चुभन थी जब दिल में कोई सहारा न मिल सका,
बेवक्त, बेसबब, बेजान तैरता रहा, किनारा न मिल सका ...!!
#वैरागी
Sep 18, 2019
Sep 18, 2019 at 3:39 PM UTC
जितनी किताबों से दूरी हो चली थी,
क़लम ने उतना ही पीछा कर लिया ...!!
#वैरागी
Sep 18, 2019
Sep 18, 2019 at 3:38 PM UTC
हर रात जगता हुँ, हर रात लिखता हूँ,
कोई रहनुमा बन पूछे तो सही, मैं क्यूँ नहीं थकता हुँ ...!!
#वैरागी
Sep 18, 2019
Sep 18, 2019 at 3:37 PM UTC
दबे ज़ख़्मों को कुरेद के क़लम लिखने को उठायी ही थी,
कि लोगों ने ‘वाह’ कर शायर बना दिया...!!
#वैरागी
Sep 18, 2019
Sep 18, 2019 at 3:36 PM UTC
रची है साज़िश चंद अपनो ने ही क़त्ल की मेरे,
कोई बताए उनको, उनके नफ़रतों ने मुझे शातिर बना दिया ...!!
#वैरागी
Sep 18, 2019
Sep 18, 2019 at 3:36 PM UTC
हर बंदिशे तोड़कर जिसने तितलियों की तरह बग़ल बैठने का क़रार कर लिया,
मिले अरसे बाद मसरूफ़ ज़िंदगी में तो पहचानने से इंकार कर दिया ...!!
#वैरागी
Sep 18, 2019
Sep 18, 2019 at 3:35 PM UTC
सब मिलता रहा तो कोसते रहे माँ बाप को ,
ज़रा जिम्मेदारियाँ क्या बढ़ी, सम्भाल नही पा रहे अपने आप को ...!!
#वैरागी
Sep 18, 2019
Sep 18, 2019 at 3:34 PM UTC