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*पूर्ण आहत आत्म की घोषणा आज पेश आख़िरी एक अपील की जाएगी उसी पवित्र काल निशीथ में की जाएगी। ये किसी और के लिए नहीं, मेरे खुद के आहत आत्म के समक्ष की जाएगी। जो भी अंतिम निर्णय मुझको दिया जाएगा, फिर खुद मेरा भी दख़ल उसमें न लिया जाएगा। आज कुछ गहरे चालसाज़ों को प्रतिबंधित किया जाए, या उन्हें हमेशा के लिए किसी गहरी काल-कोठरी में— जो मेरी यादों में भी नज़र न आए— उनमें ढकेल दिया जाए। पूर्ण आहत मेरा आत्म आज खुद बोलेगा, सह चुका जो भी सहना था— आज अपनी चुप्पी भी तोड़ेगा। आज मेरा मन और हृदय आत्म की दलील करेंगे, पूर्ण सहयोग आत्म का कर कुछ उसके घावों को भरेंगे। अब आत्म भी खुद को मज़बूत महसूस कर रहा है, अब इस वक़्त वो कहाँ किसी से डर रहा है। अब एक अंतिम निर्णय और आदेश मेरे लिए पारित किया जाएगा। अब फूट पड़ा मेरा आत्म और सख़्ती से बोलता है मुझे— अब हर एक कार्य त्वरित वेग से किया जाएगा। अब बहुत झुक लिया दूसरों के लिए जो अंजान से थे, अब किसी ऐरे-गैरे के लिए झुकना मंज़ूर नहीं। जो खेल गए मेरे आत्म से, जो झिझके भी नहीं उस परमात्म से— आहत मेरा हृदय कर, आघात मेरे मन पर गहरा कर गए, और घायल मेरे आत्म को कर गए। — लेखक: नितिन कुमार मीना
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Jan 13
Jan 13, 2026 at 9:31 AM UTC
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*पूर्ण आहत आत्म की घोषणा आज पेश आख़िरी एक अपील की जाएगी उसी पवित्र काल निशीथ में की जाएगी। ये किसी और के लिए नहीं, मेरे खुद के आहत आत्म के समक्ष की जाएगी। जो भी अंतिम निर्णय मुझको दिया जाएगा, फिर खुद मेरा भी दख़ल उसमें न लिया जाएगा। आज कुछ गहरे चालसाज़ों को प्रतिबंधित किया जाए, या उन्हें हमेशा के लिए किसी गहरी काल-कोठरी में— जो मेरी यादों में भी नज़र न आए— उनमें ढकेल दिया जाए। पूर्ण आहत मेरा आत्म आज खुद बोलेगा, सह चुका जो भी सहना था— आज अपनी चुप्पी भी तोड़ेगा। आज मेरा मन और हृदय आत्म की दलील करेंगे, पूर्ण सहयोग आत्म का कर कुछ उसके घावों को भरेंगे। अब आत्म भी खुद को मज़बूत महसूस कर रहा है, अब इस वक़्त वो कहाँ किसी से डर रहा है। अब एक अंतिम निर्णय और आदेश मेरे लिए पारित किया जाएगा। अब फूट पड़ा मेरा आत्म और सख़्ती से बोलता है मुझे— अब हर एक कार्य त्वरित वेग से किया जाएगा। अब बहुत झुक लिया दूसरों के लिए जो अंजान से थे, अब किसी ऐरे-गैरे के लिए झुकना मंज़ूर नहीं। जो खेल गए मेरे आत्म से, जो झिझके भी नहीं उस परमात्म से— आहत मेरा हृदय कर, आघात मेरे मन पर गहरा कर गए, और घायल मेरे आत्म को कर गए। — लेखक: नितिन कुमार मीना
MrNitinKumarmeena
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Jan 13
Jan 13, 2026 at 9:31 AM UTC
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