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आँखों मे आ गया पर छलका नहीं । ठहर गया दो पल पलकों पर , हूँ बस पानी पर हल्का नहीं । रुका में की नजर ना आये दर्द उसका भीड़ को । पर भीतर आये सेलाब ने सब्र को झंजोड दिया । कई मर्तबा जुंझा में उसकी इस कशमकश में... कई दफा उसने मुझे मुस्कुरा कर पी लिया । अबके जो पलकों पे आया तो रुका भी , सोच कर दुनिया का ये अश्क थोड़ा सूखा भी । ना कुसूर ना आदत उसकी तकदीर में था सहना । करता भी क्या मामूली अश्क हूँ , मेरी नियति है फकत बहना ......
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Apr 9, 2018
Apr 9, 2018 at 3:33 AM UTC
अश्क
आँखों मे आ गया पर छलका नहीं । ठहर गया दो पल पलकों पर , हूँ बस पानी पर हल्का नहीं । रुका में की नजर ना आये दर्द उसका भीड़ को । पर भीतर आये सेलाब ने सब्र को झंजोड दिया । कई मर्तबा जुंझा में उसकी इस कशमकश में... कई दफा उसने मुझे मुस्कुरा कर पी लिया । अबके जो पलकों पे आया तो रुका भी , सोच कर दुनिया का ये अश्क थोड़ा सूखा भी । ना कुसूर ना आदत उसकी तकदीर में था सहना । करता भी क्या मामूली अश्क हूँ , मेरी नियति है फकत बहना ......
bhakti
Written by
26/F/India,Indore
Apr 9, 2018
Apr 9, 2018 at 3:33 AM UTC
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