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Akta Agarwal Apr 2021
बिखरे बिखरे से कुछ अल्फाज हैं
टूटे टूटे से कुछ ख़्वाब हैं
अंतरमन अब बेचैन सा हैं
हुए ख़्वाब आहत से हैं
दिल में लगा घाव सा हैं
बिखरे बिखरे से कुछ अल्फाज हैं
टूटे टूटे से कुछ ख़्वाब हैं
संघर्ष करना बना मुस्किल सा हैं
आसान राह की तलाश भी ना खतम होता सा हैं
डरा डरा सा अब मन रहता हैं
होटों की हसीं भी अब कही छुपा सा हैं
कहीं गम के सागर है
तो कही सुख के लहर हैं
किसी के सपने हुए राख से हैं
तो किसी ने नई सपनों की छवि बनाई हैं
सुन के बात यह नई दिल में आई कोई आश सी हैं
बिखरे अल्फाजो के सागर कोई
नए सपने बुनने के कोई ख़्वाब से हैं
Khwab bikhre s
Akta Agarwal Apr 2021
Bikhre alfaz
Tute khwab -

Bikhre bikhre s Kuch alfaz h
Tute tute s khwab h
Antarmn ab bechen sa h
Hue khwab aahat s h
Dil m lga ghav sa h
Bikhre bikhre s Kuch alfaz h
Tute tute s Kuch khwab h
Sangharsh krna bna muskil sa h
Aasan raah ki talash v na ktm hota sa h
dra dra sa ab mn rhta h
Hoton ki hasi v ab khi chupa sa h
Khi gm K sagar h to khi shukh K leher aae h
Kisi K sapne hue raakh K s
To kisi ne nae sapno ki chavi bnae h
Sunn K baat yh nae dil m
aae Kuch aash sa h
Bikhre alfazo ko sajakr koe
Naye sapne bunne ka khwab sa h.
Bikhre s alfaz h tute s khwab h pr ek asha ki kiran ne di nae si aash h
Dheeraj Gupta Feb 2019
वही दूसरी दुनिया का दीदार बाकी है,
आँखें मूंद कर अभी एक सैर बाकी है।

अभी माँ की गोद में सर रख थपकी मिलना बाकी है,
चाँद तारो की बारात में जाना बाकी है।

पलकें भारी कर मूंदना बाकी है,
नज़रों में एक ख्वाब आना बाकी है।

ख़्वाब जो सोने न दे,
ख़्वाब जो कही खोने न दे।

भगाता है तू मुझे अपने पीछे,
रुक तुझे जीकर अभी पुचकारना बाकी है।

बुलबुला नही है तू जो हल्की हवा से फट जाएगा,
अभी तेरा आंधियो की सैर करना बाकी है ।

सोता था कभी तुझे देखने के लिए,
अब तुझे देखकर नींद लेना  बाकी है।
Dreams worth chasing .

— The End —