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Apr 1
वो थी सुबह, सुर्ख-ऐ-लाल,
उनका यूँ मिलना भी, था कमाल.
बातें तो चल रही अब भी, आसमानी रंगों सी फिलहाल,
मुकम्मल हुआ भी तो क्या? सिर्फ इश्क़ के 'बाल की खाल.
Nitin Pandey
Written by
Nitin Pandey  22/M/In observation
(22/M/In observation)   
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