Submit your work, meet writers and drop the ads. Become a member
Jul 2017
ज़िन्दगी का सफ़र बढ़ता चला गया,
हम रोते रह गए बीती बातो को सोच कर,
और एक वक्त है जो बिन परवाह गुज़रता चला गया,

वो हमे ढूंढते रह गए प्यार के गलियो में,
और मेरा प्यार उनके याद में खोता चला गया,

न मंज़िल का पता था न रहने का कोई ठिकाना,
पर ये कम्बख़त दिल है जो उनके प्यार में भटकता चला गया,

मुस्कुराता रहा दिल उनकी मुस्कान देखकर,
और आँखे मेरी उनकी ख्वाब में बहता चला गया,

हमने सोचा था की बड़ा हसीन होंगे हर पल मेरे उनके साथ,
और एक उनका "साथ" है जो किसी और का होता चला गया,

आज तो गज़ब हो गया हम ढूंढते रह गए प्यार के पन्नों को,
और मेरी कलम है जो उन पन्नों में लिपटकर रोता चला गया,

ज़िन्दगी बहुत आसान है यारो अगर आप चाहो तब,
आपने लड़ना छोड़ा,और ये अपनी कस्मकश में हमे डुबोता चला गया,
हमे डुबोता चला गया......|




Zindagi ka safar badhta chalo gya,
Hum rote rah gye biti bato ko soch kar,
Aur ek waqt hai Jo bin parwaah guzarta chala gya,

Wo Hume dhundhte rah gye pyar Ke galiyo me,
Aur mera pyaar unke yaad me khota chala gya,

Na manzil ka pata tha na rahne ka koi thikana,
Par ye kambakhat dil hai Jo unke pyaar me bhatakta chala gya,

Muskurata raha dil unki muskan dekh kar,
Aur aankhen meri unke khwab me bahta chala gya,

Humne socha tha Ki bada haseen honge har pal mera unke sath,
Aur ek unka "Sath" hai Jo kisi aur ka hota chala gya,

Aaj to gazab ** gya hum dhundhte rah gye pyaar ke panno ko,
Aur meri kalam hai Jo un panno me lipatkar rota chala gya,

Zindagi bahut aasan hai yaaro agar aap chaho tab,
Aapne ladna chhoda, aur ye apni kasmkash me Hume dubota chala gya,
Hume dubota chala gya.....

मनीष कुमार श्रीवास्तव
Translation is not available
Shrivastva MK
Written by
Shrivastva MK  21/M/INDIA
(21/M/INDIA)   
  4.7k
 
Please log in to view and add comments on poems