Hello Poetry
Submit your work and get some sparkles! Create free account
निकला हु अकेला पहाड़ों में अकेलापन सुकून की चाहत में | कहानी मंज़र बदलेगा जरूर मेरा ये हवायें कहती है तम्माम तकलीफों का इल्लज यही हैं ||
0
Sep 25, 2021
Sep 25, 2021 at 2:21 PM UTC
पहाड़ों में सुकून
निकला हु अकेला पहाड़ों में अकेलापन सुकून की चाहत में | कहानी मंज़र बदलेगा जरूर मेरा ये हवायें कहती है तम्माम तकलीफों का इल्लज यही हैं ||
Whitewords
Written by
20/F/Delhi
Sep 25, 2021
Sep 25, 2021 at 2:21 PM UTC
Request permission to use this poem