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Jul 2021
डर हैं लगता
खुशीया जो मिली
खो ना दू उसे कही
मुठठी मे बंद किये थे
जो रीशतो कि दोरीया
छूट ना जाए हाथों से वो कही
कही खुशीये और रीशतो को समभालने की कोशिशे मे
हार ना जाऊ मे कही
Akta Agarwal
Written by
Akta Agarwal  21/F/Kolkata
(21/F/Kolkata)   
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   SUDHANSHU KUMAR
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