आजकल
कुछ नेतागण
सनातनी अस्मिता को
धूमिल करने के निमित्त
दे देते हैं उलटे सीधे बयान।
जिनसे झलकता है
अक्सर उनका मिथ्याभिमान।
ऐसे बयानों पर
बिल्कुल ध्यान न दो ,
अगर ऐसा नहीं किया
तो वे बरसाती मेंढ़क बनकर
और ज़्यादा टर्राहट करेंगें ,
जन साधारण को भयभीत करेंगें ,
और जान बूझ कर
अट्टहास करेंगें ,
यही नहीं मौका मिलेगा
तो जन का उपहास करेंगे !
जन धन पर कुदृष्टि रखेंगे !
आप उनकी बाबत क्या कहेंगें ?
कब तक सब अन्याय सहेंगें ?
ऐसे बयान
अचानक जुबान फिसलने से
निर्मित नहीं हुआ करते।
इनके पीछे सोची समझी
रणनीति हुआ करती है।
सोचा समझा बयान
भले किसी को
बुरा न लगे ,
पर यह गहरे घाव किया करता है ,
धुर अंदर तक मार किया करता है।
यह कभी कभी क्या हमेशा
जन मानस को विरोध के लिए
चुपके चुपके तैयार किया करता है।
अचानक
छोटी सी बात
अराजकता फैलने की
वज़ह बन जाया करती है ,
अनाप शनाप बयान देने वालों की
चाँदी हो जाया करती है।
इसे जनता जर्नादन
गहरे आघात के बाद समझती है ,
पर तब तक
जनतंत्र की गरिमा
धूमिल हो चुकी होती है।
अतः ऐसे बयान के आघात को
कभी मत भूलो तुम ,
ये जन मानस में पैदा कर देते हैं मति भ्रम। काश !समय आने पर ,
काश!
जनता
लोकतंत्र का पर्व मनाने वाले दिन
वोट से चोट देना
जल्द ही सीख जाए ,
तो उन उपद्रवियों के
परखच्चे
बिना गोला बारूद के
उड़ जाएं ,
निरीह पंछी
उन्मुक्त होकर
जीवनाकाश में
उड़ पाएं ।
वे गंतव्य तक
पहुँच जाएं।
सोच समझ कर
नेतृत्वकर्ता को देना
चाहिए बयान
अन्यथा अनजाने ही
जनता की म्यान ,
जनता जर्नादन का का आंतरिक ज्ञान
चुपके चुपके
अपने भीतर छुपी
असंतोष की तलवार को
धार लगा दिया करती है।
वह समय के साथ बढ़ती हुई
सत्ता पक्ष को
हतप्रभ , स्तब्ध , वध के लिए बाध्य करती हुई ,
संघर्ष पथ पर बढ़कर
परिवर्तन लाया करती है ,
देश दुनिया और समाज में
जिजीविषा भर जाया करती है।
अतः सब सजग हो जाएं ,
कम से कम
अपनी जुबां पर
समय रहते लगाम लगाएं !
वे असमय काल कवलित होने से
स्वयं को बचाएं !
आजकल
नेतागण
सोच समझ कर
अपने बयान दें ,
व्यर्थ ही बाद विवाद को
हवा भूल कर भी न दें !
वे अपने आचरण को
शिष्टता का स्पर्श कराएं !
अशिष्ट बनकर कड़वाहट न फैलाएं !!
२४/०३/२०२५.