An early summer morning.
Still dawn—the sun yet to rise.
The sky wears a deep shade of blue,
clouds lingering from yesterday’s rain.
Birds chirp softly in the distance,
and the wind carries a cool breeze through me.
Hair dancing with the air,
eyes still heavy with sleep,
I think about the day ahead.
A new day—
with the same goals,
and the same sweet-bitter memories.
Yet I begin again,
with hope quietly resting in my heart.
I keep walking my own path,
different from the ones around me.
Somewhere along the way,
the road became unfamiliar.
I turn back sometimes,
but see no one behind me.
Am I moving too fast,
or have I simply been left far behind?
Still, I walk forward
with hope for tomorrow—
planting seeds of flowers along the path,
for someone else to find in bloom one day.
5d ago
May 29, 2026 at 12:38 AM UTC
कोई हमें बतलाए कि माजरा क्या है,
जो बीत गया, उस वक़्त का मलाल क्या है।
सुहाना रहा सफर, जो मिले आपसे,
अब बिछड़ रहे हैं हम, तो ग़म क्या है।
Feb 20, 2025
Feb 20, 2025 at 3:07 PM UTC
बदकिस्मती हमारी, नहीं है एक शहर हमारा,
वरना कर लेते दीदार, रोज़ किसी बहाने से।
Feb 20, 2025
Feb 20, 2025 at 3:06 PM UTC
खेलने जा रहा हूँ इश्क़ की बाज़ी,
करने वाला हूँ दिल का इज़हार।
उम्मीद है हो जाएगी फ़तह,
हार भी मिले, तो हौसला रहेगा बरक़रार।
Feb 20, 2025
Feb 20, 2025 at 3:05 PM UTC
वो सर्द रातें , कड़कड़ाती ठण्ड,
वो धुंद का साया, और ओस मै जमे हम।
याद है अभी भी, जब तुम कसके हाथ पकड़ लेती थी
उन सुर्ख हाथों मै भी जान भर देती थी।
अब वो हाथ किसी और के हाथ मैं हैं
और ये सुर्ख हाथ, लाश सामान से हैं।
Feb 20, 2025
Feb 20, 2025 at 2:56 PM UTC
अब सब कुछ धुंदला सा दिखता हैं मुझे ,
क्या ये मेरी आँखों पर पर्दा हैं , या उम्र का तकाज़ा हैं।
तेरा चेहरा फिर भी साफ़ दिखता हैं मुझे ,
ये मेरे मन का वहम हैं, या तेरी यादों का साया हैं।
कैसे कटता हैं मेरा दिन , ये सिर्फ मैं ही जानता हूँ ,
या खुदा ये कैसा हाल बनाया है।
Feb 20, 2025
Feb 20, 2025 at 2:55 PM UTC
एक ख्वाब हैं, जो मुझे रोज़ सताता हैं ,
जितना भी याद करूँ , सर से निकल जाता हैं।
दिखता हैं सब धुंदला , उस ख्वाब के साये मैं ,
इससे ख्वाब कहूं , या कहूँ मेख़ाब मैं।
अब मेख़ाब से मेरा वो याराना नहीं ,
छोड़ी है वो गालिया , अब वहां जाना नहीं।
वो ख्वाब जो कभी अपना सा लगता था ,
अब पराया सा हैं, पर कभी दिल मैं बसता था।
Feb 20, 2025
Feb 20, 2025 at 2:53 PM UTC
बीच रात मैं सताया एक ख्वाब ,
कर गया नींद को पूरा बर्बाद।
अब जाग ही गए तो कैसे सोये ,
करवट बदल - बदल हम बैचैन होये ।
मसनद से कह डाली दिल की बातें ,
मेहबूब मान उसे हम रोते रहे रातें।
उस ख्वाब ने जो दर्द जगाया ,
तन्हाई को और बढ़ाया।
Feb 20, 2025
Feb 20, 2025 at 2:53 PM UTC
तुझे एक बार देखलु तो आँख भर आये ,
तेरी मुस्कान से मेरा दिल संवर जाए।
परदे से निकल ऐ मेरे हबीब ,
तेरे बिना ये मुरीद बेसुध-सा रह जाए।
Feb 20, 2025
Feb 20, 2025 at 2:51 PM UTC
तलाश है खुद की, न जाने कहाँ गुम हो गया हूँ,
कभी जंगलों में, कभी पहाड़ों में फिर रहा हूँ।
हो मुलाकात किसी दिन, यही आस है मुझे,
बस इस उम्मीद में, दरबदर फिर रहा हूँ।
Feb 20, 2025
Feb 20, 2025 at 2:51 PM UTC