आंखो के सामने उलझते देखा
दो दोस्त को बिगड़ते देखा
दो प्यार को लड़ते देखा
दो फूल को टूटते देखा ।
न देखा तो,
किसी को बनाते न देखा
किसी को मानते न देखा
प्यार को हँसाते न देखा
दोस्त को बुलाते न देखा
दो फूल को खिलते न देखा।
-संदीप कुमार सिंह
Feb 26, 2016
Feb 26, 2016 at 5:27 AM UTC
आंखो के सामने उलझते देखा
दो दोस्त को बिगड़ते देखा
दो प्यार को लड़ते देखा
दो फूल को टूटते देखा ।
न देखा तो,
किसी को बनाते न देखा
किसी को मानते न देखा
प्यार को हँसाते न देखा
दोस्त को बुलाते न देखा
दो फूल को खिलते न देखा।
-संदीप कुमार सिंह
