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Word farer Aug 2020
Tiring nights
Long days
All are incomplete
Without a cup of coffee
A small dusty diary
And those heart coming poetries
Still in world of poetry..shayri..and many more
YASH VARDHAN Apr 2020
आज भी हुबहू याद हैं वो पल,
जब पहली बार एक दूसरे से वादा किया था,कि मिलेंगे ज़रूर कल;
कितने हसीन थे वो दिन,
आज वो ही यादें बन के सिमट गए,तुम्हारे बिन।
नजाने कितने किये थे वादे,सब निभा भी नहीं पाये,
अब शायद चलेंगे वो भी हमारे साथ कफ़न में,
उनको भी धकेल दिया उस हसीन यादों के सफ़र में ।
जब-जब भी रहें साथ,रंगीन बनाया हर एक लम्हा
उन लम्हों को देख बेरंग हो जाया करता था ये सारा सम्हा ।
अब वजूद नहीं रहा उन लम्हों का,
वो लम्हें भी हिस्सा हैं उन्हीं यादों के समूह का।
नहीं सताते अब वो पल जो साथ बिताए थे,
बल्कि गम हैं उन वादों का जो अधूरे छोर आये थे,
क्योंकि वो सारे वादे भी उन्हीं हसीन यादों नें ही करवायें थे।
-Yash Vardhan
(गुमनाम गालिब)
Jayantee Khare Mar 2020

कोरोना के बहाने से वो  
क्वारंटाइन हो बैठे
नक़ाबपोश हो निकले
हम दीदार से हाथ धो बैठे
Under the pretext of Corona,
self-quarantined,
my beloved,
turned out wearing mask,
I lost the opportunity to have a glance...


Just fir fun... Prayers for those suffering....
जो हमे नामंजूर है वो कसूर बार बार करते हो,
प्यार हमे है तुमसे, और तुम गेरों से आंखे चार करते हो
भूल जाते हैं हम भी गीले शिकवे सारे,
जब तुम मुस्कुराते हो, और कहते हो के हमे प्यार करते हो
की दिन गुजरता नहीं और उम्र कटती चली जा रही,
तेरी तस्वीर इन आँखों मे बस्ती चली जा रही,
की ज़रा सी भी भनक नही तुमको हमारे इश्क़ की,
और ये दुनिया हमारे मोहब्बत की चर्चा करती जा रही।

हम मदहोश हो जाते है तुम्हारी आँखों मे देखते ही,
और तुम हो कि इन आँखों से हमे जाम पिलाती जा रही।

हम खड़े रहते हैं तुम्हारे इंतज़ार में उस राह में जिससे तुम गुजरती हो,
और तुम हो कि हर दिन अपनी राह बदलती जा रही।

हम समझदार समझ के इशारे करते हैं तुम्हें,
और तुम हो कि नासमझ बनती जा रही।

की दिन गुजरता नहीं और उम्र कटती चली जा रही,
तेरी तस्वीर इन आँखों मे बस्ती चली जा रही,
हम इंतज़ार ही करते रहे तुमसे एक मुलाकात की,
और तेरे घर के आगे आशिक़ों की कतार बढ़ती चली जा रही।

हम तड़प उठते हैं तुम्हें किसी और के साथ देख कर,
और तुम हो कि नए दोस्त बनाती जा रही।

हम तो लिखते हैं हाल-ए-अपना हर दफा,
और तुम हो कि मेरे जज्बातों को शायरी समझती जा रही।

हम खत्म तो कर दें इस मोहब्बत के सिलसिले को,
पर तुम हो कि हर बार हमें अपना बनाती जा रही।

#satrutheenemy
There was so many fish in the pond
But, he was searching for a mermaid.

He was searching for a mermaid but the one that caught his attention was just an another fish in the pond.....
की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद रखना।

की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
अगर कह दूं की मुस्कुराहट तुम्हारी,
खुशी बन गई है मेरी,

अगर मैं ये कह ना पाऊं,
तो किसी और को कहने भी ना देना।
अगर में भूल भी जाऊं,
तो तुम याद रखना।

की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
अगर सवाल करूं मैं कोई,
तो जवाब भले तुम ना देना,

पर कभी कोई जवाब मांगे तुमसे,
तो खुद से ये सवाल जरूर करना।
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद जरूर रखना।

की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
अगर चूमना चाहूं तुम्हें,
तो भले ही मुंह फेर लेना,

पर साथ ही मेरा हाथ पकड़ के,
मुझे प्यार से समझना,
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद रखना।

की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
अगर आंख से निकले आंसू,
तो आसुंवो को बेहने देना,

पर कभी रोने को जो कंधा ना मिले,
तो अपने कंधे पर सर रखकर हमें रोने देना,
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद जरूर रखना।

की कभी होश खो भी जाऊं,
तो होश में हमें ना लाना,
अगर थाम ना पाओ ज़िन्दगी भर,
तो पल भर के लिए हमें ना संभालना।

पर कभी तुम भी चाहो हमें,
तो अपनी चाहत हमसे ना छिपाना,
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद जरूर रखना।

की कभी होश खो भी जाऊं,
तो तुम संभाल लेना,
मैं अगर भूल भी जाऊं,
तो तुम याद रखना।

*#satrutheenemy
Jayantee Khare Feb 2018
दिल मिल जाएँ लफ़्ज़ों में
गुफ़्तगू हो नज़्मों में
हो के शायरी के हिस्से
आओ लिख दें दिल के किस्से

In words, the hearts conjoin
Communicate in rhyme
Be the part of my poetry
Let's together write the story
Poor translation regretted.. lol
Teri zulfon k chav mei
chamakta yeh chand sa chehra,

Aab isse jyada mai tujse aur kuch na keh raha.

Sunane ko bahut kuch hai
Par sun ne ko koi nahi.

Mana galti thi meri
Kya mai Maafi k layak hu nahi?

— The End —