Hello Poetry
Submit your work and get some sparkles! Create free account
दबे ज़ख़्मों को कुरेद के क़लम लिखने को उठायी ही थी, कि लोगों ने ‘वाह’ कर शायर बना दिया...!! #वैरागी
0
Sep 18, 2019
Sep 18, 2019 at 3:36 PM UTC
शायर
दबे ज़ख़्मों को कुरेद के क़लम लिखने को उठायी ही थी, कि लोगों ने ‘वाह’ कर शायर बना दिया...!! #वैरागी
Written by
Sep 18, 2019
Sep 18, 2019 at 3:36 PM UTC
Request permission to use this poem