क्यूं उसकी अल्फाज़ पढ़कर मुस्कुरा रहा था मैं,
क्यूं उसकी आवाज़ सुनकर पिघल रहा था मैं।
क्यूं उसकी आँखें देखकर खो गया था मैं,
क्यूं उसकी हंसी देखकर खुश हो गया था मैं।
उसकी मौजूदगी में क़ामिल हो रहा था मैं,
शायद यही हैं वो मोहब्बत जो ढूंढ रहा था मैं।
Dec 26, 2024
Dec 26, 2024 at 12:39 PM UTC
क्यूं उसकी अल्फाज़ पढ़कर मुस्कुरा रहा था मैं,
क्यूं उसकी आवाज़ सुनकर पिघल रहा था मैं।
क्यूं उसकी आँखें देखकर खो गया था मैं,
क्यूं उसकी हंसी देखकर खुश हो गया था मैं।
उसकी मौजूदगी में क़ामिल हो रहा था मैं,
शायद यही हैं वो मोहब्बत जो ढूंढ रहा था मैं।
