"satru" poems
की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद रखना।
की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
अगर कह दूं की मुस्कुराहट तुम्हारी,
खुशी बन गई है मेरी,
अगर मैं ये कह ना पाऊं,
तो किसी और को कहने भी ना देना।
अगर में भूल भी जाऊं,
तो तुम याद रखना।
की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
अगर सवाल करूं मैं कोई,
तो जवाब भले तुम ना देना,
पर कभी कोई जवाब मांगे तुमसे,
तो खुद से ये सवाल जरूर करना।
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद जरूर रखना।
की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
अगर चूमना चाहूं तुम्हें,
तो भले ही मुंह फेर लेना,
पर साथ ही मेरा हाथ पकड़ के,
मुझे प्यार से समझना,
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद रखना।
की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
अगर आंख से निकले आंसू,
तो आसुंवो को बेहने देना,
पर कभी रोने को जो कंधा ना मिले,
तो अपने कंधे पर सर रखकर हमें रोने देना,
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद जरूर रखना।
की कभी होश खो भी जाऊं,
तो होश में हमें ना लाना,
अगर थाम ना पाओ ज़िन्दगी भर,
तो पल भर के लिए हमें ना संभालना।
पर कभी तुम भी चाहो हमें,
तो अपनी चाहत हमसे ना छिपाना,
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद जरूर रखना।
की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद रखना।
#satru_the_enemy
Sep 7, 2019
Sep 7, 2019 at 8:35 AM UTC
की दिन गुजरता नहीं और उम्र कटती चली जा रही,
तेरी तस्वीर इन आँखों मे बस्ती चली जा रही,
की ज़रा सी भी भनक नही तुमको हमारे इश्क़ की,
और ये दुनिया हमारे मोहब्बत की चर्चा करती जा रही।
हम मदहोश हो जाते है तुम्हारी आँखों मे देखते ही,
और तुम हो कि इन आँखों से हमे जाम पिलाती जा रही।
हम खड़े रहते हैं तुम्हारे इंतज़ार में उस राह में जिससे तुम गुजरती हो,
और तुम हो कि हर दिन अपनी राह बदलती जा रही।
हम समझदार समझ के इशारे करते हैं तुम्हें,
और तुम हो कि नासमझ बनती जा रही।
की दिन गुजरता नहीं और उम्र कटती चली जा रही,
तेरी तस्वीर इन आँखों मे बस्ती चली जा रही,
हम इंतज़ार ही करते रहे तुमसे एक मुलाकात की,
और तेरे घर के आगे आशिक़ों की कतार बढ़ती चली जा रही।
हम तड़प उठते हैं तुम्हें किसी और के साथ देख कर,
और तुम हो कि नए दोस्त बनाती जा रही।
हम तो लिखते हैं हाल-ए-अपना हर दफा,
और तुम हो कि मेरे जज्बातों को शायरी समझती जा रही।
हम खत्म तो कर दें इस मोहब्बत के सिलसिले को,
पर तुम हो कि हर बार हमें अपना बनाती जा रही।
#satru_the_enemy
Oct 18, 2019
Oct 18, 2019 at 2:54 AM UTC
मन ये मेरा चंचल कहीं रुकता नहीं,
एक जगह पे कभी टिकता नहीं।
कभी परिंदो की तरह उड़ता है,
तो कभी मछली बनके तैरता है,
कभी पहाड़ों में जाके घूमता है,
तो कभी किसी किताब की कहानियों में जीता है,
मन ये मेरा चंचल कही बैठता नहीं।
मन ये मेरा चंचल ककहिं रुकता नही,
कभी यादों के तैखने से निकालकर,
अतीत के लम्हों को जीता हैं।
तो कभी खुद की ही एक कहानी बनाकर,
उस किरदार में नई जिंदगी जीता है।
कभी उड़ जाता है भविष्य में,
और ना जाने क्या क्या सपने बुनता है।
मन ये मेरा चंचल कहीं ठहरता नहीं।
मन ये मेरा चंचल कभी संभालता नहीं,
कभी किसी की यादों में डुबकियां लगाता है,
तो कभी उन्हें ही याद करने से डरता है,
कभी किसी के साथ होने की ख्वाईश करता है,
तो कभी टूटे सपनों को फिर से पिरोता है,
कभी यहाँ कभी वहाँ बस भटकता रहता है,
मन ये मेरा चंचल कभी बस यूँही टहलता है।
मन ये मेरा चंचल अब ठहर से गया है,
तुम्हारे चेहरे पे आके ये रुक सा गया है,
बस तुम्हारी आँखों को तकता रहता है,
और तुमसे अगली मुलाकात को तरसता है।
शुरुवात भी तुम्ही से करता है और अंत तुम्ही पे करता है,
मन ये मेरा चंचल अब बस तुम्हीं को सोचता है
बस तुम्हीं को सोचता है।
#Satru - the enemy
Oct 5, 2019
Oct 5, 2019 at 1:44 PM UTC
if you could see through my eyes
You would see the most beautiful sight
You are very special, you may wonder why
Might because of your bright shining eyes
When I look at them, it feels like a dream
And your smile together with your eyes makes a good team
Whenever satru sees you, satru blushes
It's not intentionally it's just his refluxes
What else can I say, I not know
For i am the one who don't know how to show
And there I rest my case for some time
Will tell you more, some another time
Wait till I find something new
Cause words that can describe you are very few
Mar 24, 2018
Mar 24, 2018 at 4:17 AM UTC