अय ज़िन्दगी
तू भी कहीं रूठ ना जाये
हिज्र मुझसे कर ना जाये
तू भी कहीं मर ना जाये
ये सोच कर हम तुमसे
ग़िला करते भी तो क्या करते ?
अय ख़स्ताहाल ज़िन्दगी !अय ख़स्ताहाल ज़िन्दगी !
तू भी आजा , फिर औरों से
चले भी जाना अपने पैरों से
फिर आके यारे परिजद का ख़याल दे
और कहना फिर वही बात जाते हुए
कि तारा फलक का ज़मीं पे दिखाते हुए
कि भूल जा इसे दिल से निकाल दे
अय तस्कीं वक़्ते ज़िन्दगी !
अय तस्कीं वक़्ते ज़िन्दगी !
Jul 18, 2016
Jul 18, 2016 at 5:59 AM UTC
अय ज़िन्दगी
तू भी कहीं रूठ ना जाये
हिज्र मुझसे कर ना जाये
तू भी कहीं मर ना जाये
ये सोच कर हम तुमसे
ग़िला करते भी तो क्या करते ?
अय ख़स्ताहाल ज़िन्दगी !अय ख़स्ताहाल ज़िन्दगी !
तू भी आजा , फिर औरों से
चले भी जाना अपने पैरों से
फिर आके यारे परिजद का ख़याल दे
और कहना फिर वही बात जाते हुए
कि तारा फलक का ज़मीं पे दिखाते हुए
कि भूल जा इसे दिल से निकाल दे
अय तस्कीं वक़्ते ज़िन्दगी !
अय तस्कीं वक़्ते ज़िन्दगी !
