Hello Poetry
Submit your work and get some sparkles! Create free account
हँसी रात तारों भरी बादलों की ओट से झाँके चाँदनी मदभरी यह नज़ारा कितना प्यारा स्याह फलक में झिलमिलाता गलियारा छुप जाएँगे तारे फैलेगा जब सूरज का उजियारा यह  नज़ारा कितना प्यारा चमकेगा जगमग जब यह जग सारा सूरज की यह लाली शाम आयी मतवाली पंछी परिंदो ने राह ली घरवाली यह नज़ारा कितना प्यारा थके जिस्मों को आशियाँ का सहारा हँसी रात तारों भरी बादलों की ओट से झाँके चाँदनी मदभरी यह नज़ारा कितना प्यारा स्याह फलक में झिलमिलाता गलियारा छुप जाएँगे तारे फैलेगा जब सूरज का उजियारा नयी उमंगो संग नयी तरंगों संग करने ख़्वाबों को सच आयेगी सुबह फिर नयी निराली यह नज़ारा कितना प्यारा खो ना देना नींद में ही उगते सूरज के जोश सा हौंसलों का पिटारा
0
Feb 12, 2021
Feb 12, 2021 at 2:20 PM UTC
तारों भरी रात
हँसी रात तारों भरी बादलों की ओट से झाँके चाँदनी मदभरी यह नज़ारा कितना प्यारा स्याह फलक में झिलमिलाता गलियारा छुप जाएँगे तारे फैलेगा जब सूरज का उजियारा यह  नज़ारा कितना प्यारा चमकेगा जगमग जब यह जग सारा सूरज की यह लाली शाम आयी मतवाली पंछी परिंदो ने राह ली घरवाली यह नज़ारा कितना प्यारा थके जिस्मों को आशियाँ का सहारा हँसी रात तारों भरी बादलों की ओट से झाँके चाँदनी मदभरी यह नज़ारा कितना प्यारा स्याह फलक में झिलमिलाता गलियारा छुप जाएँगे तारे फैलेगा जब सूरज का उजियारा नयी उमंगो संग नयी तरंगों संग करने ख़्वाबों को सच आयेगी सुबह फिर नयी निराली यह नज़ारा कितना प्यारा खो ना देना नींद में ही उगते सूरज के जोश सा हौंसलों का पिटारा
Written by
44/F/Dubai
Feb 12, 2021
Feb 12, 2021 at 2:20 PM UTC
Request permission to use this poem