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है बेहद्द  शायराना इश्क़ मुझे | तुम करोगे न शर्मसार मुझे || है पलके बिछाई बैठी हुई | तेरा ही है बस दीदार मुझे || है कुछ आम सी बातें मेरी | पर इनमे है खुशबू कुछ तुम्हारी सी || है लहलहाती बहार सा ख्याल तुम्हारा | कब से है तुम्हारा इंतज़ार मुझे || है ग़ज़ल का हर शब्द मेरा | पर तुम्हारी सुनने का है ऐतबार मुझे || है अहमियत का मंज़र तुम्हारा मेरी ज़िन्दगी में | तेरे न होने पर, ज़िन्दगी कुछ है बेह्जान सी || है अब एक ही इंसान पर सारी गज़ले | बूढ़े होने पर भी, पुकारेंगे धीमे अल्फाज़ो में तुम्हे || - सिमरन
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Oct 24, 2020
Oct 24, 2020 at 12:54 PM UTC
ख्याल तुम्हारा
है बेहद्द  शायराना इश्क़ मुझे | तुम करोगे न शर्मसार मुझे || है पलके बिछाई बैठी हुई | तेरा ही है बस दीदार मुझे || है कुछ आम सी बातें मेरी | पर इनमे है खुशबू कुछ तुम्हारी सी || है लहलहाती बहार सा ख्याल तुम्हारा | कब से है तुम्हारा इंतज़ार मुझे || है ग़ज़ल का हर शब्द मेरा | पर तुम्हारी सुनने का है ऐतबार मुझे || है अहमियत का मंज़र तुम्हारा मेरी ज़िन्दगी में | तेरे न होने पर, ज़िन्दगी कुछ है बेह्जान सी || है अब एक ही इंसान पर सारी गज़ले | बूढ़े होने पर भी, पुकारेंगे धीमे अल्फाज़ो में तुम्हे || - सिमरन
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Written by
20/F/Delhi
Oct 24, 2020
Oct 24, 2020 at 12:54 PM UTC
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