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#truthmotivatepain
परछाई यो में छिपा रहा मैं उम्र भर, दुनिया से डरता रहा मैं जिंदगी भर। जब एक बार गिरा तो अपनों ने नकारा कह दिया मुझे, अब क्या कहूं मैं उन्हें? साथ खड़े थे लोग उनके, खड़ा हुआ हूं मैं खुद से। शायद दिखी होगी रोशनी, उम्मीद कि उन्हें, मगर मैं खुद बना वो रोशनी, जो मिटा दे परछाई, जो कभी पकड़ाए थे मुझै।
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Feb 3, 2025
Feb 3, 2025 at 4:30 AM UTC
"रोशनी और परछाई'