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यों तो चराग-ए-जहां
कई हैं यहां
रोशन दिल को करता
चराग-ए-मकां।।
जाट का‌ नाम जूनून है
जूनून जीना ही कानून ‌है।
Some pictures take to the flashback
Time is more fragrant than flowers.
अजीब इत्तेफाक है
बांटने से‌ खुशियां बढ़ती हैं
दर्द कम होता‌ है
दिल इसलिए ही
एक हमदर्द चाहता है।।
होली आती रंग लाती
और मस्ती भरी मसखरी
दबी इच्छाएं प्रकट होतीं
बन व्यंग्य की फूलझड़ी
पीने के शौकीन झूमते
इस मद्धम सर्दी रसभरी
फूलों पर गुनगुनाते भौंरे
लगते शबाब पर डालते डोरे
ऐसे मनभावन मौसम में
साठ वाले भी बनें छिछोरे।।
चलो चुनावों की आज
बज गयी रणभेरी है
ना तेरी ना मेरी चलेगी
अब जनता की बारी है
पापड़ जैसे हल्की-हल्की
सिकती जनता हर दिन है
चुनावों में वह बनके लावा
हर पत्थर पिघला सकती है
भावनाओं के दोहन के
नीचे हर बार दब जाती हैं
देखो आजादी‌ के पिचहतरे
अब क्या गुल खिलाती है।।
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