स्याही बेताब है कलम पाने को पर
अश्क इतने है कि शब्द नजर नहीं आ रहे ।
जस्बात माकूल है बेशक जताने को पर
दर्द इतने है कि लफ्ज़ सम्हाले नहीं जा रहे ।
Apr 2, 2018
Apr 2, 2018 at 4:08 AM UTC
स्याही बेताब है कलम पाने को पर
अश्क इतने है कि शब्द नजर नहीं आ रहे ।
जस्बात माकूल है बेशक जताने को पर
दर्द इतने है कि लफ्ज़ सम्हाले नहीं जा रहे ।
