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श्री रामचंद्र कृपालु भज मन, हरण भव भय दारुणम्। नव कंज लोचन, कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥ श्री रामचंद्र कृपालु भज मन, हरण भव भय दारुणम्। नव कंज लोचन, कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥ श्री राम, श्री राम, मेरे राम, मेरे राम॥ आन विराजे अवध पुरी तुम, ओ मोहे दशरथ नंदन, ओ मोहे दशरथ नंदन॥ कब से नैना दरस को प्यासे, ओ मोहे रघुकुल नंदन, ओ मोहे रघुकुल नंदन॥ आन विराजे हो अब तुम तो, देखूँ अखियाँ भर के, रख लो मुझको अपने चरणन, पास रहूँ तेरे दर के, पास रहूँ तेरे दर के॥ रामलला तुम्हें देख रहा हूँ, नैना हटती नहीं हैं, कितना सुंदर है ये मुखड़ा, अँखियाँ बरस रही हैं, प्रभु ये अँखियाँ बरस रही हैं॥ फिर ना करना दूर हमें तुम, मैं भी भरत हो जाऊँ, काटे दिन कैसे तेरे बिन , कैसे ये बतलाऊँ, कैसे ये बतलाऊँ॥ तुम बिन सूनी थी ये अयोध्या, था सूना वन उपवन, तुम बिन सूने थे नद झरने, सूना था हर जन-जन॥ तुम जो लौटे तो लौटी हैं, खुशियाँ हर घर आँगन सबकी अँखियाँ बरस रही हैं, प्रेम से हो गई सावन॥ तुमको पाकर हो गया मेरा, तन मन पावन चंदन॥ रखना हमेशा दास अवि को, प्रभु तुम अपने चरणन॥ गाता रहूँ मैं तेरा भजन, यूँ करता रहूँ तेरा वंदन, करता रहूँ तेरा वंदन॥ रामलला तेरा वंदन, हे रामलला तेरा वंदन, मेरे रामलला तेरा वंदन, हे रामलला तेरा वंदन॥ मेरे रामलला की जय, मेरे प्रभु रामचंद्र की जय॥
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May 14
May 14, 2026 at 2:26 AM UTC
Aan viraaje raamlala
श्री रामचंद्र कृपालु भज मन, हरण भव भय दारुणम्। नव कंज लोचन, कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥ श्री रामचंद्र कृपालु भज मन, हरण भव भय दारुणम्। नव कंज लोचन, कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥ श्री राम, श्री राम, मेरे राम, मेरे राम॥ आन विराजे अवध पुरी तुम, ओ मोहे दशरथ नंदन, ओ मोहे दशरथ नंदन॥ कब से नैना दरस को प्यासे, ओ मोहे रघुकुल नंदन, ओ मोहे रघुकुल नंदन॥ आन विराजे हो अब तुम तो, देखूँ अखियाँ भर के, रख लो मुझको अपने चरणन, पास रहूँ तेरे दर के, पास रहूँ तेरे दर के॥ रामलला तुम्हें देख रहा हूँ, नैना हटती नहीं हैं, कितना सुंदर है ये मुखड़ा, अँखियाँ बरस रही हैं, प्रभु ये अँखियाँ बरस रही हैं॥ फिर ना करना दूर हमें तुम, मैं भी भरत हो जाऊँ, काटे दिन कैसे तेरे बिन , कैसे ये बतलाऊँ, कैसे ये बतलाऊँ॥ तुम बिन सूनी थी ये अयोध्या, था सूना वन उपवन, तुम बिन सूने थे नद झरने, सूना था हर जन-जन॥ तुम जो लौटे तो लौटी हैं, खुशियाँ हर घर आँगन सबकी अँखियाँ बरस रही हैं, प्रेम से हो गई सावन॥ तुमको पाकर हो गया मेरा, तन मन पावन चंदन॥ रखना हमेशा दास अवि को, प्रभु तुम अपने चरणन॥ गाता रहूँ मैं तेरा भजन, यूँ करता रहूँ तेरा वंदन, करता रहूँ तेरा वंदन॥ रामलला तेरा वंदन, हे रामलला तेरा वंदन, मेरे रामलला तेरा वंदन, हे रामलला तेरा वंदन॥ मेरे रामलला की जय, मेरे प्रभु रामचंद्र की जय॥
arvind-bhardwaj
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May 14
May 14, 2026 at 2:26 AM UTC
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