒆𝒏 π’”π’Šπ’π’†π’π’„π’Šπ’‚π’“π’Žπ’† 𝒐 π’‚π’•π’‚π’“π’Žπ’† 𝒍𝒐𝒔 𝒃𝒓𝒂𝒛𝒐𝒔, 𝒅𝒆𝒔𝒉𝒂𝒛𝒕𝒆 𝒅𝒆 π’ŽΓ­, π’„π’π’π’—π’Šπ’†π’“π’•π’† π’Žπ’Šπ’” 𝒉𝒖𝒆𝒔𝒐𝒔 𝒆𝒏 π’‚π’Žπ’–π’π’†π’•π’π’”; ‘𝑯𝒂𝒔𝒕𝒂 𝒆𝒍 π’‡π’Šπ’ 𝒅𝒆𝒍 π’Žπ’–π’π’…π’, 𝒍𝒐 ΓΊπ’π’Šπ’„π’ 𝒒𝒖𝒆 𝒉𝒂𝒄𝒆𝒏 𝒆𝒔 𝒅𝒂ñ𝒂𝒓! π‘ͺπ’‚π’šπ’‚'𝒕 π’”π’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’; ‘𝑬𝒍 𝒄𝒖𝒓𝒂 𝒏𝒖𝒏𝒄𝒂 𝒄𝒖𝒓𝒂𝒓Ñ, 𝒉𝒂𝒔𝒕𝒂 𝒒𝒖𝒆 𝒔𝒖 π’‚π’π’Žπ’‚ 𝒔𝒆𝒂 𝒑𝒖𝒓𝒂! ~~ π‘¨π’Œπ’Šπ’π’ˆ π’Žπ’Šπ’π’‚π’Žπ’‚π’‰Γ‘π’ 𝒏𝒂 π’„π’‚π’ƒπ’‚π’ƒΓ’π’šΓ‘π’, π‘Ίπ’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’, 𝒏𝒂 π’‚π’π’ˆ π’‘π’‚π’“π’Š π’‚π’š π’Žπ’‚Γ’π’‚π’“π’Šπ’π’ˆ π’Žπ’‚π’ˆπ’”π’‚π’π’Šπ’•π’‚ 𝒂𝒕 π’…π’–π’Žπ’‚π’π’…Γ‘π’ π’‰π’‚π’π’ˆπ’ˆπ’‚π’π’ˆ π’π’‚π’Šπ’”π’Šπ’ π’π’Šπ’šπ’‚, π’π’ˆπ’–π’π’Šπ’• π’‚π’π’ˆ π’„π’‚π’π’Šπ’šπ’‚π’π’ˆ π’Žπ’ˆπ’‚ π’”π’‚π’π’Šπ’•Γ’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’‚π’π’ˆ 𝒄𝒂𝒕𝒐𝒕𝒐𝒉Ñ𝒏𝒂𝒏, π’…π’‚π’‰π’Šπ’ π’”π’Šπ’šπ’‚ π’‚π’š π’Šπ’”π’‚π’π’ˆ 𝒕𝒂𝒐 π’π’‚π’Žπ’‚π’π’ˆ; π’”π’‚π’Žπ’‚π’Œπ’‚π’•π’–π’˜π’Šπ’…, π’‰π’Šπ’π’…π’Šπ’π’ˆ-π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’”π’Šπ’šπ’‚ π’Žπ’‚π’ˆπ’Šπ’ˆπ’Šπ’π’ˆ π’‚π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’”. π‘Ίπ’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’, π’‚π’π’ˆ π’Žπ’ˆπ’‚ π’Žπ’‚π’π’‚π’π’‚π’Žπ’‘π’‚π’π’‚π’•Γ’π’šπ’‚ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’Žπ’ˆπ’‚ π’ƒπ’–π’π’‚π’ˆ 𝒏𝒂 π’•π’‚π’ˆπ’‚π’”π’–π’π’π’… π’Γ‘π’Žπ’‚π’π’ˆ, π’‚π’π’ˆ π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰π’‚π’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’‘π’†π’“π’‘π’†π’Œπ’•π’, π’Šπ’•π’ π’‚π’š π’Šπ’”π’‚π’π’ˆ π’Šπ’π’”π’•π’Šπ’•Γ»π’”π’šπ’π’; π’Žπ’Šπ’π’”π’‚π’ π’Šπ’•π’ 𝒑𝒂 π’π’ˆπ’‚ π’‚π’π’ˆ π’…π’Šπ’π’Šπ’Ž 𝒔𝒂 𝒅𝒖𝒍𝒐 π’π’ˆ π’Žπ’‚π’‰π’‚π’ƒπ’‚π’π’ˆ π’π’‚π’ˆπ’–π’”π’‚π’. π‘Ίπ’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’, π’‚π’π’ˆ π’•π’‚π’π’π’ˆπ’ƒπ’‚π’šπ’‚π’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’„π’‚π’π’Šπ’π’‚π’π’ˆ π’Žπ’ˆπ’‚ π’‚π’π’‚π’ˆπ’‚π’π’ˆ π’‰π’‚π’šπ’π’‘ 𝒏𝒂 π’Žπ’‚Γ’π’‚π’“π’Šπ’π’ˆ π’Šπ’‘π’‚π’“π’‚π’…π’‚, π’•π’‚π’šπ’ π’‚π’š π’Žπ’ˆπ’‚ π’‚π’π’‚π’Œ π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’”, π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’Žπ’ˆπ’‚ π’‚π’π’Šπ’‘π’Šπ’ π’π’ˆ π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’! 𝑨𝒕 π’‘π’‚π’ˆ π’π’–π’Žπ’‚π’π’‚ 𝒑𝒂 𝒍𝒂𝒍𝒐 π’‚π’π’ˆ π’Žπ’‚π’”π’‚π’Žπ’‚, π’Šπ’•π’ π’“π’Šπ’ π’‚π’š π’…π’‚π’‰π’Šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰π’‚π’! π‘¨π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’” π’‚π’š π’•π’Šπ’šπ’‚π’Œ, π’‚π’π’ˆ π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š! π‘¨π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’” π’‚π’š π’Žπ’‚π’‘π’‚π’ˆπ’Žπ’‚π’‰π’‚π’ 𝒂𝒕 π’π’‚π’ˆπ’‘π’‚π’‘π’‚π’π’‚π’šπ’‚, π’‚π’π’ˆ π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š! π‘¨π’π’ˆ π’‘π’‚π’ˆ-π’Šπ’ƒπ’Šπ’ˆ π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’” π’‚π’š π’˜π’‚π’π’‚π’π’ˆ π’Œπ’–π’π’…π’Šπ’”π’šπ’π’, 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰π’‚π’, 𝒏𝒂𝒔𝒂𝒂𝒏 π’‚π’π’ˆ π’‘π’‚π’ˆ-π’Šπ’ƒπ’Šπ’ˆ?! 𝑨𝒕 π’‚π’π’ˆ π‘«π’Šπ’šπ’π’” π’‚π’š 𝒃𝒂𝒏𝒂𝒍, π’Žπ’‚π’ƒπ’‚π’Šπ’• 𝒂𝒕 π’˜π’‚π’π’‚π’π’ˆ π’Œπ’‚π’Žπ’‚π’π’Š-π’Žπ’‚π’π’Š, 𝒂𝒕 π’‚π’π’ˆ π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰π’‚π’ π’‚π’š π’‰π’Šπ’π’…π’Š π’Œπ’‚π’Šπ’π’‚π’π’Žπ’‚π’ π’Žπ’‚π’ˆπ’Šπ’ˆπ’Šπ’π’ˆ! π‘ͺπ’‚π’šπ’‚'𝒕 π’”π’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’, π’Žπ’‚Γ’π’‚π’“π’Š π’π’Šπ’π’‚ π’‚π’Œπ’π’π’ˆ π’Šπ’•π’–π’“π’Šπ’π’ˆ 𝒏𝒂 π’Šπ’”π’‚π’π’ˆ 𝒄𝒂𝒍𝒂𝒃𝒂𝒏, π’‚π’Œπ’'π’š π’”π’–π’π’–π’ˆπ’Šπ’ 𝒔𝒂 𝒕𝒖𝒍ô𝒔 𝒐 π’ƒπ’Šπ’•π’‚π’šπ’Šπ’ 𝒔𝒂 𝒆𝒏𝒕𝒂𝒃𝒍𝒂𝒅𝒐, π’”π’‚π’Œπ’”π’‚π’Œπ’Šπ’ π’‰π’‚π’π’ˆπ’ˆπ’‚π’π’ˆ 𝒔𝒂 π’…π’–π’Žπ’‚π’π’‚π’Œ π’‚π’π’ˆ π’…π’–π’ˆπ’ π’Œπ’; π’‘π’‚π’ˆπ’„π’‚π’•π’‚π’‘π’π’” π’π’ˆ 𝒍𝒂𝒉𝒂𝒕 π’π’ˆ π’Šπ’•π’, π’Žπ’‚π’π’Šπ’π’Šπ’˜π’‚π’Γ‘ 𝒑𝒂 π’“π’Šπ’ π’‚π’Œπ’ 𝒔𝒂 π‘«π’Šπ’šπ’π’”! 𝑨𝒕 π’”π’‚π’ƒπ’Šπ’‰π’Šπ’ π’π’Šπ’π’šπ’ 𝒔𝒂 π’”π’Šπ’Žπ’ƒπ’‚π’‰Γ‘π’, π’Žπ’‚Γ’π’‚π’“π’Š π’π’Šπ’π’‚ π’‚π’Œπ’π’π’ˆ π’‘π’‚π’•π’‚π’‰π’Šπ’Žπ’Šπ’Œπ’Šπ’ 𝒐 π’Šπ’•π’‚π’π’Š π’Žπ’‚π’ π’π’Šπ’π’‚ π’‚π’π’ˆ π’‚π’Œπ’Šπ’π’ˆ π’Žπ’ˆπ’‚ 𝒃𝒓𝒂𝒔𝒐, π’Šπ’‘π’‚π’•π’‚π’‘π’π’ π’π’Šπ’π’‚ π’‚π’Œπ’, π’ˆπ’‚π’˜π’Šπ’π’ˆ π’‚π’π’•π’Šπ’π’ˆ-π’‚π’π’•π’Šπ’π’ˆ π’‚π’π’ˆ π’‚π’Œπ’Šπ’π’ˆ π’Žπ’ˆπ’‚ 𝒃𝒖𝒕𝒐; π’‰π’‚π’π’ˆπ’ˆπ’‚π’π’ˆ 𝒔𝒂 𝒄𝒂𝒕Ñ𝒑𝒖𝒔𝒂𝒏 π’π’ˆ π’Žπ’–π’π’…π’, 𝒍𝒂𝒉𝒂𝒕 π’π’ˆ π’ˆπ’Šπ’π’‚π’ˆπ’‚π’˜π’‚ π’π’Šπ’π’‚ π’‚π’š π’‘π’‚π’π’‚π’Γ‘π’Œπ’Šπ’• 𝒂𝒕 π’‘π’‚π’π’ˆ-𝒂𝒂𝒃𝒖𝒔𝒐! π‘Ίπ’–π’Žπ’‚π’”π’‚π’Šπ’π’šπ’, 𝑳𝒂 π‘­π’Šπ’π’Šπ’ƒπ’–π’”π’•π’†π’“π’‚
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Manuel del RΓ­o, natural de EspaΓ±a, ha fallecido el sΓ‘bado 11 de mayo, a consecuencia de un accidente. Su cadΓ‘ver estΓ‘ tendido en D'Agostino Funeral Home. Haskell. New Jersey. Se dirΓ‘ una misa cantada a las 9,30 en St. Francis. Es una historia que comienza con sol y piedra, y que termina sobre una mesa, en D'Agostino, con flores y cirios elΓ©ctricos. Es una historia que comienza en una orilla del AtlΓ‘ntico. ContinΓΊa en un camarote de tercera, sobre las olas -sobre las nubes- de las tierras sumergidas ante PoseidΓ³n. Halla en AmΓ©rica su tΓ©rmino con una grΓΊa y una clΓ­nica, con una esquela y una misa cantada, en la iglesia de St. Francis. Al fin y al cabo, cualquier sitio da lo mismo para morir: el que se aroma de romero, el tallado en piedra o en nieve, el empapado de petrΓ³leo. Da lo mismo que un cuerpo se haga piedra, petrΓ³leo, nieve, aroma. Lo doloroso no es morir acΓ‘ o allΓ‘... Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Requiem Γ¦ternam, Manuel del RΓ­o. Sobre el mΓ‘rmol en D'Agostino, pastan toros de EspaΓ±a, Manuel, y las flores (funeral de segunda, caja que huele a abetos del invierno) cuarenta dΓ³lares. Y han puesto unas flores artificiales entre las otras que arrancaron al jardΓ­n... Libera me domine de morte Γ¦terna... Cuando mueran James o Jacob verΓ‘n las flores que pagaron Giulio o Manuel... Ahora descienden a tus cumbres garras de Γ‘guila. Dies irae. Lo doloroso no es morir Dies illa acΓ‘ o allΓ‘; sino sin gloria... Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Tus abuelos fecundaron la tierra toda, la empaparon de la aventura. Cuando caΓ­a un espaΓ±ol se mutilaba el Universo. Los velaban no en D'Agostino Funeral Home, sino entre hogueras, entre caballos y armas. HΓ©roes para siempre. Estatuas de rostro borrado. Vestidos aΓΊn sus colores de papagayo, de poder y de fantasΓ­a. Γ‰l no ha caΓ­do asΓ­. No ha muerto por ninguna locura hermosa. (Hace mucho que el espaΓ±ol muere de anΓ³nimo y cordura, o en locuras desgarradoras entre hermanos: cuando acuchilla pellejos de vino derrama sangre fraterna). Vino un dΓ­a porque su tierra es pobre. El Mundo, Liberanos Domine, es patria. Y ha muerto. No fundΓ³ ciudades. No dio su nombre a un mar. No hizo mΓ‘s que morir por diecisiete dΓ³lares (Γ©l los pensarΓ­a en pesetas). Requiem Γ¦ternam. Y en D'Agostino lo visitan los polacos, los irlandeses, los espaΓ±oles, los que mueren en el week-end. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Requiem Γ¦ternam. Definitivamente todo ha terminado. Su cadΓ‘ver estΓ‘ tendido en D'Agostino Funeral Home. Haskell. New Jersey. Se dirΓ‘ una misa cantada por su alma. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Me he limitado a reflejar aquΓ­ una esquela de un periΓ³dico de New York. Objetivamente. Sin vuelo en el verso. Objetivamente. Un espaΓ±ol como millones de espaΓ±oles. No he dicho a nadie que estuve a punto de llorar.
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RΓ©quiem
Manuel del RΓ­o, natural de EspaΓ±a, ha fallecido el sΓ‘bado 11 de mayo, a consecuencia de un accidente. Su cadΓ‘ver estΓ‘ tendido en D'Agostino Funeral Home. Haskell. New Jersey. Se dirΓ‘ una misa cantada a las 9,30 en St. Francis. Es una historia que comienza con sol y piedra, y que termina sobre una mesa, en D'Agostino, con flores y cirios elΓ©ctricos. Es una historia que comienza en una orilla del AtlΓ‘ntico. ContinΓΊa en un camarote de tercera, sobre las olas -sobre las nubes- de las tierras sumergidas ante PoseidΓ³n. Halla en AmΓ©rica su tΓ©rmino con una grΓΊa y una clΓ­nica, con una esquela y una misa cantada, en la iglesia de St. Francis. Al fin y al cabo, cualquier sitio da lo mismo para morir: el que se aroma de romero, el tallado en piedra o en nieve, el empapado de petrΓ³leo. Da lo mismo que un cuerpo se haga piedra, petrΓ³leo, nieve, aroma. Lo doloroso no es morir acΓ‘ o allΓ‘... Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Requiem Γ¦ternam, Manuel del RΓ­o. Sobre el mΓ‘rmol en D'Agostino, pastan toros de EspaΓ±a, Manuel, y las flores (funeral de segunda, caja que huele a abetos del invierno) cuarenta dΓ³lares. Y han puesto unas flores artificiales entre las otras que arrancaron al jardΓ­n... Libera me domine de morte Γ¦terna... Cuando mueran James o Jacob verΓ‘n las flores que pagaron Giulio o Manuel... Ahora descienden a tus cumbres garras de Γ‘guila. Dies irae. Lo doloroso no es morir Dies illa acΓ‘ o allΓ‘; sino sin gloria... Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Tus abuelos fecundaron la tierra toda, la empaparon de la aventura. Cuando caΓ­a un espaΓ±ol se mutilaba el Universo. Los velaban no en D'Agostino Funeral Home, sino entre hogueras, entre caballos y armas. HΓ©roes para siempre. Estatuas de rostro borrado. Vestidos aΓΊn sus colores de papagayo, de poder y de fantasΓ­a. Γ‰l no ha caΓ­do asΓ­. No ha muerto por ninguna locura hermosa. (Hace mucho que el espaΓ±ol muere de anΓ³nimo y cordura, o en locuras desgarradoras entre hermanos: cuando acuchilla pellejos de vino derrama sangre fraterna). Vino un dΓ­a porque su tierra es pobre. El Mundo, Liberanos Domine, es patria. Y ha muerto. No fundΓ³ ciudades. No dio su nombre a un mar. No hizo mΓ‘s que morir por diecisiete dΓ³lares (Γ©l los pensarΓ­a en pesetas). Requiem Γ¦ternam. Y en D'Agostino lo visitan los polacos, los irlandeses, los espaΓ±oles, los que mueren en el week-end. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Requiem Γ¦ternam. Definitivamente todo ha terminado. Su cadΓ‘ver estΓ‘ tendido en D'Agostino Funeral Home. Haskell. New Jersey. Se dirΓ‘ una misa cantada por su alma. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Me he limitado a reflejar aquΓ­ una esquela de un periΓ³dico de New York. Objetivamente. Sin vuelo en el verso. Objetivamente. Un espaΓ±ol como millones de espaΓ±oles. No he dicho a nadie que estuve a punto de llorar.
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Hoy te extraΓ±Γ© intensamente de la nada y los pequeΓ±os recuerdos de nuestra historia cayeron una vez mΓ‘s. Me puse a pensar que despuΓ©s de tantos aΓ±os tu rostro todavΓ­a me trae felicidad cada que te encuentro sin querer en los lugares mΓ‘s random, y ya sabes, nada es casualidad, o al menos eso me gusta creer a mi, algo asΓ­ como el destino. Pienso en ti y en que tus noticias me duelen, y aΓΊn que no creo mucho en la Iglesia (algo que probablemente no sepas de mi), si creo en Dios y le pido que tu vida sea la mΓ‘s feliz. Nuestros recuerdos me han perseguido de maneras que nunca imaginarΓ‘s, los canto, los grito, los lloro, los escribo..aunque serΓ­a mejor enterrarlos en una caja por muchos aΓ±os, pero fallΓ³ en el intento cada dΓ­a a las seis de la maΓ±ana, cuando me levanto y me acuerdo que hace algunos amaneceres a esa misma hora me dormΓ­a con el sonido de tu voz en el telΓ©fono, pero esos recuerdos algunas veces me hacen sentir mejor, vivir mejor. Pero en fin, cuando me pienses, recuΓ©rdame como se debe, con una sonrisa de esquina a esquina, porque asΓ­ te recuerdo yo. No me borres si no te da la gana, y si llegas a borrarme acuΓ©rdate de mi. Que te borrΓ© tantas veces y hoy te escribΓ­. -J
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Aug 30, 2016
Aug 30, 2016 at 3:01 AM UTC
Que te borrΓ© tantas veces y hoy te escribΓ­.
A dios no lo encontrΓ© precisamente en una iglesia, ni tampoco en un sermΓ³n. No nos conocimos un domingo, ni se me presentΓ³ envuelto en sotanas. A dios lo vi en una solitaria zebra, en un hocico hΓΊmedo y arrugado, y en el tΓ­mido beso de una hiena. En el sincronizado nado de los delfines, la jorobada espalda de una ballena y un atardecer radiante de rojo y azul. Me lo topΓ© en las canas de mi padre y la fe intensa de mi madre. En la tenacidad de mi hermanita, convertida hoy en empoderada mujer, y en el calor de esas amistades que prevalecen a pesar de tiempo y distancia. Dios se me apareciΓ³ en un primer beso y una caricia sincera. Lo encontrΓ© detrΓ‘s de ese par de ojos azules que gritaban β€œte amo”, y en la impotencia y el dolor que hoy causa el haberlos perdido. Lo atrapΓ© escondido en la grandeza de Machu Picchu, y corriendo por las majestuosas planicies sudafricanas. En las calles de mi pueblo pequeΓ±ito, tan lleno de virtudes y problemas, y en el eco del grito latinoamericano. A dios lo veo en las cicatrices que exhiben mis rodillas, producto de cada caΓ­da. Reside en mi fuerza y coraje, que me han levantado, y tambiΓ©n en cada persona que me ha brindado una mano. Y es que a dios lo veo en algo tan simple como lo es la gracia de ser humano. En la risa, el Γ©xito, el dolor y los errores. El amor, la soledad, la esperanza y la incertidumbre. Dios, mis amigos, estΓ‘ en la valentΓ­a de vivir.
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Nov 8, 2015
Nov 8, 2015 at 6:52 PM UTC
dios
La luz devasta las alturas Β  Β  Β  Manadas de imperios en derrota Β  Β  Β  El ojo retrocede cercado de reflejos Β  Β  Β  PaΓ­ses vastos como el insomnio Β  Β  Β  Pedregales de hueso Β  Β  Β  OtoΓ±o sin confines Β  Β  Β  Alza la sed sus invisibles surtidores Β  Β  Β  Un ΓΊltimo pirΓΊ predica en el desierto Β  Β  Β  Cierra los ojos y oye cantar la luz: Β  Β  Β  El mediodΓ­a anida en tu tΓ­mpano Β  Β  Β  Cierra los ojos y Γ‘brelos: Β  Β  Β  No hay nadie ni siquiera tΓΊ mismo Β  Β  Β  Lo que no es piedra es luz Como las piedras del Principio Como el principio de la Piedra Como al Principio piedra contra piedra Los fastos de la noche: El poema todavΓ­a sin rostro El bosque todavΓ­a sin Γ‘rboles Los cantos todavΓ­a sin nombre Mas ya la luz irrumpe con pasos de leopardo Y la palabra se levanta ondula cae Y es una larga herida y un silencio sin mΓ‘cula Β  Β  La alegrΓ­a madura como un fruto Β  Β  El fruto madura hasta ser sol Β  Β  El sol madura hasta ser hombre Β  Β  El hombre madura hasta ser astro Β  Β  Nunca la luz se repartiΓ³ en tantas luces Β  Β  Los Γ‘rboles las calles las montaΓ±as Β  Β  Se despliegan en olas transparentes Β  Β  Una muchacha rΓ­e a la entrada del dΓ­a Β  Β  Es una pluma ardiendo el canto del canario Β  Β  La mΓΊsica muestra sus brazos desnudos Β  Β  Su espalda desnuda su pensamiento desnudo Β  Β  En el calor se afila el instante dichoso Β  Β  Agua tierra y sol son un solo cuerpo Β  Β  La hora y su campana se disuelven Β  Β  Las piedras los paisajes se evaporan Β  Β  Todos se han ido sin volver el rostro Β  Β  Los amigos las bellas a la orilla del vΓ©rtigo Β  Β  Zarpan las casas la iglesia los tranvΓ­as Β  Β  El mundo emprende el vuelo Β  Β  TambiΓ©n mi cuerpo se me escapa Β  Β  Y entre las claridades se me pierde Β  Β  El sol lo cubre todo lo ve todo Β  Β  Y en su mirada fija nos baΓ±amos Β  Β  Y en su pupila largamente nos quemamos Β  Β  Y en los abismos de su luz caemos Β  Β  MΓΊsica despeΓ±ada Β  Β  Y ardemos y no dejamos huella
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Piedra nativa
La luz devasta las alturas Β  Β  Β  Manadas de imperios en derrota Β  Β  Β  El ojo retrocede cercado de reflejos Β  Β  Β  PaΓ­ses vastos como el insomnio Β  Β  Β  Pedregales de hueso Β  Β  Β  OtoΓ±o sin confines Β  Β  Β  Alza la sed sus invisibles surtidores Β  Β  Β  Un ΓΊltimo pirΓΊ predica en el desierto Β  Β  Β  Cierra los ojos y oye cantar la luz: Β  Β  Β  El mediodΓ­a anida en tu tΓ­mpano Β  Β  Β  Cierra los ojos y Γ‘brelos: Β  Β  Β  No hay nadie ni siquiera tΓΊ mismo Β  Β  Β  Lo que no es piedra es luz Como las piedras del Principio Como el principio de la Piedra Como al Principio piedra contra piedra Los fastos de la noche: El poema todavΓ­a sin rostro El bosque todavΓ­a sin Γ‘rboles Los cantos todavΓ­a sin nombre Mas ya la luz irrumpe con pasos de leopardo Y la palabra se levanta ondula cae Y es una larga herida y un silencio sin mΓ‘cula Β  Β  La alegrΓ­a madura como un fruto Β  Β  El fruto madura hasta ser sol Β  Β  El sol madura hasta ser hombre Β  Β  El hombre madura hasta ser astro Β  Β  Nunca la luz se repartiΓ³ en tantas luces Β  Β  Los Γ‘rboles las calles las montaΓ±as Β  Β  Se despliegan en olas transparentes Β  Β  Una muchacha rΓ­e a la entrada del dΓ­a Β  Β  Es una pluma ardiendo el canto del canario Β  Β  La mΓΊsica muestra sus brazos desnudos Β  Β  Su espalda desnuda su pensamiento desnudo Β  Β  En el calor se afila el instante dichoso Β  Β  Agua tierra y sol son un solo cuerpo Β  Β  La hora y su campana se disuelven Β  Β  Las piedras los paisajes se evaporan Β  Β  Todos se han ido sin volver el rostro Β  Β  Los amigos las bellas a la orilla del vΓ©rtigo Β  Β  Zarpan las casas la iglesia los tranvΓ­as Β  Β  El mundo emprende el vuelo Β  Β  TambiΓ©n mi cuerpo se me escapa Β  Β  Y entre las claridades se me pierde Β  Β  El sol lo cubre todo lo ve todo Β  Β  Y en su mirada fija nos baΓ±amos Β  Β  Y en su pupila largamente nos quemamos Β  Β  Y en los abismos de su luz caemos Β  Β  MΓΊsica despeΓ±ada Β  Β  Y ardemos y no dejamos huella
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2015 – Iglesia ni Cristo ginbuksan Sa banwa sg Dumarao, Barangay San Juan Nakakita ako sg kontrobersyal nga SCAN… 2015 – Star Wars 7 ginsuguran Ipaguwa sa mga sinehan Plano tani namon lantawon ni Juan… Sa kaadlawan ni Juan, buta simbahan kg sinehan! -12/18/2015 (Dumarao) *Kaadlawan ni Juan
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Sep 27, 2019
Sep 27, 2019 at 9:00 PM UTC
Simbahan kg Sinehan
A medida que nos aproximamos las piedras se van dando mejor. Desnudo, anacorΓ©tico, las ventanas idΓ©nticas entre sΓ­, como la vida de sus monjes, el Escorial levanta sus muros de granito por los que no treparΓ‘n nunca los mandingas, pues ni aΓΊn dentro de novecientos aΓ±os. hallarΓ‘n una arruga donde hincar sus pezuΓ±as de azufre y pedernal. Paradas en lo alto de las chimeneas, las cigΓΌeΓ±as meditan la responsabilidad de ser la ΓΊnica ornamentaciΓ³n del monasterio, mientras el viento que reza en las rendijas ahuyenta las tentaciones que amenazan entrar por el tejado. Cencerro de las piedras que pastan en los alrededores, las campanas de la iglesia espantan a los Γ‘ngeles que viven en su torre y suelen tomarlos de improviso, haciΓ©ndoles perder alguna pluma sobre el adoquinado de los patios. Β‘Corredores donde el silencio tonifica la robustez de las columnas! Β‘Salas donde la austeridad es tan grande, que basta una sonrisa de mujer para que nos asedien los pecados de Bosch y sΓ³lo se desbanden en retirada al advertir que nuestro guΓ­a es nuestro propio arcΓ‘ngel, que se ha disfrazado de guardiΓ‘n! Los visitantes, la cabeza hundida entre los hombros (asΓ­ la Muerte no los podrΓ‘ agarrar como se agarra a un gato), descienden a las tumbas y al pudridero, y al salir, perciben el esqueleto de la gente con la misma facilidad con que antes les distinguΓ­an la nariz. Cuando una luna fantasmal nieva su luz en las techumbres, los ruidos de las inmediaciones adquieren psicologΓ­as criminales, y el silencio alcanza tal intensidad, que se camina como si se entrara en un concierto, y se contienen las ganas de toser por temor a que el eco repita nuestra tos hasta convencernos de que estamos tuberculosos. Β‘Horas en que los perros se enloquecen de soledad y en las que el miedo hace girar las cabezas de las lechuzas y de los hombres, quienes, al enfrentarnos, se persignan bajo el embozo por si nosotros fuΓ©ramos SatΓ‘n!
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Escorial
A medida que nos aproximamos las piedras se van dando mejor. Desnudo, anacorΓ©tico, las ventanas idΓ©nticas entre sΓ­, como la vida de sus monjes, el Escorial levanta sus muros de granito por los que no treparΓ‘n nunca los mandingas, pues ni aΓΊn dentro de novecientos aΓ±os. hallarΓ‘n una arruga donde hincar sus pezuΓ±as de azufre y pedernal. Paradas en lo alto de las chimeneas, las cigΓΌeΓ±as meditan la responsabilidad de ser la ΓΊnica ornamentaciΓ³n del monasterio, mientras el viento que reza en las rendijas ahuyenta las tentaciones que amenazan entrar por el tejado. Cencerro de las piedras que pastan en los alrededores, las campanas de la iglesia espantan a los Γ‘ngeles que viven en su torre y suelen tomarlos de improviso, haciΓ©ndoles perder alguna pluma sobre el adoquinado de los patios. Β‘Corredores donde el silencio tonifica la robustez de las columnas! Β‘Salas donde la austeridad es tan grande, que basta una sonrisa de mujer para que nos asedien los pecados de Bosch y sΓ³lo se desbanden en retirada al advertir que nuestro guΓ­a es nuestro propio arcΓ‘ngel, que se ha disfrazado de guardiΓ‘n! Los visitantes, la cabeza hundida entre los hombros (asΓ­ la Muerte no los podrΓ‘ agarrar como se agarra a un gato), descienden a las tumbas y al pudridero, y al salir, perciben el esqueleto de la gente con la misma facilidad con que antes les distinguΓ­an la nariz. Cuando una luna fantasmal nieva su luz en las techumbres, los ruidos de las inmediaciones adquieren psicologΓ­as criminales, y el silencio alcanza tal intensidad, que se camina como si se entrara en un concierto, y se contienen las ganas de toser por temor a que el eco repita nuestra tos hasta convencernos de que estamos tuberculosos. Β‘Horas en que los perros se enloquecen de soledad y en las que el miedo hace girar las cabezas de las lechuzas y de los hombres, quienes, al enfrentarnos, se persignan bajo el embozo por si nosotros fuΓ©ramos SatΓ‘n!
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AsΓ­ es mi vida, piedra, como tΓΊ. Como tΓΊ, piedra pequeΓ±a; como tΓΊ, piedra ligera; como tΓΊ, canto que ruedas por las calzadas y por las veredas; como tΓΊ, guijarro humilde de las carreteras; como tΓΊ, que en dΓ­as de tormenta te hundes en el cieno de la tierra y luego centelleas bajo los cascos y bajo las ruedas; como tΓΊ, que no has servido para ser ni piedra de una lonja, ni piedra de una audiencia, ni piedra de un palacio, ni piedra de una iglesia; como tΓΊ, piedra aventurera; como tΓΊ, que tal vez estΓ‘s hecha sΓ³lo para una honda, piedra pequeΓ±a y ligera...
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Como tΓΊ...
Los vagones resbalan sobre los trastes de la vΓ­a, para cantar en sus dos cuerdas la reciedumbre del paisaje. Campos de piedra, donde las vides sacan una mano amenazante de bajo tierra. Jamelgos que llevan una vida de asceta, con objeto de entrar en la plaza de toros. Chanchos enloquecidos de flacura que se creen una SalomΓ© porque tienen las nalgas muy rosadas. Sobre la cresta de los peΓ±ones, vestidas de primera comuniΓ³n, las casas de los aldeanos se arrodillan a los pies de la iglesia, se aprietan unas a otras, la levantan como si fuera una custodia, se anestesian de siesta y de repiqueteo de campana. A riesgo de que el viaje termine para siempre, la locomotora hace pasar las piedras a diez y seis kilΓ³metros y cuando ya no puede mΓ‘s, se detiene, jadeante. A veces "suele" acontecer que precisamente allΓ­ se encuentra una estaciΓ³n. Β‘Campanas! Β‘Silbidos! Β‘Gritos!; y el maquinista, que se despide siete veces del jefe de la estaciΓ³n; y el loro, que es el ΓΊnico pasajero que protesta por las catorce horas de retardo; y las chicas que vienen a ver pasar el tren porque es lo ΓΊnico que pasa. De repente, los vagones resbalan sobre los trastes de la vΓ­a, para cantar en sus dos cuerdas la reciedumbre del paisaje. Campos de piedra, de donde las vides sacan una mano amenazante de bajo tierra. Jamelgos que llevan una vida de asceta, con objeto de entrar en la plaza de toros. Chanchos enloquecidos de flacura que se creen una SalomΓ© porque tienen las nalgas muy rosadas. En los compartimentos de primera, las butacas nos atornillan sus elΓ‘sticos y nos descorchan un riΓ±Γ³n, en tanto que las araΓ±as realizan sus ejercicios de bombero alrededor de la lamparilla que se incendia en el techo. A riesgo de que el viaje termine para siempre, la locomotora hace pasar las piedras a diez y seis kilΓ³metros, y cuando ya no puede mΓ‘s, se detiene, jadeante. ΒΏLlegaremos al alba, o maΓ±ana al atardecer...? A travΓ©s de la borra de las ventanillas. el crepΓΊsculo espanta a los rebaΓ±os de sombras que salen de abajo de las rocas mientras nos vamos sepultando en una luz de catacumba. Se oye: el canto de las mujeres que mondan las legumbres del puchero de pasado maΓ±ana; el ronquido de los soldados que, sin saber por quΓ©, nos trae la seguridad de que se han sacado los botines; los nΓΊmeros del extracto de loterΓ­a, que todos los pasajeros aprenden de memoria. pues en los quioscos no han hallado ninguna otra cosa para leer. Β‘Si al menos pudiΓ©ramos arrimar un ojo a alguno de los agujeritos que hay en el cielo! Β‘Campanas! Β‘Silbidos! Β‘Gritos!; y el maquinista, que se despide siete veces del jefe de la estaciΓ³n; y el loro, que es el ΓΊnico pasajero que protesta por las veintisiete horas de retardo; y las chicas que vienen a ver pasar el tren porque es lo ΓΊnico que pasa. De repente, los vagones resbalan sobre los trastes de la vΓ­a, para cantar en sus dos cuerdas la reciedumbre del paisaje.
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El tren expreso
Los vagones resbalan sobre los trastes de la vΓ­a, para cantar en sus dos cuerdas la reciedumbre del paisaje. Campos de piedra, donde las vides sacan una mano amenazante de bajo tierra. Jamelgos que llevan una vida de asceta, con objeto de entrar en la plaza de toros. Chanchos enloquecidos de flacura que se creen una SalomΓ© porque tienen las nalgas muy rosadas. Sobre la cresta de los peΓ±ones, vestidas de primera comuniΓ³n, las casas de los aldeanos se arrodillan a los pies de la iglesia, se aprietan unas a otras, la levantan como si fuera una custodia, se anestesian de siesta y de repiqueteo de campana. A riesgo de que el viaje termine para siempre, la locomotora hace pasar las piedras a diez y seis kilΓ³metros y cuando ya no puede mΓ‘s, se detiene, jadeante. A veces "suele" acontecer que precisamente allΓ­ se encuentra una estaciΓ³n. Β‘Campanas! Β‘Silbidos! Β‘Gritos!; y el maquinista, que se despide siete veces del jefe de la estaciΓ³n; y el loro, que es el ΓΊnico pasajero que protesta por las catorce horas de retardo; y las chicas que vienen a ver pasar el tren porque es lo ΓΊnico que pasa. De repente, los vagones resbalan sobre los trastes de la vΓ­a, para cantar en sus dos cuerdas la reciedumbre del paisaje. Campos de piedra, de donde las vides sacan una mano amenazante de bajo tierra. Jamelgos que llevan una vida de asceta, con objeto de entrar en la plaza de toros. Chanchos enloquecidos de flacura que se creen una SalomΓ© porque tienen las nalgas muy rosadas. En los compartimentos de primera, las butacas nos atornillan sus elΓ‘sticos y nos descorchan un riΓ±Γ³n, en tanto que las araΓ±as realizan sus ejercicios de bombero alrededor de la lamparilla que se incendia en el techo. A riesgo de que el viaje termine para siempre, la locomotora hace pasar las piedras a diez y seis kilΓ³metros, y cuando ya no puede mΓ‘s, se detiene, jadeante. ΒΏLlegaremos al alba, o maΓ±ana al atardecer...? A travΓ©s de la borra de las ventanillas. el crepΓΊsculo espanta a los rebaΓ±os de sombras que salen de abajo de las rocas mientras nos vamos sepultando en una luz de catacumba. Se oye: el canto de las mujeres que mondan las legumbres del puchero de pasado maΓ±ana; el ronquido de los soldados que, sin saber por quΓ©, nos trae la seguridad de que se han sacado los botines; los nΓΊmeros del extracto de loterΓ­a, que todos los pasajeros aprenden de memoria. pues en los quioscos no han hallado ninguna otra cosa para leer. Β‘Si al menos pudiΓ©ramos arrimar un ojo a alguno de los agujeritos que hay en el cielo! Β‘Campanas! Β‘Silbidos! Β‘Gritos!; y el maquinista, que se despide siete veces del jefe de la estaciΓ³n; y el loro, que es el ΓΊnico pasajero que protesta por las veintisiete horas de retardo; y las chicas que vienen a ver pasar el tren porque es lo ΓΊnico que pasa. De repente, los vagones resbalan sobre los trastes de la vΓ­a, para cantar en sus dos cuerdas la reciedumbre del paisaje.
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En ParΓ­s estΓ‘ doΓ±a Alda, Β  la esposa de don RoldΓ‘n, trescientas damas con ella Β  para la acompaΓ±ar: todas visten un vestido, Β  todas calzan un calzar, todas comen a una mesa, Β  todas comΓ­an de un pan, si no era doΓ±a Alda, Β  que era la mayoral; las ciento hilaban oro, Β  las ciento tejen cendal, las ciento taΓ±en instrumentos Β  para doΓ±a Alda holgar. Al son de los instrumentos Β  doΓ±a Alda dormido se ha; ensoΓ±ado habΓ­a un sueΓ±o, Β  un sueΓ±o de gran pesar. RecordΓ³ despavorida Β  y con un pavor muy grande; los gritos daba tan grandes Β  que se oΓ­an en la ciudad. AllΓ­ hablaron sus doncellas, Β  bien oirΓ©is lo que dirΓ‘n: -ΒΏQuΓ© es aquesto, mi seΓ±ora? Β  ΒΏquiΓ©n es el que os hizo mal? -Un sueΓ±o soΓ±Γ©, doncellas, Β  que me ha dado gran pesar: que me veΓ­a en un monte Β  en un desierto lugar: do so los montes muy altos Β  un azor vide volar, tras dΓ©l viene una aguililla Β  que lo ahΓ­nca muy mal. El azor, con grande cuita, Β  metiΓ³se so mi brial, el aguililla, con gran ira, Β  de allΓ­ lo iba a sacar; con las uΓ±as lo despluma, Β  con el pico lo deshace. AllΓ­ hablΓ³ su camarera, Β  bien oirΓ©is lo que dirΓ‘: -Aquese sueΓ±o, seΓ±ora, Β  bien os lo entiendo soltar: el azor es vuestro esposo Β  que viene de allΓ©n la mar, el Γ‘guila sedes vos, Β  con la cual ha de casar, y aquel monte es la iglesia, Β  donde os han de velar. -Si asΓ­ es, mi camarera, Β  bien te lo entiendo pagar. Otro dΓ­a de maΓ±ana Β  cartas de fuera le traen: tintas venΓ­an por dentro, Β  de fuera escritas con sangre, que su RoldΓ‘n era muerto Β  en caza de Roncesvalles.
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Romance de doΓ±a alda
En ParΓ­s estΓ‘ doΓ±a Alda, Β  la esposa de don RoldΓ‘n, trescientas damas con ella Β  para la acompaΓ±ar: todas visten un vestido, Β  todas calzan un calzar, todas comen a una mesa, Β  todas comΓ­an de un pan, si no era doΓ±a Alda, Β  que era la mayoral; las ciento hilaban oro, Β  las ciento tejen cendal, las ciento taΓ±en instrumentos Β  para doΓ±a Alda holgar. Al son de los instrumentos Β  doΓ±a Alda dormido se ha; ensoΓ±ado habΓ­a un sueΓ±o, Β  un sueΓ±o de gran pesar. RecordΓ³ despavorida Β  y con un pavor muy grande; los gritos daba tan grandes Β  que se oΓ­an en la ciudad. AllΓ­ hablaron sus doncellas, Β  bien oirΓ©is lo que dirΓ‘n: -ΒΏQuΓ© es aquesto, mi seΓ±ora? Β  ΒΏquiΓ©n es el que os hizo mal? -Un sueΓ±o soΓ±Γ©, doncellas, Β  que me ha dado gran pesar: que me veΓ­a en un monte Β  en un desierto lugar: do so los montes muy altos Β  un azor vide volar, tras dΓ©l viene una aguililla Β  que lo ahΓ­nca muy mal. El azor, con grande cuita, Β  metiΓ³se so mi brial, el aguililla, con gran ira, Β  de allΓ­ lo iba a sacar; con las uΓ±as lo despluma, Β  con el pico lo deshace. AllΓ­ hablΓ³ su camarera, Β  bien oirΓ©is lo que dirΓ‘: -Aquese sueΓ±o, seΓ±ora, Β  bien os lo entiendo soltar: el azor es vuestro esposo Β  que viene de allΓ©n la mar, el Γ‘guila sedes vos, Β  con la cual ha de casar, y aquel monte es la iglesia, Β  donde os han de velar. -Si asΓ­ es, mi camarera, Β  bien te lo entiendo pagar. Otro dΓ­a de maΓ±ana Β  cartas de fuera le traen: tintas venΓ­an por dentro, Β  de fuera escritas con sangre, que su RoldΓ‘n era muerto Β  en caza de Roncesvalles.
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Una prostituta llego a la iglesia Buscando una salida una respuesta Ignorantemente ella llego Con una minifalda y una camisa descotada Cuando iba entrando por la puerta de esa iglesia Un miembro la detuvo y le dijo TΓΊ no puedes entrar en este lugar vestida asΓ­ Y ella se fue con lΓ‘grimas sin JesΓΊs Donde esta el amor Donde esta el amor El amor que declaramos conocer Donde esta el amor Donde esta el amor El amor solo se encuentra en el Doctrinas religiones y tantas cosas por ahΓ­ Que lo ΓΊnico que nos hacen es volver atrΓ‘s EnvolviΓ©ndonos en un mundo y un grito de ansiedad Solo pensamos en nuestra situaciΓ³n Y dime donde esta aquella mujer que un dΓ­a vino Buscando un poquito de amor Tal ves ella esta muerta en un callejΓ³n Solo por que tΓΊ no tuviste corazΓ³n Donde esta el amor Donde esta el amor El amor que declaramos conocer Donde esta el amor Donde esta el amor El amor solo se encuentra en el Me han burlado Me han criticado Es que ellos piensan que me conocen Pero no importa no me ha parado Es que mi Cristo a quien yo sirvo Siempre esta a mi lado Mi seΓ±or LlΓ©vanos a las personas que estΓ‘n llenas de dolor Mi seΓ±or Enséñanos a amar con tu amor Enséñanos a amar Aquel que se encuentra en la cΓ‘rcel Aquel que pelea su barrio Aquella que vende su cuerpo en la esquina del pueblo a diario Aquel que ha violado y robado Aquel que sabe lo que es haber matado Aquel niΓ±o desnudo Aquel huΓ©rfano que nunca conociΓ³ a su mama Regresar a la inocencia es lo que yo quiero dios Regresar aquellas manos que me hicieron Regresar a la inocencia es lo que yo quiero dios Regresar aquellas manos que me hicieron Regresar a la inocencia es lo que yo quiero dios Regresar aquellas manos que me hicieron………
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Nov 7, 2015
Nov 7, 2015 at 1:18 AM UTC
DC Reto - Una Prostituta
Una prostituta llego a la iglesia Buscando una salida una respuesta Ignorantemente ella llego Con una minifalda y una camisa descotada Cuando iba entrando por la puerta de esa iglesia Un miembro la detuvo y le dijo TΓΊ no puedes entrar en este lugar vestida asΓ­ Y ella se fue con lΓ‘grimas sin JesΓΊs Donde esta el amor Donde esta el amor El amor que declaramos conocer Donde esta el amor Donde esta el amor El amor solo se encuentra en el Doctrinas religiones y tantas cosas por ahΓ­ Que lo ΓΊnico que nos hacen es volver atrΓ‘s EnvolviΓ©ndonos en un mundo y un grito de ansiedad Solo pensamos en nuestra situaciΓ³n Y dime donde esta aquella mujer que un dΓ­a vino Buscando un poquito de amor Tal ves ella esta muerta en un callejΓ³n Solo por que tΓΊ no tuviste corazΓ³n Donde esta el amor Donde esta el amor El amor que declaramos conocer Donde esta el amor Donde esta el amor El amor solo se encuentra en el Me han burlado Me han criticado Es que ellos piensan que me conocen Pero no importa no me ha parado Es que mi Cristo a quien yo sirvo Siempre esta a mi lado Mi seΓ±or LlΓ©vanos a las personas que estΓ‘n llenas de dolor Mi seΓ±or Enséñanos a amar con tu amor Enséñanos a amar Aquel que se encuentra en la cΓ‘rcel Aquel que pelea su barrio Aquella que vende su cuerpo en la esquina del pueblo a diario Aquel que ha violado y robado Aquel que sabe lo que es haber matado Aquel niΓ±o desnudo Aquel huΓ©rfano que nunca conociΓ³ a su mama Regresar a la inocencia es lo que yo quiero dios Regresar aquellas manos que me hicieron Regresar a la inocencia es lo que yo quiero dios Regresar aquellas manos que me hicieron Regresar a la inocencia es lo que yo quiero dios Regresar aquellas manos que me hicieron………
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Todo ha florecido en estos campos, manzanos, azules titubeantes, malezas amarillas, y entre la hierba verde viven las amapolas. El cielo inextinguible, el aire nuevo de cada dΓ­a, el tΓ‘cito fulgor, regalo de una extensa primavera. SΓ³lo no hay primavera en mi recinto. Enfermedades, besos desquiciados, como yedras de iglesia se pegaron a las ventanas negras de mi vida y el sΓ³lo amor no basta, ni el salvaje y extenso aroma de la primavera. Y para ti quΓ© son en este ahora la luz desenfrenada, el desarrollo floral de la evidencia, el canto verde de las verdes hojas, la presencia del cielo con su copa de frescura? Primavera exterior, no me atormentes, desatando en mis brazos vino y nieve, corola y ramo roto de pesares, dame por hoy el sueΓ±o de las hojas nocturnas, la noche en que se encuentran los muertos, los metales, las raΓ­ces, y tantas primaveras extinguidas que despiertan en cada primavera.
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Con quevedo, en primavera
Yo, seΓ±or, soy acontista. Mi profesiΓ³n es hacer disparos al aire. TodavΓ­a no habrΓ© descendido la primera nube. 1 Mas, la delicia estΓ‘ en curvar el arco y en suponer la flecha donde la clava el ojo. 2 Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. Β‘Azores y neblΓ­es, gerifaltes, tagres, sacres, alcotanes, halcones acudid a la voz del acontista! y enderecemos nuestras garras a la conquista de las nubes, volubles como los corazones... 3 y -cual los corazones- inmutables. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. TambiΓ©n he sido juglar en los mesones. Revendedor de bulas. TaΓ±edor de laΓΊd. Y tragador de fuego y engullidor de sables. Y bufΓ³n en las ferias. Damas de los castillos a catar diΓ©ronme frutos de acendrada virtud: Β‘noches de bendiciΓ³n! Otras noches fueron bien miserables. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. TambiΓ©n me he entretenido en cosas serias: conocΓ­ al asno de BuridΓ‘n 4 y al propio BuridΓ‘n, que estuvo en la Tour de Nesle 5 (alguna vez fui con Γ©l, pero me devolvΓ­ de la poterna) y vi ahorcar en Montfaucon 6 a Messire Enguerrand de Marigny. Poco en letras leΓ­... 7 mas sΓ­ he bebido buenos vinos, paladeado vianda tierna, y comido del mejor pan. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. Mi profesiΓ³n es hacer disparos al aire. ΒΏTodavΓ­a no habrΓ© descendido la primera nube? 8 TambiΓ©n soy jugador de dados y tengo mis ribetes de asesino. Presumo haber -en lontana ocasiΓ³n- hurtΓ‘dome los vasos sagrados 9 de ya no sΓ© quΓ© iglesia, abadΓ­a o convento. (Creo que han sido mΓ­as varias esposas de JesΓΊs, cuyos votos de castidad y su amor al esposo divino fueron plumas al viento y golondrinas migratorias que soltaron su vuelo desde la Cruz...) Β‘Azores y neblΓ­es, gerifaltes, tagres, sacres, alfaneques, halcones: acudid a la voz del acontista! Y enderecemos nuestras garras y nuestros picos a la conquista de las nubes volubles como los corazones... 10 y -cual los corazones- siempre iguales. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. TambiΓ©n resulto un poco lento y un mucho largo en las mis relaciones... Juzgo que hay caso de fantasΓ­a en mi rapsodia: pero ni yo soy TΓ‘cito, ni aquestos son Anales... Β‘Tampoco he de cantar la palinodia ni de irrumpir en monΓ³tonos trenos! Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. Nada mΓ‘s. Nada menos. Y tengo sueΓ±o y tengo sed, seΓ±or. Β‘Salud! Β‘Y abur! seΓ±or, Β‘abur! Y hasta otra vista.
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Relato de guillaume de lorges
Yo, seΓ±or, soy acontista. Mi profesiΓ³n es hacer disparos al aire. TodavΓ­a no habrΓ© descendido la primera nube. 1 Mas, la delicia estΓ‘ en curvar el arco y en suponer la flecha donde la clava el ojo. 2 Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. Β‘Azores y neblΓ­es, gerifaltes, tagres, sacres, alcotanes, halcones acudid a la voz del acontista! y enderecemos nuestras garras a la conquista de las nubes, volubles como los corazones... 3 y -cual los corazones- inmutables. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. TambiΓ©n he sido juglar en los mesones. Revendedor de bulas. TaΓ±edor de laΓΊd. Y tragador de fuego y engullidor de sables. Y bufΓ³n en las ferias. Damas de los castillos a catar diΓ©ronme frutos de acendrada virtud: Β‘noches de bendiciΓ³n! Otras noches fueron bien miserables. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. TambiΓ©n me he entretenido en cosas serias: conocΓ­ al asno de BuridΓ‘n 4 y al propio BuridΓ‘n, que estuvo en la Tour de Nesle 5 (alguna vez fui con Γ©l, pero me devolvΓ­ de la poterna) y vi ahorcar en Montfaucon 6 a Messire Enguerrand de Marigny. Poco en letras leΓ­... 7 mas sΓ­ he bebido buenos vinos, paladeado vianda tierna, y comido del mejor pan. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. Mi profesiΓ³n es hacer disparos al aire. ΒΏTodavΓ­a no habrΓ© descendido la primera nube? 8 TambiΓ©n soy jugador de dados y tengo mis ribetes de asesino. Presumo haber -en lontana ocasiΓ³n- hurtΓ‘dome los vasos sagrados 9 de ya no sΓ© quΓ© iglesia, abadΓ­a o convento. (Creo que han sido mΓ­as varias esposas de JesΓΊs, cuyos votos de castidad y su amor al esposo divino fueron plumas al viento y golondrinas migratorias que soltaron su vuelo desde la Cruz...) Β‘Azores y neblΓ­es, gerifaltes, tagres, sacres, alfaneques, halcones: acudid a la voz del acontista! Y enderecemos nuestras garras y nuestros picos a la conquista de las nubes volubles como los corazones... 10 y -cual los corazones- siempre iguales. Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. TambiΓ©n resulto un poco lento y un mucho largo en las mis relaciones... Juzgo que hay caso de fantasΓ­a en mi rapsodia: pero ni yo soy TΓ‘cito, ni aquestos son Anales... Β‘Tampoco he de cantar la palinodia ni de irrumpir en monΓ³tonos trenos! Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Β  Yo, seΓ±or, soy acontista. Nada mΓ‘s. Nada menos. Y tengo sueΓ±o y tengo sed, seΓ±or. Β‘Salud! Β‘Y abur! seΓ±or, Β‘abur! Y hasta otra vista.
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He bebido del chorro cΓ‘ndido de la fuente. Traigo los labios frescos y la cara mojada. Mi boca hoy tiene toda la estupenda dulzura de una rosa jugosa, nueva y reciΓ©n cortada. El cielo ostenta una limpidez de diamante. Estoy ebria de tarde, de viento y primavera. ΒΏNo sientes en mis trenzas olor a trigo ondeante? ΒΏNo me hallas hoy flexible como una enredadera? ElΓ‘stica de gozo como un gamo he corrido por todos los ceΓ±udos senderos de la sierra. Y el galgo cazador que es mi guΓ­a, rendido, se ha acostado a mis pies, largo a largo, en la tierra. Β‘Ah, quΓ© inmensa fatiga me derriba en la grama y abate en tus rodillas mi cabeza morena, mientras que de una iglesia campesina y lejana nos llega un lento y grave llamado de novena!
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La tarde
Aquí, en este momento, termina todo, se detiene la vida. Han florecido luces amarillas a nuestros pies, no sé si estrellas. Silenciosa cae la lluvia sobre el amor, sobre el remordimiento. Nos besamos en carne viva. Bendita lluvia en la noche, jadeando en la hierba, Trayendo en hilos aroma de las nubes, poniendo en nuestra carne su dentadura fresca. Y el mar sonaba. Tal vez fuera su espectro. Porque eran miles de kilómetros los que nos separaban de las olas. Y lo peor: miles de días pasados y futuros nos separaban. Descendían en la sombra las escaleras. Dios sabe a dónde conducían. Qué mÑs daba. «Ya es hoy -dije yo-, ya es hora de volver a tu casa». Ya es hora. En el portal, «Espera», me dijo. Regresó vestida de otro modo, con flores en el pelo. Nos esperaban en la iglesia. «Mujer te doy». Bajamos las gradas del altar. El armonio sonaba. Y un violín que rizaba su melodía empalagosa. Y el mar estaba allí. Olvidado y apetecido tanto tiempo. Allí estaba. Azul y prodigioso. Y ella y yo solos, con harapos de sol y de humedad. «¿Dónde, dónde la noche aquella, la de ayer...?», preguntÑbamos al subir a la casa, abrir la puerta, oír al niño que salía con su poco de sombra con estrellas, su agua de luces navegantes, sus cerezas de fuego. Y yo puse mis labios una vez mÑs en la mejilla de ella. Besé hondamente. Los gusanos labraron tercamente su piel. Al retirarme lo vi. Qué importa, corazón. La música encendida, y nosotros girando. No: inmóviles. El cÑliz de una flor gris que giraba en torno vertiginosa. Dónde la noche, dónde el mar azul, las hojas de la lluvia. Los niños -quiénes son, que hace un instante no estaban-, los niños aplaudieron, muertos de risa: «Qué ridículos, papÑ, mamÑ». «A la cama», les dije con ira y pena. Silencio. Yo besé la frente de ella, los ojos con arrugas cada vez mÑs profundas. Dónde la noche aquella, en qué lugar del universo se halla. «Has sido duro con los niños». Abrí la habitación de los pequeños, volaron pétalos de lluvia. Ellos estaban afeitÑndose. Ellas salían con sus trajes de novia. Se marcharon los niños -¿por qué digo los niños?- con su amor, con sus noches de estrellas, con sus mares azules, con sus remordimientos, con sus cuchillos de buscar pureza bajo la carne. Dónde, dónde la noche aquella, dónde el mar... Qué ridículo todo: este momento detenido, este disco que gira y gira en el silencio, consumida su música...
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Acelerando
Aquí, en este momento, termina todo, se detiene la vida. Han florecido luces amarillas a nuestros pies, no sé si estrellas. Silenciosa cae la lluvia sobre el amor, sobre el remordimiento. Nos besamos en carne viva. Bendita lluvia en la noche, jadeando en la hierba, Trayendo en hilos aroma de las nubes, poniendo en nuestra carne su dentadura fresca. Y el mar sonaba. Tal vez fuera su espectro. Porque eran miles de kilómetros los que nos separaban de las olas. Y lo peor: miles de días pasados y futuros nos separaban. Descendían en la sombra las escaleras. Dios sabe a dónde conducían. Qué mÑs daba. «Ya es hoy -dije yo-, ya es hora de volver a tu casa». Ya es hora. En el portal, «Espera», me dijo. Regresó vestida de otro modo, con flores en el pelo. Nos esperaban en la iglesia. «Mujer te doy». Bajamos las gradas del altar. El armonio sonaba. Y un violín que rizaba su melodía empalagosa. Y el mar estaba allí. Olvidado y apetecido tanto tiempo. Allí estaba. Azul y prodigioso. Y ella y yo solos, con harapos de sol y de humedad. «¿Dónde, dónde la noche aquella, la de ayer...?», preguntÑbamos al subir a la casa, abrir la puerta, oír al niño que salía con su poco de sombra con estrellas, su agua de luces navegantes, sus cerezas de fuego. Y yo puse mis labios una vez mÑs en la mejilla de ella. Besé hondamente. Los gusanos labraron tercamente su piel. Al retirarme lo vi. Qué importa, corazón. La música encendida, y nosotros girando. No: inmóviles. El cÑliz de una flor gris que giraba en torno vertiginosa. Dónde la noche, dónde el mar azul, las hojas de la lluvia. Los niños -quiénes son, que hace un instante no estaban-, los niños aplaudieron, muertos de risa: «Qué ridículos, papÑ, mamÑ». «A la cama», les dije con ira y pena. Silencio. Yo besé la frente de ella, los ojos con arrugas cada vez mÑs profundas. Dónde la noche aquella, en qué lugar del universo se halla. «Has sido duro con los niños». Abrí la habitación de los pequeños, volaron pétalos de lluvia. Ellos estaban afeitÑndose. Ellas salían con sus trajes de novia. Se marcharon los niños -¿por qué digo los niños?- con su amor, con sus noches de estrellas, con sus mares azules, con sus remordimientos, con sus cuchillos de buscar pureza bajo la carne. Dónde, dónde la noche aquella, dónde el mar... Qué ridículo todo: este momento detenido, este disco que gira y gira en el silencio, consumida su música...
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Desde este mismo instante seremos dos extraΓ±os por estos pocos dΓ­as, quiΓ©n sabe cuΓ‘ntos aΓ±os... Yo serΓ© en tu recuerdo como un libro prohibido, uno de esos que nadie confiesa haber leΓ­do. Y asΓ­ maΓ±ana, al vernos en la calle, al ocaso, tu bajarΓ‘s los ojos y apretarΓ‘s el paso, y yo, discretamente, me cambiarΓ© de acera, o encenderΓ© un cigarro, como si no te viera... Seremos dos extraΓ±os desde este mismo instante y pasarΓ‘n los meses, y tendrΓ‘s otro amante: Y como eres bonita, sentimental y fiel, quizΓ‘s, andando el tiempo, te casarΓ‘s con Γ©l. Y ya, mΓ‘s que un esposo serΓ‘ como un amigo, aunque nunca le cuentes que has soΓ±ado conmigo, y aunque, tras tu sonrisa, de mujer satisfecha, se te empaΓ±en los ojos, al llegar una fecha. Acaso, cuando llueva, recordarΓ‘s un dΓ­a en que estuvimos juntos y en que tambiΓ©n llovΓ­a. Y quizΓ‘s no te pongas nunca mΓ‘s aquel traje de terciopelo verde, con adornos de encaje. O harΓ‘s un gesto mΓ­o, tal vez sin darte cuenta, cuando dobles la almohada con mano soΓ±olienta. Y domingo a domingo, cuando vayas a Misa, de tu casa a la Iglesia, perderΓ‘s tu sonrisa. ΒΏQuΓ© mΓ‘s puedo decirte? SerΓ‘s la esposa honesta que abanica al marido cuando ronca su siesta: Tras fregar los platos y de tender las camas, te pasarΓ‘s las noches sacando crucigramas... Y asΓ­, aΓ±os y aΓ±os, hasta que, finalmente, te morirΓ‘s un dΓ­a, como toda la gente. Y voces que aΓΊn no existen sollozarΓ‘n tu nombre, y cerrarΓ‘n tus ojos los hijos de otro hombre. Y no me importa quiΓ©n pase despuΓ©s por un sendero, si me queda el orgullo de haber sido el primero. Y el vaso que embriagara mi ilusiΓ³n y mi hastΓ­o, aunque estΓ© en otra mano seguirΓ‘ siendo mΓ­o. Por eso puedes irte mi pobre soΓ±adora, pues si el reloj se para no detiene la hora, y tΓΊ serΓ‘s la misma de las noches aquellas aunque cierres los ojos por no ver las estrellas.
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ElegΓ­a lamentable
Desde este mismo instante seremos dos extraΓ±os por estos pocos dΓ­as, quiΓ©n sabe cuΓ‘ntos aΓ±os... Yo serΓ© en tu recuerdo como un libro prohibido, uno de esos que nadie confiesa haber leΓ­do. Y asΓ­ maΓ±ana, al vernos en la calle, al ocaso, tu bajarΓ‘s los ojos y apretarΓ‘s el paso, y yo, discretamente, me cambiarΓ© de acera, o encenderΓ© un cigarro, como si no te viera... Seremos dos extraΓ±os desde este mismo instante y pasarΓ‘n los meses, y tendrΓ‘s otro amante: Y como eres bonita, sentimental y fiel, quizΓ‘s, andando el tiempo, te casarΓ‘s con Γ©l. Y ya, mΓ‘s que un esposo serΓ‘ como un amigo, aunque nunca le cuentes que has soΓ±ado conmigo, y aunque, tras tu sonrisa, de mujer satisfecha, se te empaΓ±en los ojos, al llegar una fecha. Acaso, cuando llueva, recordarΓ‘s un dΓ­a en que estuvimos juntos y en que tambiΓ©n llovΓ­a. Y quizΓ‘s no te pongas nunca mΓ‘s aquel traje de terciopelo verde, con adornos de encaje. O harΓ‘s un gesto mΓ­o, tal vez sin darte cuenta, cuando dobles la almohada con mano soΓ±olienta. Y domingo a domingo, cuando vayas a Misa, de tu casa a la Iglesia, perderΓ‘s tu sonrisa. ΒΏQuΓ© mΓ‘s puedo decirte? SerΓ‘s la esposa honesta que abanica al marido cuando ronca su siesta: Tras fregar los platos y de tender las camas, te pasarΓ‘s las noches sacando crucigramas... Y asΓ­, aΓ±os y aΓ±os, hasta que, finalmente, te morirΓ‘s un dΓ­a, como toda la gente. Y voces que aΓΊn no existen sollozarΓ‘n tu nombre, y cerrarΓ‘n tus ojos los hijos de otro hombre. Y no me importa quiΓ©n pase despuΓ©s por un sendero, si me queda el orgullo de haber sido el primero. Y el vaso que embriagara mi ilusiΓ³n y mi hastΓ­o, aunque estΓ© en otra mano seguirΓ‘ siendo mΓ­o. Por eso puedes irte mi pobre soΓ±adora, pues si el reloj se para no detiene la hora, y tΓΊ serΓ‘s la misma de las noches aquellas aunque cierres los ojos por no ver las estrellas.
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Desnuda eres tan simple como una de tus manos, lisa, terrestre, mΓ­nima, redonda, transparente, tienes lΓ­neas de luna, caminos de manzana, desnuda eres delgada como el trigo desnudo. Desnuda eres azul como la noche en Cuba, tienes enredaderas y estrellas en el pelo, desnuda eres enorme y amarilla como el verano en una iglesia de oro. Desnuda eres pequeΓ±a como una de tus uΓ±as, curva, sutil, rosada hasta que nace el dΓ­a y te metes en el subterrΓ‘neo del mundo como en un largo tΓΊnel de trajes y trabajos: tu claridad se apaga, se viste, se deshoja y otra vez vuelve a ser una mano desnuda.
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Soneto xxvii
MaΓ±anita de San Juan, Β  maΓ±anita de primor, cuando damas y galanes Β  van a oΓ­r misa mayor. AllΓ‘ va la mi seΓ±ora, Β  entre todas la mejor; viste saya sobre saya, Β  mantellΓ­n de tornasol, camisa con oro y perlas Β  bordada en el cabezΓ³n. En la su boca muy linda Β  lleva un poco de dulzor; en la su cara tan blanca, Β  un poquito de arrebol, y en los sus ojuelos garzos Β  lleva un poco de alcohol; asΓ­ entraba por la iglesia Β  relumbrando como el sol. Las damas mueren de envidia, Β  y los galanes de amor. El que cantaba en el coro, Β  en el credo se perdiΓ³; el abad que dice misa, Β  ha trocado la liciΓ³n; monacillos que le ayudan, Β  no aciertan responder, non, por decir amΓ©n, amΓ©n, Β  decΓ­an amor, amor.
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La misa del amor
Yuan – gobierno – kaadlawan ni Juan Brad Pitt kg Spielberg – mass media – kaadlawan ni Juan Epimetheus – siyensiya – kaadlawan ni Juan Islamic Development Bank – ekonomiya – kaadlawan ni Juan Mga modela – ikaayong lawas – kaadlawan ni Juan Star Wars 7 – literatura – kaadlawan ni Juan Iglesia sa San Juan – relihiyon – kaadlawan ni Juan -12/18/2015 (Dumarao) *Kaadlawan ni Juan
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Sep 27, 2019
Sep 27, 2019 at 9:05 PM UTC
Pito ka Aspeto
quiero traerte a mi paΓ­s, y enseΓ±arte lo que me hace feliz. quiero llevarte a los bares bonitos donde cantan y arman jaleo. quiero pasar por debajo de las pΓ©rgolas preciosas del parque con mis manos colgando de donde dobla tu brazo. quiero llevarte a la iglesiaΒ Β  y bailar y alabar contigo. pero lamento que no serΓ‘ posible. es solamente un sueΓ±o que veo yo solita. porque tΓΊ estΓ‘s pensando en tu propio paraΓ­so y no creo que me incluya. si no, me lo dirΓ­as. duele querer algo con alguien que no desea lo mismo. dueleΒ Β  ver alguien tan cerca de ti que piensa que estΓ‘sΒ Β  demasiado lejos de Γ©l. no sΓ© cΓ³mo la gente lo hacenΒ Β  cuando se enamoranΒ Β  en otro paΓ­s. la mente se queja,Β Β  el corazΓ³n lamenta,Β Β  y el alma llora del dolor.
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Jul 10, 2019
Jul 10, 2019 at 6:45 PM UTC
paraΓ­sos opuestos.
Hoy soΓ±Γ© contigo y contigo vivΓ­a un dΓ­a tan tranquilo que me asustΓ© por pensar que habΓ­a muerto, las campanas de la iglesia sonaban y pensΓ© que alguien habΓ­a muerto, mi madre me gritaba desde abajo y pensΓ© lo peor, espero no volverte a soΓ±ar contigo porque asΓ­ como el pasado ya muriΓ³, no quiero seguir pensando que alguien estΓ‘ muerto, ni siquiera tΓΊ.
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Oct 17, 2013
Oct 17, 2013 at 4:42 PM UTC
TΓΊ, No.
Hay algo en esta iglesia, El aire parece ser mΓ‘s fino, Lo ΓΊnico que puedo hacer es alabarte: Ay, SeΓ±or, ΒΏquΓ© mΓ‘s hago para ti? Dime... ΒΏCΓ³mo elevar tu precioso nombre? Porque anhelo adorarte Creo que fingΓ­ una vez demasiados Ahora el EspΓ­ritu Santo me ha tocado. Hay algo en esta iglesia, El aire parece ser mΓ‘s fino, Lo ΓΊnico que puedo hacer es alabarte; Ay, SeΓ±or, ΒΏquΓ© mΓ‘s hago para ti? Dime... Hay algo en este lugar, Tan fuerte que no lo puedo luchar, SΓ³lo quiero verte ahora mismo, Mi corazΓ³n baila porque estoy listo. Este sentimiento que tengo es tan libre, Ya no soy imprudente como un belitre; Las Palmas de mis manos hierven con fe, Fe en ti, SeΓ±or y todo por lo que moriste. Hay algo en esta iglesia, El aire parece ser mΓ‘s fino, Lo ΓΊnico que puedo hacer es alabarte; Ay, SeΓ±or, ΒΏquΓ© mΓ‘s hago para ti? Dime... Lo ΓΊnico que puedo hacer es alabarte; Puedo alabarte, Puedo alabarte, ΒΏQuΓ© mΓ‘s hago para ti? Hay algo en esta iglesia, Hay algo en esta iglesia...
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Dec 14, 2017
Dec 14, 2017 at 9:45 PM UTC
Algo En Esta Iglesia