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Rashmi Dec 2019
इतना सब होने के बावजूद भी...
कैसे हीमत करती हो किसी को अपना मानने की
किसी को अच्छा समझने की...
किसी पर भरोसा करने की
इन्सानियत का सरे आम खून होने पर...
आखिर कैसे....
कैसे खुद को समझाती हो..की दुनिया अच्छी है
यहां के लोग अच्छे है...
वापस कैसे दूसरो से प्यार कर पाती हो...
उन्हें प्यार दे पाती हो
एक बार तुम सोचो तो घीन तुम्हे भी आयी थी न..
इस दुनिया के लोगो से...इनके मन मै पल रहे सडयंतरो से....फिर कैसे...
आखिर कैसे तुम....
प्यार करने की उन्हें छूने तक की हिम्मत रखती हो..
माना कि तुम एक मा हो....
अपने बच्चे को बिना छुए...बिना पुचकारे रहना भी मुश्किल है...
पर तुम एक औरत भी तो हो
उसका क्या...आखिर कैसे....
माना कि एक पत्नी हो....
तुम्हारे पति से तुम्हे मोहब्बत हो सकती है....
पर क्या तुम्हे उसे देखकर डर नहीं लगता...
उसे देखकर तुम्हारा दिल नहीं दहेलता...
क्या ये याद नहीं आता कि वो भी एक मर्द है....
आखिर कर तुम एक औरत हो....
कैसे इतना सब्र,इतना इंतज़ार,इतना भरोसा लाती हो..
कैसे तुम अपने आप को संभालती हो....
आखिर कैसे....
माना कि एक बेटी हो तुम...
अपने अब्बू से लगाव है तुम्हे...
जान छिड़कती हो उनपे
पर क्या ...तुम्हे अनपर इतना भरोसा करना सही है!
जिस तरह औरतों को नोचा, चिथोरा जा रहा है...
आखिर कैसे तुम....
कैसे तुम किसी आदमी पर इतना भरोसा रखती हो...
भरोसे का जहा रोज़ खून हो रहा है...
वहां आखिर कैसे तुम इतना भरोसा दिखाती हो....
कैसे इतना प्यार बरसाती हो...
कुछ भी कहो.....
पर आखिर तुम भी एक औरत हो...
इतना भरोसा ओर प्यार कहा से लाती हो....
आखिर कैसे इस दुनिया मै रोज़ उठकर
भरोसा ओर प्यार डालने की हिम्मत लाती हो.....
औरत क्या तुम सच मै इतनी बलशाली हो!।
अपने आप को हथियार बनाओ।
Rashmi Nov 2019
कुछ परेशान सी हूं....
बताना चाहती हूं ये अपने करीबी लोगों को
अपने आप से परेशान हूं .....
जहन मै बस ये ख्याल आता है
आखिर क्यों हूं
क्या कर रही हूं यहां
क्या सिर्फ वायु बर्बाद कर रही हूं
या दूसरो पे बोझ बनी हूं
पूछना चाहती हूं सब से
क्या बोझ लगती हूं आपको
न जाने कहां खो सी गई हूं
कभी कभी लगता है
गलत जगह पर आकर फस गई हूं
मन करता है मां को बिठाऊं
ओर पुछु ... क्यों हूं मै
जब किसी लायक नहीं तो क्यों
भगवान जी को आप नहीं कहती कि उठा ले इसे
भगवान ही ही सच बात दे शायद
क्या हूं ओर क्यों खो गई हूं
न जाने क्या चलता है दिमाग मै
क्यों इतना सोचने के बाद भी
एक फैसले के लिए सबकी राए लेनी पड़ती है
खुद का क्या कुछ नहीं है मेरा
खुद की कोई पसंद या अष्टित्व नहीं है क्या
खुद क्या हूं....
सच मै मां बहुत खोई सी हूं मै
लगता है बस मर रही हूं
डर लगता है अपने आप से
दुनिया को तो छोड़ो...उससे तो नहीं डरती
पर अपने आप से डर लगता है
ओर मा जब तुम ओर पापा भी साथ नहीं देते न
तो बस यही सवाल आता है
क्या मै इतनी गलत हूं
कुछ सही नहीं कर सकती
क्या इतनी बुरी हूं मै
हमेशा अपने आप को ही कोष्टी हूं
पर क्या करू
आप से भी कभी कह नहीं पाती
क्योंकि डरती हूं आपके डर से
ओर आप समझ नहीं पाती या शायद मै समझा नहीं पाती
जो भी है बस मै आपको अपने दिल की बात नहीं बता पाती
दुख होता है मा रोना आता है
पर नहीं रोती,बस थोड़ी हिम्मत जुटाई है
कुछ दिन ओर जुटा कर बस
सबसे दूर चली जाऊंगी
चिंता मत कर मां
तुझे तकलीफ ना पहुंचाऊंगी
Rashmi Oct 2019
हमने ये आज जान लिया
दुनिया मै कोई न देगा हमारा साथ,
हमने तो सोचा था,है हमारे को खास
जिन्हे करना चाहते थे अपने साथ
चाहते थे हर सुबह जिनका दीदार
करना चाहते थे जिनसे ऐतवार
जिनको देना चाहते थे दिल अपना
जिनसे की थी वाफा हमने
सहेलियां जानती थी जिन्हे
हम चाहते थे जिन्हे
सोचते थे है वो हमारे साथी
और क्या ही प्रशंसा करे उनकी
जिनके नाम से सारे मंत्र सुरु होते है
ऐसी बेवफाई के उन्होंने
गए थे किसी गलती के माफ़ी मांगने
उन्होंने कुछ और ही समझ लिया
थमा दिया किसी और के हाथो मै
समझ कर हमारी माफ़ी को कुछ और
फशा दिया एक धर्मसंकट मै
फिर भी हमारा दिल है क्या
माना नहीं बिना आपके
बिना आपकी आवाज़ सुने
आप पे फिद्दा ऐसे हुए की
गाली भी अगर आपको दे
तो दर्द हमारे दिल को होता है।
Rashmi Oct 2019
हम देना चाहते है उन्हें,सब कुछ
उनके मांगने से पहले
चाहते है की दुनिया की हर खुशी लाकर
रख दे उनके चरणों में
क्या करे हम इतने अनजान थे
दुनिया क्या है इसमें जीना कितना मुश्किल है
ये तो हमने आज जाना
मेहनत किस परिंदे का नाम है
ये आज पहचाना
सोचते है कैसे करे मेहनत
कैसे रखें दुनिया के खुशियां उनके चरणों मै
हमे खुश देखकर जो हो जाते है खुश
कैसे हम उन्हें खुश करे
जो हम चाहते है वो हमेशा होता नहीं है
हम क्या करे ऐसे निकम्मे बने परे है
हमारी जीत देखकर जो होते है खुश
हमारी इज्जत कोई करे तो उन्हें होता है गर्व
हम चाहे जो करे उनका कर्ज कभी न चुका पाएंगे
ऐसा कर्ज जो एक फूल के सुगंध का होता है
ऐसी ध्वनी का कर्ज जो एक बासुरी का होता है
हम दबे है कर्जो तले कोई तो हमे उठा लो
बक्ष दी हमे या दे दो थोड़ी हिम्मत
जो चाहे वो पा ले हम,
उनकी खुशी दिलादे हम
इसलिए मौला से दुआ करते है
इतनी से रहमत कर दे
दिल कि ये इतनी सी हसरत पूरी कर दे।
Rashmi Oct 2019
कैसे करे आपको ये बाया
कितनी चाहत है दिल मै
सबसे दूर भागते है
फिर न जाने क्यों
आपके अजीज बनना चाहते है
जवाने को ये भी दिखाना चाहते है
दिल हमारा कोई खिलौना या तमका नहीं
जो कोई चुरा ले ,या चकनाचूर कर दे
हमारा दिल इतना भी नाज़ुक नहीं
फिर क्यों ये तुम्हारे सामने झुकता है
हर बार तुम्हारी सिर्फ एक आवाज़ से
अपना सारा धेर्य खो देता है
हर बार अपने आप से एक वादा करती हुं
अब नहीं जाऊंगी
उस दिलतोर,अहसानफरामोश इंसान की गली
पर क्या करे
ये दिल इतना कमबख्त है
खुद से वायदा कर खुद है तोड़ता है
उस इंसान के बातो के
मोषिकी मे डूब कर बहता चला जाता है....
Rashmi Oct 2019
सभी व्यस्त है अपने कामों मै
या अपने दोस्तो मै
मै है क्यों अपना वक्त बर्बाद कर रही हूं
इन गैर सोच मै
शायद मुझे भी अपनी ओर रूख मोरना चाहिए
लोगो को छोर अपने आप को देखना चाहिए
क्यों लोगो की सुनू
खुद की सुनने की एक कोशिश भी ना करू
पता नहीं  क्या हो गई हूं
खुद मै हि खो गई हूं
क्या चाहती हूं खुद से
ये भी ना जानू
हर रोज़ तय करती हूं
अपने ऊपर ध्यान दूंगी
लोगो को छोड़ो उनका क्या है
आज ये कहेंगे तो कल कुछ और
तो अच्छा है न खुद मै खो जाऊं
इस फरबी दुनिया की भीड़ मै खोने से
ज्यादा बेहतर है खुद खुद मै खो जाऊं
रोजाना कोशिश करती हूं
खुद मै रहूं,खुद से रहूं
पर नहीं होता
क्या करू
पर कोई ना कोशिश जारी रखी है
देखती हूं कब तक खुद से हारती हूं
खुद से जीतने के ज़िद्द
बस कायम रखनी है।
Rashmi Oct 2019
लग रहा है खो सी गई हूं
कुछ समझ ही नहीं आ रहा
बस लग रहा है सबकुछ खत्म है
क्यों हूं फिर मै यहां समझ नहीं आ रहा है
तनहा हूं सच मै
या भीड़ मै खो गई हूं
डर लग रहा है यहां
ये बात किस्से कहूं
जो बचपन मै डर निकलते थे
आज उन्हें पता है नहीं है
किस हाल में हूं मै
सच मै कहीं खो गई हूं
समझ नई आता क्यों हूं यहां....
पर कोई तो वजह होगी न
बेवजह तो नहीं हूं यहां
अब बहुत जगहों पर पढ़ा है
बेवजह तो कुछ नहीं होता
तो क्या करू
छोर दू सबकुछ वक्त के हाथो
ताकि वक़्त खेल जाए मेरे साथ
या फिर खोजी खुद को....
पर कहीं ये भी पढ़ा था
की जिंदगी अपने आप को बनाने का नाम है
ना के खोजने का नाम....
अब तो बस ये सोच रही हूं
करती हूं यार इन सब
लिखी हुई पढ़ी हुई बातो को
थोड़ा खुद सोचकर देखती हूं
शायद जिंदगी थोड़ी और आसान हो जाए
कोशिश करती हूं फिर
शायद खुदा ने कुछ सोचा है
इसीलिए सांस की डोर अभी तक काटी नहीं है
चल रही है ये सांसे
तो खुदा के इस मेहरबानी में दी गई
इन सांसों को इस्तेमाल करते है
क्या पता कब ये सांसे छूट जाए
और हम हमेशा के लिए खो जाए
तो संसो के खोने से पहले खुद को पाने की
एक कोशिश तो बनती है न
चलो एक ही करते है
पर कुछ तो करे बिना कुछ किए जाने से बेहतर है।
बेहतर सलाह है
लिखी पढ़ी बातो पे ना सोचे
खुद के मस्तिष्क का प्रयोग करे।
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