
आँखें सच भी दिखाती हैं, झूठ भी छुपाती हैं,
कभी खुली किताब, कभी बंद दरवाज़ा बन जाती हैं।
किसी में जज़्बातों का सैलाब उमड़ता है,
किसी में वीरानी का सन्नाटा तैरता है।
ये कभी अपनापन देती हैं, कभी अजनबी बना देती हैं,
कभी महफ़ूज़ रखती हैं, कभी डर से दहला देती हैं।
इश्क़ का इकरार इन्हीं में झलकता है,
नफ़रत की चिंगारी इन्हीं में भड़कता है।
कभी ख़ुशी का उजाला बनकर चमकती हैं,
कभी ग़म का समंदर बनकर बरसती हैं।
कभी पनाह देती हैं, कभी फ़ना कर देती हैं,
ये वो आइना हैं जो रूह की तहरीर छुपा रखती हैं।
Feb 6, 2025
Feb 6, 2025 at 1:31 AM UTC
काश वो रात मेरे हाथों से फिसली न होती,
काश ये दूरी मेरे दिल को पिघल न देती।
काश वो पल वहीं थम जाता, वहीं रह जाता,
काश हर दिन मेरा चाँद ज़मीन तक आता।
Jan 27, 2025
Jan 27, 2025 at 12:40 AM UTC
क्यों पड़ा प्यार में जहाँ उसको मेरा फ़िक्र न हो,
कोई वक़्त ही नहीं जब मेरे मन में उसके ज़िक्र न हो।
चाहा था दिल से पर उसकी नज़र न मिला,
इस बंजारे को उसके दिल में घर न मिला।
दिल लगाया जिसे, उसने कभी अपनाया ही नहीं,
मेरा हर सपना था वो पर मैं उसका ख़्वाब में ही नहीं।
Jan 23, 2025
Jan 23, 2025 at 12:17 AM UTC
इक ख़्वाब था जो हक़ीक़त से परे,
इक कश्ती, इक लड़की और इक दरिया पानी से भरे।
लामहदूद पानीयों की वुसअत में,
हम तैरते रहे, ख़्वाब की क़ुर्बत में।
आफ़ाक़ पे था सूरज, सुनहरा और चमकदार,
उसकी ख़ूबसूरती की तरह, इक अनोखा सा दीदार।
बादलों के बीच, इक हल्का सा झलक,
रंगों की दुनिया, दिल पे डालती महक।
ना कोई किनारा, ना कोई थकन का एहसास,
बस सुकून का दरिया, और ख़्वाब का लिबास।
चाहत का वो पल, रूह को जला दे गया,
और सुबह का ख़्वाब, दिल को रौशनी दे गया।
Jan 7, 2025
Jan 7, 2025 at 11:09 PM UTC
पता नहीं कि ये दिलकशी कब हो गया,
पता नहीं कि मेरा अक़्ल कहाँ गुम हो गया।
मुझे दिखा दे रहा है पर अंधा हो गया,
मुझे सुना दे रहा है पर बहरा हो गया।
मेरे ख़्वाबों में तू सजा गया,
मेरे ख़यालों में तू बसा गया।
धीरे-धीरे बेवकूफ़ हो गया,
शायद मुझे इश्क़ हो गया।
Jan 5, 2025
Jan 5, 2025 at 11:27 PM UTC
आँखें खोलूं तो जो रोशनी देखूं वो है तू,
आँखें बंद करूं तो जो ख़्वाब देखूं वो है तू।
खामोशी में जो आवाज़ सुनूं वो है तू,
जब क़लम उठाता हूं तब लिखने का ख़याल है तू।
जिनके लिए जान दे सकूं वो है तू,
जिनके लिए जान ले सकूं वो है तू।
ज़िंदगी भर का मोहब्बत है तू,
मौत तक मेरा ईमान है तू।
Dec 30, 2024
Dec 30, 2024 at 12:19 AM UTC
क्यूं उसकी अल्फाज़ पढ़कर मुस्कुरा रहा था मैं,
क्यूं उसकी आवाज़ सुनकर पिघल रहा था मैं।
क्यूं उसकी आँखें देखकर खो गया था मैं,
क्यूं उसकी हंसी देखकर खुश हो गया था मैं।
उसकी मौजूदगी में क़ामिल हो रहा था मैं,
शायद यही हैं वो मोहब्बत जो ढूंढ रहा था मैं।
Dec 26, 2024
Dec 26, 2024 at 12:39 PM UTC
मज़हब सभी प्यार का सबक़ पढ़ाते हैं,
पर प्यार को किसी मज़हब की हद नहीं।
दिल की ज़ुबां को कौन क़ैद कर सके,
इश्क़ के रास्तों में सरहद नहीं।
Dec 25, 2024
Dec 25, 2024 at 11:01 AM UTC
ज़िंदगी था इक सहरा जैसा,
और हम उसपे घूमते हुए आवारा।
तलाश था इस प्यासे को पानी का,
अचानक था आमद उस जलपरी का।
रास्ते पर था बहुत सारे तालाब और झीलें,
पर मेरा मन उसपे ही अटका हुआ था।
आखिर जब पहुंचे उसकी क़रीब हम,
निकली थी वो सिर्फ़ एक वहम।
प्यास तो अब भी था,
और खोज मेरा अधूरा।
चलता रहा मैं इस बेकार सफर पे,
फिर अता किया ख़ुदा ने उस नखलिस्तान को।
तब समझ में आया कि ये था इश्क़, ये थी मोहब्बत,
आखिर जो मिला मुझे मेरे हयात की राहत।
Dec 10, 2024
Dec 10, 2024 at 2:26 PM UTC
नफ़रत है खुद से इस प्यार में क़ैद होने के लिए,
इस आशिक़ी की पागलपन में खुद को खोने के लिए।
पता है कि मंज़िल तक पहुंच नहीं पाऊंगा,
फिर भी इस सफ़र में तुम्हारे साथ ही जाऊंगा।
Dec 6, 2024
Dec 6, 2024 at 10:10 AM UTC