यह इतना धैर्य तुम कहाँ से लाएं
तभी तो तुम शहीद् कहलाए
शस्त्र तुम्हारे हाथ में था
देश के मान के लिए अडे रहे
अपने बाहुबल से ही शत्रु मार गिराए
तभी तो तुम शहीद् कहलाए
घर तुम्हारा भी था
बैठा था परिवार आंखें बिछाऐ
तुमने देश वासी हीं रिशतेदार बनाऐ
तभी तो तुम शहीद् कहलाए
सपने संजोने का हक तुम्हारा भी था
पूरा करने का इंतजार लिए
देश के लिए बलिवेदी पर चढाऐ
तभी तो तुम शहीद् कहलाए
यह इतना धैर्य तुम कहाँ से लाएं
तभी तो तुम शहीद् कहलाए।
Aug 15, 2020
Aug 15, 2020 at 1:29 PM UTC
कैसे छटपटाया है वो
उसने कोई दलील ना छोड़ी
कोई अदालत नहीं छोड़ी
कड़ियां तक भी तोड़ी
फिर भी जिंदगी हार गया
जब वो हारा कोई रो ना पाया
इसी तरह छटपटाई होगी वो
उसने भी बहुत मिन्नत की होगी
उसने सबको फरियाद की होगी
हिम्मत भी नहीं छोड़ी होगी
फिर भी जिंदगी हार गई
जब वो हारी तब सब रोयें
उसको भुला नहीं पाए।
-अनु सिगंला
Jul 21, 2020
Jul 21, 2020 at 4:57 AM UTC