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Saby
44/F/Dubai
Blooming flowers in desert land Stretching greenery in yellow sand Camel, date and oil wells It’s just a past that history tells Today it marked proudly its name On top of the world in progress and fame Arts,science and modern education Speedy growth in space mission Different people from different region Varied culture, diction and religion Bedecking them on its forehead Glittering all as bright as rubi red Center of tourism and trade Points of entertainment are great Touching the sky , burj khalifa’s height Simply amazing palm islands site Law and orders, duties and rights All are equal , no compromise Integrity, vision and commitment Strong Tools of a great government Busy and lively roads With safety and peace both East and West mingle nicely Smiley faces twinkle brightly Eid, onam , Diwali and Christmas Melody of festivities bring happiness Carving globally its place We salute Arab Emirates “ Shabistan @
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Feb 14, 2021
Feb 14, 2021 at 12:48 PM UTC
We salute U.A.E
O! What a mess is today’s condition Pondering over the current situation Corona making our lives complex We might helpless, but not hopeless So what !we stay inside So what! we can’t go for a long drive Sun , stars moon still shining in sky Cool breeze blowing in our lives Time to explore your inner soul room Pursue your passion and study on zoom Prevention is better than cure Always be safe make it sure Head to toes , keep it sanitized Put Mask and gloves, when step outside It’s your body no one can harm Eat healthy to build immunity strong Thousands die and hundreds recover I plead to God have mercy on us This pandemic please take away With my friends again, I could play
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Feb 14, 2021
Feb 14, 2021 at 12:46 PM UTC
Untitled
What could be the Matter of I take pride Cast and creed Races and breed Is it my colour Or my size This is not the matter of i take pride I can see diversity All over the world Weave it with integrity Could Paint it with love This is the matter I take pride Reaching to the excellence could be my target But always have patience That I never forget This is the matter I take pride Respect to lifestyle Of people of high profile If I could help my helper And be reason for their smile This is the matter I take pride Winning and losing Is a part of life My participation Of course a matter of i take pride
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Feb 14, 2021
Feb 14, 2021 at 12:42 PM UTC
What could be the matter I take pride
Walking along the sea shore Feeling tired after the daily chores Beauty of sunset growing more No one can simply ignore By the gloomy sun a red carpet is spread But happy to welcome the night instead Calm and blue sea ready to sleep Covering itself with a glittering sheet Waiting for lullaby in a cool night Sung by the silvery moonlight Making me sad sometimes sunset sight But inspires me always to shine bright A glowing sun hiding down the sky slope Promise to come and bring new ray of hope
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Feb 14, 2021
Feb 14, 2021 at 2:47 AM UTC
Beauty of sunset
खिल उठे गुल रेगिस्तान में बिखर गए सबज़ रंग गली मैदान में ऊंट, खजूर और तेल की खदान होगी क़भी यह इसकी पहचान आज लिखी है दुनिया में इसने तरक़्क़ी की अजब दास्तान कितने मुल्कों के यहाँ बसे बाशिंदे क़िस्मों के रंग रूप  मज़हब  और ज़ुबान सजाए इसने ताज ए अमीरात में चमके जो  जगमग बन के हीरे बना तफ़री और तिजारत का मरकज़ लगा रहता है सैलानियों का जमघट साइयन्स, तकनीक , कला और तालीम फलक से भी आगे होगी इसकी खोजबीन समंदर में बसायी आलीशान बस्ती आसमाँ को चूमती बुर्ज ख़लीफ़ा की हस्ती कायदे - क़ानून , फ़रायज और हकूक़ सब के हैं बराबर , ना होती है चूक पाबंदी,मुसतैदी,दूरंदेशी और ईमानदारी क्या ख़ूब निभाती है हुक़ूमत ज़िम्मेदारी रात दिन सड़कों पर रहती है रौनक़ है  फ़िज़ा में तहुफ़्फ़ुज़ और राहत मशरिक़ और मगरिब घुले मिले  हैं मुस्कानों के दिए जले हुए हैं ईद , क्रिसमस , दिवाली और ओनम गूंजती है सब त्योहारों की सरगम दुनिया के नक़्शे में रौशन जिसका नाम उस  अरब अमीरात को हमारा सलाम
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Feb 12, 2021
Feb 12, 2021 at 2:46 PM UTC
अरब अमीरात
खिल उठे गुल रेगिस्तान में बिखर गए सबज़ रंग गली मैदान में ऊंट, खजूर और तेल की खदान होगी क़भी यह इसकी पहचान आज लिखी है दुनिया में इसने तरक़्क़ी की अजब दास्तान कितने मुल्कों के यहाँ बसे बाशिंदे क़िस्मों के रंग रूप  मज़हब  और ज़ुबान सजाए इसने ताज ए अमीरात में चमके जो  जगमग बन के हीरे बना तफ़री और तिजारत का मरकज़ लगा रहता है सैलानियों का जमघट साइयन्स, तकनीक , कला और तालीम फलक से भी आगे होगी इसकी खोजबीन समंदर में बसायी आलीशान बस्ती आसमाँ को चूमती बुर्ज ख़लीफ़ा की हस्ती कायदे - क़ानून , फ़रायज और हकूक़ सब के हैं बराबर , ना होती है चूक पाबंदी,मुसतैदी,दूरंदेशी और ईमानदारी क्या ख़ूब निभाती है हुक़ूमत ज़िम्मेदारी रात दिन सड़कों पर रहती है रौनक़ है  फ़िज़ा में तहुफ़्फ़ुज़ और राहत मशरिक़ और मगरिब घुले मिले  हैं मुस्कानों के दिए जले हुए हैं ईद , क्रिसमस , दिवाली और ओनम गूंजती है सब त्योहारों की सरगम दुनिया के नक़्शे में रौशन जिसका नाम उस  अरब अमीरात को हमारा सलाम
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कभी यूँही ख़यालों में बचपन की यादों के गलियारो में करती हूँ जब भी मैं सफ़र एक चेहरा आता है नज़र वो जो पोशाक से ले कर पहनावे तक तालीम से लेकर रखावे तक रखता था हिसाब और ख़बर बसता क्या ,किताबें क्या, क्या क़लम ,क्या कवर स्कूल हो ,या क्लास ,या सीट हो किधर रहती थी जिसको हर बात की फ़िकर हाथ के जिसके सिले कपड़े, बुने स्वेटर निकले जब भी हम घर से पहनकर सवाल हर कोई करता आगे बढ़ कर किसने सिला किसने बुना कौन कारीगर बीमार हो तो दवाखाने का चक्कर बाज़ारों में घूमना भरी दोपहर गुज़र जाता है बचपन पलक झपक कर रह जाता है मगर जहनों के सफ़ों पर होते है सभी माँ बाप भाई बहन उसका हिस्सा पर चेहरा वो है एक.........,, नाम जिसका सबिहा
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Feb 12, 2021
Feb 12, 2021 at 2:24 PM UTC
सबिहा”मेरी बड़ी बहन”
कभी यूँही ख़यालों में बचपन की यादों के गलियारो में करती हूँ जब भी मैं सफ़र एक चेहरा आता है नज़र वो जो पोशाक से ले कर पहनावे तक तालीम से लेकर रखावे तक रखता था हिसाब और ख़बर बसता क्या ,किताबें क्या, क्या क़लम ,क्या कवर स्कूल हो ,या क्लास ,या सीट हो किधर रहती थी जिसको हर बात की फ़िकर हाथ के जिसके सिले कपड़े, बुने स्वेटर निकले जब भी हम घर से पहनकर सवाल हर कोई करता आगे बढ़ कर किसने सिला किसने बुना कौन कारीगर बीमार हो तो दवाखाने का चक्कर बाज़ारों में घूमना भरी दोपहर गुज़र जाता है बचपन पलक झपक कर रह जाता है मगर जहनों के सफ़ों पर होते है सभी माँ बाप भाई बहन उसका हिस्सा पर चेहरा वो है एक.........,, नाम जिसका सबिहा
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हँसी रात तारों भरी बादलों की ओट से झाँके चाँदनी मदभरी यह नज़ारा कितना प्यारा स्याह फलक में झिलमिलाता गलियारा छुप जाएँगे तारे फैलेगा जब सूरज का उजियारा यह  नज़ारा कितना प्यारा चमकेगा जगमग जब यह जग सारा सूरज की यह लाली शाम आयी मतवाली पंछी परिंदो ने राह ली घरवाली यह नज़ारा कितना प्यारा थके जिस्मों को आशियाँ का सहारा हँसी रात तारों भरी बादलों की ओट से झाँके चाँदनी मदभरी यह नज़ारा कितना प्यारा स्याह फलक में झिलमिलाता गलियारा छुप जाएँगे तारे फैलेगा जब सूरज का उजियारा नयी उमंगो संग नयी तरंगों संग करने ख़्वाबों को सच आयेगी सुबह फिर नयी निराली यह नज़ारा कितना प्यारा खो ना देना नींद में ही उगते सूरज के जोश सा हौंसलों का पिटारा
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Feb 12, 2021
Feb 12, 2021 at 2:20 PM UTC
तारों भरी रात
हँसी रात तारों भरी बादलों की ओट से झाँके चाँदनी मदभरी यह नज़ारा कितना प्यारा स्याह फलक में झिलमिलाता गलियारा छुप जाएँगे तारे फैलेगा जब सूरज का उजियारा यह  नज़ारा कितना प्यारा चमकेगा जगमग जब यह जग सारा सूरज की यह लाली शाम आयी मतवाली पंछी परिंदो ने राह ली घरवाली यह नज़ारा कितना प्यारा थके जिस्मों को आशियाँ का सहारा हँसी रात तारों भरी बादलों की ओट से झाँके चाँदनी मदभरी यह नज़ारा कितना प्यारा स्याह फलक में झिलमिलाता गलियारा छुप जाएँगे तारे फैलेगा जब सूरज का उजियारा नयी उमंगो संग नयी तरंगों संग करने ख़्वाबों को सच आयेगी सुबह फिर नयी निराली यह नज़ारा कितना प्यारा खो ना देना नींद में ही उगते सूरज के जोश सा हौंसलों का पिटारा
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लगे रूयी के गोले लगे बरफ के गोले बादलो के टुकड़े लगे कितने सजीले दूधिया सा रंग फैला सुंदर सा गगन मन चाहे इनमें झूलूँ लूँ मस्त हिंडोलें जितनी हँसी ज़मीन उतना यह आसमा क्या बन सकता है बादलों का बिछओना छू के देखा नहीं है हाथों से पकड़ा नहीं है लिया पानी की बूँदों ने नया रूप सलोना ना जेबों में भरा जाए ना तिजोरी में समाए क़ुदरत का क़ीमती यह अनमोल ख़ज़ाना कभी ग़ुस्से से गरजे कभी प्यार से बरसे जड़े कर्ण कर्ण में ज़िंदगी का नगीना
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Feb 12, 2021
Feb 12, 2021 at 2:12 PM UTC
बादल