काश वो रात मेरे हाथों से फिसली न होती,
काश ये दूरी मेरे दिल को पिघल न देती।
काश वो पल वहीं थम जाता, वहीं रह जाता,
काश हर दिन मेरा चाँद ज़मीन तक आता।
Jan 27, 2025
Jan 27, 2025 at 12:40 AM UTC
काश वो रात मेरे हाथों से फिसली न होती,
काश ये दूरी मेरे दिल को पिघल न देती।
काश वो पल वहीं थम जाता, वहीं रह जाता,
काश हर दिन मेरा चाँद ज़मीन तक आता।
