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बच्चे होते मन के सच्चे
अच्छा लगता वही‌ करते।।

दिल में उनके प्रभु बसते
मिट्टी में खेल कर वो खुश होते
जीवों से वो दोस्ती करते
सबको अपने जैसा समझते।।

खेल खेल में वो सीखते
चीखते भी वो अच्छे लगते
ऊर्जा का वो भण्डार लगते
उनकी‌ संगत में कोई‌ उदास ना रहते।।

उनके मन को पहले समझो
किसी से उनकी तुलना ना हो
अपेक्षाऐं उन पर‌ अपनी जाहिर ना हो
तभी उनका सच्चा विकास हो।।

हर बच्चे में कृष्ण है
हर बच्ची में ‌राधा
हम देंगे वृन्दावन
जीवन‌ में ना‌ आयेगी बाधा।।
चंदन‌ हो तो माथे लगाऊं
फूल हो तो जेब सजाऊं
तेरी यादों का बेसकीमती हार
गले‌ लगाऊं तो रूके आवाज
हृदय सजाऊं, नैना छोड़े लाज।।
अट्ठावन कल पूर्ण किये
धरा का धरते ध्यान
जब भी बाजी दांव लगी
धरा से ही मिले तीर कमान।।
काव्य की विधा वही
जो दिल को छू जाये
मीरा और सूर का गाया
भक्ति रस कहाये
कबीर के बोल
सूक्तियां कहलाये
चन्द्र ने लिखी
पृथ्वीराज रासो
तो बरदाई कहाये
जावेद साहब लिखें
तो गीत मन में छाये
मैं लिख दूं कुछ तो
समझो बात
आज की गाये।।
कला छूती हृदय को
विज्ञान मस्तिष्क के नाम
जब हो हृदय बैठना
कला साधे काम।।

सिद्ध गायकी करते आये
कर अग्नि प्रणाम
धर्म का ध्वज लिए
घूमे चौखण्ड धाम।।

जीवत समाधियां लेकर
रखा धर्म का मान
फिर भी छुपे रहे
जैसे पहेली गुमनाम।।

कोमल सिद्ध ने जब जीता
मरवण का खिताब
राजस्थानी संस्कृति
का दुनिया में बढ़ा रूवाब
ना धर्म ध्वज ,ना चौखण्ड फेरी
फिर भी दुनिया पहुंची आवाज।।
सर्दी में अंगुलियां लाल हो
खुजली फिर आने लगे
सरसों तेल की मालिश
बार बार मांगने लगे
समझो जवानी है जाने लगी।।

लोग कभी कभी पूछते हैं
स्वास्थ्य ठीक है ना
बच्चे ध्यान रखते हैं
गर्म पानी से नहाये हो ना
समझो जवानी है जाने लगी।।

बच्चे पेंशन कितनी बनेगी
ये जब पूछने लगें
तुम्हारे स्वास्थ्य के प्रति
तुमसे ज्यादा सचेत होना दिखाने लगें
समझो अब नम्बर हैं घिसने लगे।।

कोई बुढ़िया दु:खड़ा
तुम्हें अपना समझ के सुनाने लगे
उसकी बातों की गहराई को
जब समझने तुम हो लगे
समझो संजीदा तुम होने लगे।।

मन‌ तुम्हारा यह सोचने लगे
मेरे पास आनंद का समय कम है
मस्ती करने की इच्छायें
हिलोरें जब मारने लगें
समझो ये इच्छा कम, कुंठाओं का प्रलाप ज्यादा
कदम सोच- समझ कर उठाना
असल में तुम हो सठियाने लगे।।
एक लेब , एक पाम
तेरी शान में दो मोती
वफ़ा की मिशाल ये
ऊर्जा तू इनसे पाती
कितना सुन्दर दृश्य होगा
जब जब तू इनसे बतियाती
श्रद्धा तेरी इनमें है
तू इनकी श्रद्धा कहलाती
चमक तेरी आंखों की
तेरी हर बात कह जाती
दुनिया चाहे तेरी छोटी है
तुलसी तेरे आंगन बसती
तेरे ‌शहर की हवा पवित्र
जो तुझको छूकर है आती
सुन्दर सा तेरा जीवन‌ है
ज्ञान‌दीपक बच्चों का कहलाती।।
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