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15/M/Maharashtra Aa... / what to say / I want to play / The world's play
तू चाँद है, मैं वो आसमाँ हूँ, तू बोल है, मैं वो जुबाँ हूँ। तू कविता है, मैं वो कवि हूँ, तू खुश-नसीबी है, मैं वो खुश-नसीब हूँ। आख़िर तू मोहब्बत है, और मैं बस एक नादान हूँ। तू एक हकीकत है, और मैं बस एक चलवा हूँ।"
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Feb 10, 2025
Feb 10, 2025 at 7:57 AM UTC
तु खास है, मै आम हु
अपनी यारी को हम तस्वीरों में रखा नहीं करते, उसे दिल में सजा के हमने है रखा। निकली होगी आके दूजा की सातों पीढ़ियाँ, मगर कभी दिल पे किसी ने ना लिया। गाली देते न हम हकीकत में कभी, वादे न निभाते हम सिर्फ़ लफ़्ज़ों में कभी। मोहब्बत से पहले आती है यारी, ज़िंदगी के हर पड़ाव पर चाहते हैं हम, मोहब्बत से पहले यारी।
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Feb 4, 2025
Feb 4, 2025 at 9:34 AM UTC
अपनी यारी
तेरी आँखों में यूँ डूब सा गया, तेरे चेहरे में यूँ खो सा गया। शायर था, पर शायरी लिखना भूल गया, सोचा था लफ़्ज़ों में उतारूँ तुझे, पर वो लफ़्ज़ ही नहीं मिले, जो निखार सकें तुझे
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Feb 3, 2025
Feb 3, 2025 at 11:56 PM UTC
लफ़्ज कम पड़ गए
परछाई यो में छिपा रहा मैं उम्र भर, दुनिया से डरता रहा मैं जिंदगी भर। जब एक बार गिरा तो अपनों ने नकारा कह दिया मुझे, अब क्या कहूं मैं उन्हें? साथ खड़े थे लोग उनके, खड़ा हुआ हूं मैं खुद से। शायद दिखी होगी रोशनी, उम्मीद कि उन्हें, मगर मैं खुद बना वो रोशनी, जो मिटा दे परछाई, जो कभी पकड़ाए थे मुझै।
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Feb 3, 2025
Feb 3, 2025 at 4:30 AM UTC
"रोशनी और परछाई'
सपना कभी सही राह नहीं होता, अपना हमेशा सही इंसान नहीं होता, कभी गैरों पर भरोसा करके देखो, कभी क़ाबिलियत से आसमान छूकर देखो। राहें तो बदलती हैं, पर इरादे नहीं बदलने चाहिए, विश्वास भी टूटे, तो खट्टे आमों में, मिठा वाला ढूंढ़ना चाहिए।
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Feb 2, 2025
Feb 2, 2025 at 10:26 PM UTC
क्या सही
तेरी कहानी कागज़ के पन्नों पर लिखना चाहता हूँ, तेरी तस्वीर दिल की दीवार पर सजाना चाहता हूँ। मैंने माँगा है तेरा साथ, आकर नया संसार बसाना चाहता हूँ, मरने के बाद भी तेरी प्यारी यादों में डूब जाना चाहता हूँ।
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Feb 2, 2025
Feb 2, 2025 at 8:21 AM UTC
मै सिर्फ तुझे चाहता हूँ
शायद तुम्हे उसके सुगंध से मतलब हो मगर हमे उसकी खूबसूरती चाहिये तुम काटो से उसकी कमियाँ ढूंडते हो कभी उसके काटो मे खूबसूरती तो देखो
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Feb 2, 2025
Feb 2, 2025 at 1:51 AM UTC
एक फुल
Unha bhul jana sahi tha, Unki yad ma rona sahi tha magar Kya Wo kadhi hui na mare , ya sochkar jindagi bhar tut jana sahi tha
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Feb 1, 2025
Feb 1, 2025 at 7:52 AM UTC
Kya ma sahi tha
Jannat jaiga pata nahi bhala jai jahannum ham sabhi, bhala jai jahannum ham sadhi Bas sath ** asa waha par bhi, waha par bhi
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Feb 1, 2025
Feb 1, 2025 at 7:36 AM UTC
Dosti