#gazal
Qatil *** main khud jazbaat ka meray,
Har din karta *** qatl apni baat ka meray.
Jo dil ke kone mein chhupa dukh tha,
Aaj ban gaya hai shor hayaat ka meray.
Meri har khushi ko main khud mitata raha,
Qareeb na aaya koi bhi saath ka meray.
Mohabbat ka diya khud hi bujhaya maine,
Kya gila karun ab kisi firaaq ka meray?
Har dafa main khud hi chor ban jata hun,
Shikayat kaisi ** kisi ilzaam ka meray?
Qatil *** main khud jazbaat ka meray,
Har din karta *** qatl apni baat ka meray.
Feb 7, 2025
Feb 7, 2025 at 8:45 AM UTC
Kisi nazar mein kashish aisi, ke dil thehar jaye
Chahne wale ka har zakhm, khud sanwar jaye
Yeh jo lams hai tera, yeh jadoo ka raaz sa
Dil ki veeran galiyon mein roshni bhar jaye
Teri baaton ka asar dil pe utarta aisa
Har khayal, har dua tujh pe hi thehar jaye
Yeh mohabbat hai ya koi khwab ka dhoka
Jo bhi mile, wohi khwahish ban ke bikhar jaye
Meri har saans mein, tere wujood ka ehsaas
Mere dil ka har dukh, tere qadam par mar jaye
Kisi nazar mein kashish aisi, ke sab bhool jayein
Dil ke har goshe mein tu hi tu thehar jaye
Nov 26, 2024
Nov 26, 2024 at 9:19 AM UTC
Takta hoon tum ko, yeh dil behak jata hai
Tumhare jalwe mein jahan tham sa jata hai
Tumhari aankhon ki gehraayi mein doob jata hoon
Tumhari muskaan pe har dard bhool jata hoon
Tum chalti ** to hawa gungunane lagti hai
Tum bolti ** to khamoshi bhi jagti hai
Yeh dil tumhare lamss ki tamanna liye
Har lamha teri qurbat ki dua kiye
Magar tum door ** yeh faasle kyun hain?
Yeh faaslon mein bhi mohabbat ke geet kyun hain?
Takta hoon tum ko, aur jeeta hoon tum mein
Tumhare khwabon mein, aur haqeeqat ke gum mein
Nov 25, 2024
Nov 25, 2024 at 2:28 PM UTC
Guzar ta nahi ye shaam-e-gham
Zindagi ke dukhon ka hai peham sitam
Qadam qadam par thakan ka pehra
Himaton ke chiragh bhi ** gaye madhham
Musaafir hoon raahon ka jin ko khabar
Manzilon ka saraab hai, dil ka maatam
Khawab jo bune the, reza reza huye
Haath khaali rahe, na raha koi dum
Sawaal ye hai, aye falak-e-jafa
Kitna aur sehna hai, bata ye sanam
Guzar jaye ye shaam-e-gham kisi tarah
Warna raah mein bikhar jayein hum
Nov 20, 2024
Nov 20, 2024 at 10:58 AM UTC
आपका मनमे जो हे आज बताव हमे ——२
सामने हमारीसिवा न होगा कोइ दुसरे ——२
चेहेरा उठाकर अाँख मीलालो आँखसे
न घबराव लो वक्तका सामना करो
आप नजर मोडकर कभीतो हँसा करो ——२
चाहत, ख्वाइस् कभी तो सुनाया करो
मनमे कोइतो राज होगी आपके
हमको कभी अप्ना समझकर् कहाँ करो ——२
आपका मनमे जो हे आज बताव हमे
सामने हमरीसिवा न होगा कोइ दुसरे
मनमे कोइतो राज होगी आपके
हमको कभी अप्ना समझकर कहा करो
दर्द भरी दिलका कहीँ तो होगी मलहम ——२
ढुड लाउँ उसे एकवार दिशा दिखादो ——२
साथी हु आपका अबतो दुरि घटादो ——२
एकवार फिर नजर उठाकरके तो देखो ——४
Mar 21, 2019
Mar 21, 2019 at 9:59 PM UTC
आजाव आप कभी फरियाद लेके
पायल छन्काके चुडीया गीत सुनाके ——२
दिदार करु आपका मे भरि मनसे
देखकर सरमाए लो व देखनेवाले
इस पलका आपको भी चाहत होगी मनमे
राँहाँे ढुड्ता हुए थक्ती होगी निगाहेँ
मनमे पुछनेको होगी हजार सवाले
देर नकरो, सिम्टादो अब ए सफर
आजाव आप कभी फरियाद लेके
पायल छन्काके चुडीया गीत सुनाके
खामोस चेहरा आपका सरमाना मन्जुर नही
महोबत दिलमे हा तो खुुलाना जरुरी नही
आजाव आप कभी फरियाद लेके
साथी होडगे बहुत लेकिन चल्ना फिर्ना छोड्दोगे
साथ हमारी पाकर खाब सजाना भूलदोगे
आजाव आप कभी फरियाद लेके
बोल सक्ते लोग चाहे मनगडी बातेँ
रोक्ना मत चाल, आप बीच राँहोमे
आजाव आप कभी फरियाद लेके
पायल छन्काके चुडीया गीत सुनाके ——३
Mar 25, 2019
Mar 25, 2019 at 11:39 AM UTC
मन गोरा, रंग गोरा चंचलसी अदाए
दिवाने बनगँए हम देखकर उन निगाहँे
य खुबसुरती तुने पाइ कहाँसे ?——२
समलकर चल्ना जालीम हे हर नजर
दवाकर रख्ना अप्नी बढ्ती धढ्कन
बन्द कर्दो होठपे लव्ज अप्नी
कम न पढे खुबसुरती तुम्हारी ——२
राहोमे तुम्हे भट्का सक्ता हे कोही
आवाज देकर बुला सक्ता हे कोही
बन्द कर्दो दिलके सारे दरवाजे
कम न पढे खुबसुरती तुम्हारी ——२
सकल तुम्हारा उस चाँदनीकी तरह
साँस तुम्हारा उस चमेलीकी तरह
दिल तुम्हारा उस मोमकी तरह
य खुबसुरती तुने पाइ कहासे ?——२
उम्मीदे मराहँे जिनेका गम पिकर
दिप लग्ताहे हस्ता हो मेरे उपर
आइनो ने मुझसे बन्द कर्र्र्र्दी बातँे
समलकर चल्ना जालीम हे हर नजर ——२
मीलाव जुत्फे अप्नि मतलव निकाल सक्ता हे कोही
गिरालो अाँचल अप्नि देख् सख्ता हे कोही
बन्द करो होठ अप्नि पुछ सक्ता हे कोही
य खुबसुरती तुने पाई कहाँसे ?——३
Mar 18, 2019
Mar 18, 2019 at 11:00 AM UTC
लिलामथा बाजारमे मेरी सारी दुनीया —२
बढ्कर भाऊ लगारहाथा सारी दुनीया
पहले मे समझ नसका ए क्या हो रहाथा
तमासा लग रहाथा हस् दिएँ फिर फजुलमे
लिलामथा बाजारमे मेरी भरी दुनीया
हमारी कामोका लगाथा पहेली बोली
सुन्कर आवाज बढी हो गया मे पसिना
तैला हमको किसिने रुपैया किसिले सोना
हाथ था शरिर मे मगर व विक्चुका था
साँस था जिस्म पर मगर मे एक लाश था
लिलामथा बजारमे मेरी भरी दुनीया
मनका लगाथा फिर दोस्री बोली —२
बढ् रहाथा भाउ मेरी उँची पर उँची
आधार मालुम कहाँ मुझको मेरा मनका
पल दो पलमे मन् नेभीे किया अलबीदा
साँसथा जिस्मपर मगर मे एक लाशथा
लिलामथा बाजारमे मेरीे भरी दुनीया
सपनोका लगाया फिर बाजारियोने बोली —२
दौलत निछावर हुवाथा मेरे उपर
खाबही देताथा मुझको जिनेकी चाहत
बगयर खाब हो गाया अब मे जानवर
साँसथा जिस्मपर, मगर मे एक लाशथा
लिलामथा बाजारमे मेरी भरी दुनीया
साँसथा जिस्मपर मगर मे एक लाशथा
लिलामथा बाजारमे मेरी सारी दुनीया
Mar 21, 2019
Mar 21, 2019 at 9:48 PM UTC
लम्बी हँे रात काली, कल होगा फिर सबेरा ——२
धड्कन बढालो तुम दिलके अप्नी रातमे कोई जगेगा
गातँेरहो गीत तुम अप्नी कल कोइ सुनेगा
धड्कन बढालो तुम दिलके अप्नी रातमे कोइ जगेगा
लम्बी हे रात काली कल होगा फिर सबेरा ——२
उम्मीदँे फरियादँे तुम गा कर सुनाव ——२
दर्द भरी पलको तुम रो कर सुनाव ——२
बातँे बारसातके तुम हस् कर सुनाव ——२
खाब भरी पलको तुम गा कर सुनाव ——२
गातेरहो गीत तुम अप्नी कल कोइ सुनेगा
धड्कन बढालो तुम दिलके अप्नी रातमे कोइ जगेगा
लम्बी हे रात काली कल होगा फिर सबेरा
गातेरहो गीत तुम अप्नी कल कोइ सुनेगा
समरती पाऊ आकर कल तुुम्से मीलेँगा
खुली आँख आकर तुम्से वातेँ करेगा
दिप साफ आकर तुम्को राहँे दिखाएगा
गाते रहो गीत तुम अप्नी कल कोइ सुनेगा
लम्बी हे रात काली ,कल होगा फिर सबेरा
गाते रहो गीत तुम अप्नी कल कोइ सुनेगा ——२
Mar 18, 2019
Mar 18, 2019 at 11:06 AM UTC
अजब गजबका जादुसी दुनीया ——२
जाने रब कहाँ खो गया । रंग बहुत देखिँ हँे मैने यहाँ
मे सतके खोजमे निक्ला ——२
हे छत बेगरके दिवारेँ ——२
कही काली धनकी हेँ महेफिल । हे नङगा शिर कही खाली
कही नङगा बन्ताहे खुवाइसे । अजब गजबका जादुसी दुनीया
हे खाली पेटेके दिन दुःखी ——२
कही दान लेतँे हँे फजुलमे । हे प्यासी गला कही सुकी
कही सराबकी हे बारिसे । अजब गजबका जादुसी दुनीया
हे नन्हा उठाता बोझ भारी ——२
कही बढे सब बेकाम हे । देखा प्यारका हँे साजिसे
कही दिवाने पहेनते हँे हडकडी । अजब गजबका जादुसी दुनीया
हे गुमराह जन यहाँ ——२
कहीँ लिन हेँ कोइ तपमे । देखा काडोका बनी सिमाए
कहीँ फुल्ता गुलाब वागमे । अजब गजबका जादुसी दुनीया
देखा एकताके कइँ नारे ——२
कही मारा मारी हँे भाइयोमे । लगा चेतना हे यहा कमी ——२
अजब गजबका जादुसी दुनीया । मे सत के खोजमे निक्ला
अजब गजबका जादुसी दुनीया ——३
Mar 21, 2019
Mar 21, 2019 at 7:03 AM UTC
मुझको छोड्कर तुम कहाँ जावगे ——२
अप्नी दिलको मेरा साँयाँ बनाकर
एक दिल बन् गए दो दिलको ——२
फिरसे क्या दो दिल बनावगे ?
सँग बीताए पल कैसे कोइ भूलाए
यादहे मुझको तेरा हसना रोना
जब एक दिन दुर होकर बीताएथे
तेरे नजरे पर साथ हमने लाएँथे
एक दिल बन् गए दो दिलकोे
फिरसे क्याँ दो दिल बनावगे ?
दिलमे दर्द देकर कहाँ तुम जावगे ——२
भूलाना हम कहाँ सकेङगे तुमको
जीसको हम् दिलपे लेकर चलते हे
जीसको हम जमीर अप्ना समझते
जीस् से हमने बात सिकँे थे प्याराँे के
जीसका बाते अभी भी कानोमे हँे मेरँे ——२
एक दिल बन् गए दो दिलको
फिरसे क्या दो दिल बनावगे ?
एक दिल बन् गए दो दिलको
फिरसे क्या दो दिल बनावगे ? ——२
Mar 27, 2019
Mar 27, 2019 at 11:30 AM UTC
तेरा चेहरा खोया खोयासा देखा
सिर्पm एकवार मेरीे तरफ पाउ बढाकर देखो
दिलकी सपनोसे भरेहँे रौनक तेरी आखोमे ——२
आइना नही अभी आखोमे मेरी देखो
जो कभी संझा नसकाथा तुझको मे माही
आज तुम पहेचान लोगी वही मन्जिल
तेरा खामोसी अभी कमहे लोगोसेँ मेरे माही
सिर्फ एकवार झुपडीमे नजर फिराकर देखो
दिलकी दर्दसे भरे हेँ आसु तेरी आखोमे
आइना नही अभी आखोमे मेरी देखो
जो कभी संझा नसकाथा तुझको मे माही
आज तुम पहेचान लोगी वही मन्जिल
तेरा चेहेरा उझला उझलासा देखा ——२
सिर्फ एकवार मेरी खातीर गीत गाकर देखो
छुपाइ खुबसुरती भरेहेँ रंग तेरी चेहेरोमे ——२
आइना नही अभी आखोमे मेरी देखो
जो कभी संझा नसकाथा तुझको मे माही
आज तुम पहेचानलोगी वही मन्जिल
तेरा शहेर आज सोया सोया देखा ——२
सिर्फ एकवार बाहर घरसे निकलकर देखो
झुमेगी दुनीया फिर कङगन पायलकी धुनमे ——२
आइना नही अभी आखोमे मेरी देखो
जो कभी संझा नसकाथा तुझको मे माही
आज तुम पहेचानलोगी वही मन्जिल
Mar 21, 2019
Mar 21, 2019 at 10:20 PM UTC
रोसनी लगे फिका, जब हो तुम मेरे सामने ———२
झुठभी मानु सही जब हो तुम मेरे वाहोमे ———२
निगाहेँ मच्ले, अाँचल झुकाके
धड्कने उछ्ले, आवाज सुनाके
छुप्ता नही देरतक दिलकी अब ए बाँतेँ
कित्ना भोला, सुहाना हे चेहरा तुम्हारा
रोसनी लगे फिका, जब हो तुम मेरे सामने
पहेले, बहुत पहेले तुम, क्यूँ नमीले मुझे
तरासा हरजगा नमीले तुम सामने
हर खुबसुरती मिल्ता, कहाँ, मुफ्तमे
बनानेकोे लग्ता बक्त ज्यादा, कम लग्ता तोड्नेको ——२
निगाहेँ मचले————
धढ्कने उछले————
छुप्ता नही—————
कित्ना भोला, सुहाना—————
इसी तरह तुम मुझे क्या देखती रहोगी रात भर ——२
कम पढे तारिफेँँ तुम्हारी बस समझना प्यार हमारी
मेरी धढ्कन अब करेँ हर बक्त तारिफेँ तुम्हारी
साँस रुकिहो अब, बक्स् करो, जान हमारी
निगाहे मचले————
धढ्कने उछले——————
छुप्ता नही——————
कित्ना भोला सुहाना——————
रोसनी लगे फिका जब हो तुम मेरे सामने
झुठभी मानु सही जब हो तुम मेरे वाहोमे
Mar 18, 2019
Mar 18, 2019 at 9:15 PM UTC
सासँ वही धढ्कने वही, वहीहे सबका आखिरी सडक
आज हम कल तुम, पर आवगे एकही तरफ
हवोका साथ चल्नेवाले मुसाफिर कहाँका हे तुम्हारा सफर
मन्जिल कब पहुँचेगा अगर हवाँ बदले दुसरी तरफ
कब आएका अप्नी वारी किसिको नही हे ए खबर
आज हम कल तुम पर आवगे एकही तरफ
दिन अगर तुम्हारा हे तो, देताहे धुप चेहेरेमे चमक
रात अगर दुःखी निक्ला तो, छोडदेता सायाँभी अप्नी सफर
कब आएका, अप्नी—————
आज हम कल तुम—————
समयके साथ बदलताहे ऋतु रंग और मौसमे ———२
बस् वँहीँ रहेता हँे लकिरेँ और चाँद ए सुरज
कब आएका, अप्नी ——————
आज हम कल तुम——————
साँस वही, धढ्कने वही, वहीहे सबका आखिरी सडक ———२
दिन अगर तुम्हारा हे तो, देताहे धुप चेहेरेमे चमक ———२
रात अगर दुःखी निक्ला तो, छोडदेता साँयाँभी अप्नी सफर
साँस वही धड्कने वही, वहीहे सबका आखिरी सडक ——३
Mar 21, 2019
Mar 21, 2019 at 1:13 PM UTC
सुनाताहु मे अब, एक घरकी कहानी —२
जिन्दगीने किया, कैसे छेड्खानी
हस्ता, चेहरा हे उसका, दिलमे दर्द हे पुरानी
लगाहे आग मनमे, कोइतो पिलाव थोडा पानी
प्यार देकर बढ्ता हे , कभी कम नही होता
दर्द सुनाकर दिल रोता हे, आसुव का दासता —२
सुनाताहु मे अब, एक घरकी कहानी
जिन्दगीने किया, कैसे छेड्खानी
ऋतु आएँ, अाँख आगे, नआया, उसके अपने
नइ पत्ते, लगा पेढँपे, नआया, उसमे मौसमे
खुशी कोइ रंगमे नही आता हरघडी सामने
बन्द किए पल्कँे, उघरते नही सुनके बात, प्यारके —२
सुनाताहु मे अब एक घरकी कहानी
जिन्दगीने किया कैसे छेड्खानी
Mar 21, 2019
Mar 21, 2019 at 9:54 PM UTC
कोइ न बीताए अप्ना एसा पल
मेरा कहेना, अब बारिहे तेरे सुन —२
आँएथे कही पहेले यहाँ कभी
कोइथा जो चल्ताथा मेरे संग —२
दिलके साथ दर्द साटे एक दिन
साथ नछुटे डरथा दिलमे हरदम् —२
कभी गाना कभी हसना था व पल
कभी छुपा तो कभी मील्ते थे हम्
एक दिन नमीले तुमसे जब संग
लगाथा पाएङगे जी के सिर्फ अब गम्
साथ नछुटे डरथा दिलमे हरदम् —३
कहां कहांसे आया फिरभीे व एक वक्त
पुछे बीन लेगाया तुझको उसने मेरे सँग
अब बाँकिहे सिर्फ उसके साथ रहेता पल
कभी गाना तो कभी हसाँ कर्तँेथे हम् —२
कभी छुपा तो कभी मील्तेथे हम् —२
कोइ न बीताए अपना एसा पल
मेरा कहेना अब बारिहे तेरे सुन —३
Mar 27, 2019
Mar 27, 2019 at 11:38 AM UTC
आजके बाद फिर मिल्नेका, रख्ना तमन्नाए
चाहत हो गानेना, तो, लो मे, सिखाँदु तुझको —२
ध.ध.ध. म.म..म ब. ब. ब. .......
खाब हो उड्नेका , पंख, लगादु तुझको —२
आजके बाद फिर मिल्नेका,रख्ना तमन्नाए
दिलमे अगर कोइ, चाहत हो तो, नछुपाव मुझको
मेरे साथ, हस्ना और हसाना, सब जनको
खाब तो खाब हे, जिन्दगी हे एक , सही
उम्मीदे, आसाए, तमन्नाए भी होगी कइँ —२
आवाज नही लेकिन, होठ कुछ, कह रहे —२
रबका भाषा यही हे, लो, मे सिखादु तुझको
मासुम चेहेरा जब , पास आए नजरे ही दिल धड्काए
रबका भाषा यही हे, लो ,मे सिखादु तुझको
सितारोके बात हवाओसे, जब संझोगे
तित्लीयाका पंख गगनमे सहरे, जब देखोगे
जब किसिकी चाहतमे, कुछ देर भुलोगे
सारी दुनीया कुछ नयाँ नयाँसा, जब लगे
तो मे सझु..........
आजके बाद फिर मिल्नेका, रख्खा हे, तमन्नाए —२
चाहत हो गानेका, तो लो मे, सिखादु तुझको
खाब हो उड्नेका पंख लगादु तुझको
सारी दुनीया नयाँ नयाँसा जब लगे तो मे संंझु
आजके बाद फिर मिल्नेका, रख्खाहे, तमन्नाए —२
Mar 18, 2019
Mar 18, 2019 at 9:17 PM UTC
डरना मना यहाँ, आपका सरमाना मना हे —२
मिले हे सालोबाद, लो अब रुठना, मना हे —२े
बितेहुए पलका खयालात, लाना मना हे
यादोका बारात यहाँ, सजाना मना हे —२
जुदाइका , कोइ बहाना बनाना, मना हे —२
डरना मना यहाँ, आपका सरमाना मना हे
भुल होगइ होगी, हमसे कभी कोइ
जिताथा यहाँ हम, आपका नाम ले, लेकर
रोया बहुतथा, यादोका आसु, पिकर
मिलेहे सालोबाद, लो अब रुठना, मना हे
सिकायत हमसे, बहुत होगी चुप रहेना मना हे
झुठी कहानी, बनाकर हमे सुनाना माना हे
जुदाइका , कोइ बहाना, बनाना मना हे
मोतीयोके लहरे, आपके आखोसे बहाना मना हे
टुटी हँइ रिस्ताके गाठ, अब जुडाना, मना हे
आपकी धड्कन बढगइ सुनो, बढाना, मना हे
जिताथा यहाँ हम्, आपका नाम ले, लेकर
आज हमसे रहेकर, आपका धड्कनोका, क्या हुुुवा
आपकी धढ्कन बढगइ सुनो बढाना, माना हे
मिलेहे सालोबाद, लो अब रुठना, मना हे
डरना मना यहाँ, आपका सरमाना मना हे —२
जुदाइका ,कोइ बहाना, बनाना मना हे —२
Mar 25, 2019
Mar 25, 2019 at 10:52 AM UTC
बुद्धका आभास करोगे भरि दिलसे
बन्दुक, बारुद फेँकोगे अप्नी घरसे
शान्त मनहो ,हो शान्त दुनीया
शान्त कर्मोमे मीलेगा फल बढियाँ
शान्तीके नामोमे लडेथे पिछ्ली दुनीया
दुखः.के सिवा कहा मीला उनहे चैन
बुद्धका आभास...............बन्दुक बारुद.........
दया करणा हो सारि जनमे
मर्ने मारनेका न होगी वातेँ
जुल्म रोको अब शान्त मनसे
उठोगे उपर दुसरोके दिलमे
बुद्धका आभास...............बन्दुक बारुद.........
लहु लालका मोल लो जानो
बगाकर लाल , मिला फल क्या, सोचो
आँएथेँ तुमभी, यहाँ हाथ खाली
मिलेगा तुमेभी, जगा, पाँच फुट, खाली
बुद्धका आभास...............बन्दुक बारुद.........
लालसा, जब छोडोगे, तुम मनसे
शान्त होगा मन, होगा शान्त घर भी
बुद्धको, दिवार नही, मनमे, बसालो
अह्ङकार मीटाके, शान्त, साँसे बढालो
बुद्धका आभास ........... बन्दुक बारुद
Mar 18, 2019
Mar 18, 2019 at 9:36 PM UTC
मधुवन, आसमा , पर्वत, सागर
खुस कहाँ हे सारी दुनीया
जोगी हे मगर हे मनका व धनी
हेगा न कोइ उसका जैसा
जोगी बनके लो दिखादो —२
मे करु तुम्हे सलामी
ज्ञान होके नही सिखाया
बन न सका मे ज्ञानी
लगाके चन्दन रखा फिर दाह«ी
पर बन नसका मे जोगी
जोगी बनके लो दिखादो
मे करु तुम्हे सलामी
चाहत अनेक बाकी हे अभी
रहेने न सका मे भोगी
शान्ति नही मनहे चनचल
ध्यान नही मेरे बसमे
जेगी बनके लो दिखादो
मे करु तम्हे सलामी
भूखका आँगसे पेटहो खाली
आज बनगया मे भिखारी
पर बन न सका मे जोगी —२
जोगी बनके लो दिखादो
मे करु तुम्हे सलामी
लगाके चन्दन, रखा फिर दाह«ी
पर बन न सका मे जोगी
बन न सका मे जोगी —३
Mar 19, 2019
Mar 19, 2019 at 2:05 PM UTC
खन्जर तो था हाथोमे मगर थे नही हम काँतील
दुरिया जीत्नी बढादे दुनीया हे नही हम तुम्से जुदा
खन्जर तो था हाथोमे मगर थे नही हम काँतील
जिसपलसे तेरी आँखोने दावत दिए हमको —२
जिसपलमे हमने देखाथा पहले तुुझको
जिसपलमे सुनानेको न रहीथी बात अप्ने —२े
जिसपलसे हमने पूmलोकी तरह सजाया तुझको
तेरी यादोकी अमानत हे भरि मेरे मनमे
खन्जर तो था हाथोमे मगर थे नही हम काँतील
दुरिया जित्नी बढादे दुनीया हे नही हम तुझसे जुदा
तुुझसे मील्नेकी रोज चाहत हे भरि इस् दिलमे
वही गलीया वही मन्जिल होकर गुजरतेँहे रात भर
तकलीफ बढ्ता जा रहाहे सहारा तेरी बगएर
खामोस साइ हो जबसे होे गया कब्र भी प्यारी —२
देखाहु तेरी कब्रके सामने हे जगा अभी खाली
आरहाहु तुझसे मील्ने आज करके अप्नी छल्ली —२
लैटारहा हु अमानत तेरी लो समालो इसे अखिरी
खन्जर तो था हाथोमे मगर थे नही हम काँतील
दुरिया जीत्नी बढादे दुनीया हे नही हम तझसे जुदा
खन्जर तो था हाथोमे मगर थे नही हम काँतील ।
Mar 21, 2019
Mar 21, 2019 at 9:48 PM UTC
पानीमे भिगनेका मजा जाने उसको क्या पता —२
सराबका जलानेका अदा उसको क्या पता
पानीमे भिगनेका मजा जाने उसको क्या पता
मेहखाना हे ए मेहखाना —२
प्यासेको मेहखानेका दिसा कोइ न बताए
लहेरे पारसे चाँद दिखा उसको न बताए
अधेरो बाद साम हुइ उसको कोइ न बताए
महेखाना हे ए महेखाना —२
पिनेका मजा आकर मुझसे न पुछो
पानीमे भिगनेका मजा मुझसे न पुछो
कहनेको क्या हे बाकी, अब तुुमभी कुछ कहो
महेखानेमे गिरनेका मजा उसको क्या पत्ता
महेखाना हे ए महेखाना —२
टक्राकर पिनेका आलम, आगया नसा —२
लर खराते घुमनेका सुरु हो रहा सिलसिला
पानीमे भिगनेका मजा जाने उसको क्या पत्ता
सराबका जलानेका अदा उसको क्या पत्ता
महेखानेमे गीरनेका मजा उसको क्या पत्ता
महेखाना हे ए महेखाना —३
Mar 19, 2019
Mar 19, 2019 at 10:13 PM UTC
सोइ नही हे आँख क्यू तेरी
आँसु गिर रहा हे , क्या कही —२
व तेरा य मेरा फिरसे कौन कहेगा
मीट्टीको कैसे, कहाँ कोइ इन्सान छोडेगा
व पहेली बक्तपे, किसने क्या ले आएँ
मीट्टीही एक थी जो ए सोच रहीथी —२
व पीछली बक्तपे किसने सँग क्या ले गएँ
मीट्टीही एक थी जो ए देख रहीथी
सोइ नही हे आँख क्यू तेरी
आँसु गिर रहा हे क्याँ कही
फूलका वासमे भमरे क्यू डूले
रोसनी वाद ही चाँद फिर क्यू डुले
दर्दसेही आखोँमे आँसुव क्यू गीरे
सोइ नहीहे आँख क्यू तेरी
आँसु गिर रहा हे, क्याँ कही
फूलका वासमे भमरे क्यू भूले
रोशनी बादही चाँद फिर क्यू डुले
दर्दसेही आँखमे आँसुव क्यू गिरे
सोइ नही हे आँख क्यू तेरी
आँसु गिर रहा हे क्याँ कही
व तेरा ए मेरा फिरसे कौन कहेगा
लहुके , रंगमे होली फिरसे कौन खेलेगा
दर्देदिल देखकर लोग फिर क्यू हसँे
सोइ नही हे आँख क्यू तेरी
सोइ नही हे आँख क्यू तेरी
आँसु गिर रहा हे, क्या कही—२
Mar 25, 2019
Mar 25, 2019 at 10:53 AM UTC
निला निलासा गगन, निचेह‘े हरी चौडीया
सामने घनी बस्ती फाँटमे फ्m,ूल पंछिया
हवाभी महेके समल समलके जुल्फ लहेराके
अनाज होे भरि खेतोमे, नही कोइ पेट खाली —२
हाथ होगा कामोमे, नही होगा कोइ खाली
परदेशके अप्ने, लौट आएङगे वापस प्यारि भूमी
होगा फिर खुस्हाली, गाउँमे लौटेगा दिवाली
न रहेगा सिमाए, न होगा धर्तीके लकिरँे —२
भाइ भाइ कहेङगे सब , नही कोइ अनोखी आस्थाए
न कहेगा काइ मेरा, न बने कोइ पराया
दर्द तो होगा ही घाँउमे, मगर लगादे मलहम सभी
आसु जब किसिके टप्के दिल रहे सबकी हैरानी —२
अनाज हो भरि खेतोमे नही कोइ पेट खाली
न रहेगा कोइ मेरा न बने कोइ पराया
दर्द तो होगा ही घाउमे, मगर लगादे मलहम सभी —२
Mar 26, 2019
Mar 26, 2019 at 9:27 PM UTC
मुझे इन, साँयाका नाम बतादे कोइ
संग रहेताहे , जो मेरे , खुसीमे , और, मुस्किलोमे
साँस नहीँ, चाल नही, नहीँ, एसा, कोइ, साथी —२
कास कोइ, सिखादे, इसे कुछ, प्यार, भरि बातेँ
सम्झाउँ राम कहानी, तो, व लगे मुस्कुराने —२
साफ हे, दोष नहीँ , नही, कोई, उसके सपने
सपनेतो, व देखतेहेँ जिनका होँ पास अप्ने —२
अप्ना नहीँ मे तो क्यूँ रहेताहे इधर उधर
समाजाव, कहीँ विछड जाव नहीँ आँना, फिर दोबारा —२
कास, कोइ सिरवादे, इसे कुछ प्यार भरि बातेँ
सँझाउँ राम कहाँनी, तो, व लगे मुस्कुराने —२
क्यूँ आताहे संग, हरदम, साथ जतानेको मुझसे —२
समाजाव, कहीँ विछड्जाव, नहीँ आना, फिर दोवारा
सम्झाया उसने, मेरे पास क्यूँ रहेताहे साथ साथ
कास, मे भी साया होता, तो रहँु उसके पास —२
न काइ उल्झने , न होगी कोइ, दिवारेँ —२
न कोइ चाहत, न होगी कोइ मुस्किले —२
न कोइ नाम, न होगी काइ, ठिगाने —२
साया बनके समाजाउ, मे भी, एक बार —२
Mar 21, 2019
Mar 21, 2019 at 1:14 PM UTC