इतिहास के बारे में कुछ पूर्वाग्रह से युक्त कोई धारणा बनाना ख़तरे से खाली नहीं , इसे कालखंड के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए। यह अपने अतीत का मूल्यांकन भर है, इसे वर्तमान के घटनाचक्र से पृथक रखा जाना चाहिए। इतिहास जीवन का मार्गदर्शक बन सकता है, बशर्ते इसे लचीलेपन से संप्रकृत किया जाए , इसे भविष्य के परिवर्तन से जोड़ते हुए एक संभावना के रूप में महसूस किया जाए , इतिहास के संदर्भ में इसे सतर्कता और जागरूकता के साथ देखा और पढ़ा जाए , इतिहास की समझ की बाबत आपस में लड़ा न जाए, प्राचीन जीवन के उज्ज्वल पक्षों को तलाशा जाए , इनसे सीख लेकर अपने वर्तमान को तराशा जाए , ताकि भविष्य में संभावनाओं का स्वागत आदमी अपनी चेतना के स्तर पर करने के लिए स्वयं को तैयार कर पाए ! जीवन यात्रा में समय की धारा के संग सतत अग्रसर हो सके , अतीत के विवादों को पीछे छोड़ सके , वह सार्थकता से अपनी जीवन की संवेदना को जोड़ सके , अपना अड़ियल रवैया छोड़ सके , जिससे कि उसकी जीवन धारा नया मोड़ ले सके, उसके भीतर इतिहास की समझ विकसित हो सके। २५/०३/२०२५.