पता नहीं कि ये दिलकशी कब हो गया,
पता नहीं कि मेरा अक़्ल कहाँ गुम हो गया।
मुझे दिखा दे रहा है पर अंधा हो गया,
मुझे सुना दे रहा है पर बहरा हो गया।
मेरे ख़्वाबों में तू सजा गया,
मेरे ख़यालों में तू बसा गया।
धीरे-धीरे बेवकूफ़ हो गया,
शायद मुझे इश्क़ हो गया।
Jan 5, 2025
Jan 5, 2025 at 11:27 PM UTC
पता नहीं कि ये दिलकशी कब हो गया,
पता नहीं कि मेरा अक़्ल कहाँ गुम हो गया।
मुझे दिखा दे रहा है पर अंधा हो गया,
मुझे सुना दे रहा है पर बहरा हो गया।
मेरे ख़्वाबों में तू सजा गया,
मेरे ख़यालों में तू बसा गया।
धीरे-धीरे बेवकूफ़ हो गया,
शायद मुझे इश्क़ हो गया।
