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मधुवन, आसमा , पर्वत, सागर खुस कहाँ हे सारी दुनीया जोगी हे मगर हे मनका व धनी हेगा न कोइ उसका जैसा जोगी बनके लो दिखादो —२ मे करु तुम्हे सलामी ज्ञान होके नही सिखाया बन न सका मे ज्ञानी लगाके चन्दन रखा  फिर दाह«ी पर बन नसका मे जोगी जोगी बनके लो दिखादो मे करु तुम्हे सलामी   चाहत अनेक बाकी हे अभी रहेने न सका मे भोगी शान्ति नही मनहे चनचल ध्यान नही मेरे  बसमे जेगी बनके लो दिखादो मे करु तम्हे सलामी भूखका आँगसे पेटहो खाली आज बनगया मे भिखारी पर बन  न सका मे जोगी —२ जोगी बनके लो  दिखादो मे करु तुम्हे सलामी लगाके चन्दन, रखा फिर दाह«ी पर बन न सका मे जोगी बन न सका मे जोगी —३
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Mar 19, 2019
Mar 19, 2019 at 2:05 PM UTC
बन न सका मे जोगी
मधुवन, आसमा , पर्वत, सागर खुस कहाँ हे सारी दुनीया जोगी हे मगर हे मनका व धनी हेगा न कोइ उसका जैसा जोगी बनके लो दिखादो —२ मे करु तुम्हे सलामी ज्ञान होके नही सिखाया बन न सका मे ज्ञानी लगाके चन्दन रखा  फिर दाह«ी पर बन नसका मे जोगी जोगी बनके लो दिखादो मे करु तुम्हे सलामी   चाहत अनेक बाकी हे अभी रहेने न सका मे भोगी शान्ति नही मनहे चनचल ध्यान नही मेरे  बसमे जेगी बनके लो दिखादो मे करु तम्हे सलामी भूखका आँगसे पेटहो खाली आज बनगया मे भिखारी पर बन  न सका मे जोगी —२ जोगी बनके लो  दिखादो मे करु तुम्हे सलामी लगाके चन्दन, रखा फिर दाह«ी पर बन न सका मे जोगी बन न सका मे जोगी —३
Genre: Observational Gazal Theme: Unattached || Free spirit
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Mar 19, 2019
Mar 19, 2019 at 2:05 PM UTC
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