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बाज़ार में
ऋण उपलब्ध करवाने की
बढ़ रही है होड़ ,
बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान
ऋण आसानी से
देने के  
कर रहे हैं प्रयास।
लोग खुशी खुशी
ऋण लेकर
अनावश्यक पदार्थों का
कर रहे हैं संचय।
ऋण लेना
सरल है ,
पर उसे
समय रहते
चुकाना भी होता है ,
समय पर ऋण चुकाया नहीं,
तो आदमी को
प्रताड़ना और अपमान के लिए
स्वयं को कर लेना चाहिए तैयार।
ऋण को न मोड़ने की
सूरत में  
ब्याज पर ब्याज लगता जाता है ,
यह न केवल
मन पर बोझ की वज़ह बनता है ,
बल्कि यह आदमी को
भीतर तक
कमजोर करता है,
आदमी हर पल आशंकित रहता है।
उसके भीतर
अपमानित होने का डर भी
मतवातर भरता जाता है।
उसका सुकून बेचैनी में बदल जाता है।

यह तो ऋणग्रस्त आदमी की
मनोदशा का सच है ,
परन्तु ऋणग्रस्त देश का
हाल तो और भी अधिक बुरा होता है,
जब आमजन का जीना दुश्वार हो जाता है,
तब देश में असंतोष,कलह और क्लेश, अराजकता का जन्म होता है,
जो धीरे-धीरे देश दुनिया को मरणासन्न अवस्था में ले जाता है,
और एक दिन देश विखंडन के कगार पर पहुंच जाता है ,
देश का काम काज
ऋण प्रदायक देश और संस्थान के इशारों पर होने लगता है।
यह सब एक नई गुलामी की व्यवस्था की वज़ह बनता जा रहा है ,
ऋण का दुष्चक्र विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को
विकास के नाम पर
विनाश की ओर ले जाता है।
इस बाबत बहुत देर बाद
समझ में आता है ,
जब सब कुछ छीन लिया जाता है,
तब ... क्या आदमी और क्या देश...
लूटे पीटे नज़र आते हैं ,
वे केवल नैराश्य फैलाने के लिए
पछतावे के साये में लिपटे नज़र आते हैं।
वे एक दिन आतंकी
और आतंकवाद फैलाने की नर्सरी में बदलते जाते हैं।
बिना उद्देश्य और जरूरत के
ऋण के जाल में फंसने से बचा जाए।
क्यों न
चिंता और तनाव रहित जीवन को जीया जाए !
सुख समृद्धि और शांति की खातिर चिंतन मनन किया जाए !
सार्थक जीवन धारा को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ा जाए !!
ऋण मुक्ति की बाबत समय रहते सोच विचार किया जाए ।
३१/०३/२०२५.
I'm thankful to
The hard times
The bad days
The rejections
The failures
The hurdles
The mistakes

I'm thankful to
The hope
The patience
The prayers
The life

Beyond all truth
I'm thankful to you
 6d Khoisan
Akriti
Yesterday, I was nothing .
I was happy.
You pulled me down .
Treated me like trash.
It ignited a fire in me.

Now, I shine bright ,
just like the Sun .
Don't come closer
You will burn ,
In my light.
 6d Khoisan
Akriti
Once, I despised you ,
Yet, you turned out to be my truest friend .
Come, touch my lips ,
Slip down my throat,
Reach for my soul
Take it out ,
Carry it to the unknown,
Far away from this miserable world.
Bury it there for all eternity,
So it may never rise again.
A thought from Frost,
"Fire or Ice* in the end?"
Fire is revenge,
Ice is cruel deep and dark,
both will come,
Like icy comets,
That heat up when breaking apart,
Not from the heavens,
But from the human heart.
*Robert Frost's poem
Ah, only to be an artic squirrel,
To sleep till the cold sword past,
Dreaming of green--
Below that cold artic slash.

Only rousing self when the sword hits my sleep,
It pierces my burrow,
Slaying the colors and the maiden,
With its merciless degree.

Ah, to awake to darkness, but with light coming from the door,
The cold sword is sheathed,
And my dreams are restored.
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