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अंजान बने , खामोश सब सहते रहे । शायद मेरे अश्कों से सुकून नसीब हो उन्हें , ये सोच बेपनाह वो पलकों से बहते रहे । वो खंजर से रूह जख्मी कर रहे मेरी , हम हार कर दुनियाँ को देख हसते रहे....
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May 17, 2018
May 17, 2018 at 5:12 AM UTC
pain
अंजान बने , खामोश सब सहते रहे । शायद मेरे अश्कों से सुकून नसीब हो उन्हें , ये सोच बेपनाह वो पलकों से बहते रहे । वो खंजर से रूह जख्मी कर रहे मेरी , हम हार कर दुनियाँ को देख हसते रहे....
bhakti
Written by
26/F/India,Indore
May 17, 2018
May 17, 2018 at 5:12 AM UTC
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