Hello Poetry
Submit your work and get some sparkles! Create free account
हादसों की हक़ीक़त में ख्वाबों की बात करते हो खुद को है जलना अब चिरागों की बात करते हो फुरसत में हिसाब लगाना रोटी और पोथी का करोड़ों की गरीबी में नवाबों की बात करते हो
0
Mar 10, 2019
Mar 10, 2019 at 12:50 AM UTC
हक़ीक़त
हादसों की हक़ीक़त में ख्वाबों की बात करते हो खुद को है जलना अब चिरागों की बात करते हो फुरसत में हिसाब लगाना रोटी और पोथी का करोड़ों की गरीबी में नवाबों की बात करते हो
avanish-maurya
Written by
17/M/Delhi
Mar 10, 2019
Mar 10, 2019 at 12:50 AM UTC
Request permission to use this poem