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सूखा , बंजर पड़ा है नसीब मेरा , नेमत की बूंदों से नियति भीगा दे .। तृषित तकदीर मेरी कराहती बरसों से , उम्मीद के नीर का स्वाद चखा दे । लिख मेरी किस्मत में सुकून को ऐ खुदा , या बुलाके तेरे आशियानें में , जन्नत से रूबरू करा दे ।
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May 12, 2018
May 12, 2018 at 10:54 AM UTC
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सूखा , बंजर पड़ा है नसीब मेरा , नेमत की बूंदों से नियति भीगा दे .। तृषित तकदीर मेरी कराहती बरसों से , उम्मीद के नीर का स्वाद चखा दे । लिख मेरी किस्मत में सुकून को ऐ खुदा , या बुलाके तेरे आशियानें में , जन्नत से रूबरू करा दे ।
bhakti
Written by
26/F/India,Indore
May 12, 2018
May 12, 2018 at 10:54 AM UTC
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