सूखा , बंजर पड़ा है नसीब मेरा ,
नेमत की बूंदों से नियति भीगा दे .।
तृषित तकदीर मेरी कराहती बरसों से ,
उम्मीद के नीर का स्वाद चखा दे ।
लिख मेरी किस्मत में सुकून को ऐ खुदा ,
या बुलाके तेरे आशियानें में ,
जन्नत से रूबरू करा दे ।
May 12, 2018
May 12, 2018 at 10:54 AM UTC
सूखा , बंजर पड़ा है नसीब मेरा ,
नेमत की बूंदों से नियति भीगा दे .।
तृषित तकदीर मेरी कराहती बरसों से ,
उम्मीद के नीर का स्वाद चखा दे ।
लिख मेरी किस्मत में सुकून को ऐ खुदा ,
या बुलाके तेरे आशियानें में ,
जन्नत से रूबरू करा दे ।
