कुछ रिश्ता सा है,
तुम्हारी इन आंखों से,
तुम्हारे बिना कुछ कहे ही
यह मुझसे सब कुछ कह जाती हैं।
कुछ रिश्ता सा है,
तुम्हारी इन बातों से,
बिना उन्हें सुने ही,
सब महसूस कर लेती हूं मैं।
कुछ रिश्ता सा है,
तुम्हारी इन अदाओं से,
बिना कुछ दिखे ही,
सब दिखा देती हैं।
हां कुछ रिश्ता तो है तुमसे,
तुमसे ही तो सब सिखा है मैंने।