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दिन ढल रहा है रात आ रही है मगर कुछ मुझसे, ये शाम कह रही है क्यूं होते हो निराश अब उठ जाओ मत होने दो अंधेरा दीपक जलाओ कल फिर आएगा सूरज एक नई चमक लेकर बस इस आस में एक नया "जहां सजाओ"!!
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Feb 21, 2021
Feb 21, 2021 at 9:41 AM UTC
"सांझ की आस"
दिन ढल रहा है रात आ रही है मगर कुछ मुझसे, ये शाम कह रही है क्यूं होते हो निराश अब उठ जाओ मत होने दो अंधेरा दीपक जलाओ कल फिर आएगा सूरज एक नई चमक लेकर बस इस आस में एक नया "जहां सजाओ"!!
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Feb 21, 2021
Feb 21, 2021 at 9:41 AM UTC
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