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मेरे जज़्बात से वाकिफ मेरी कलम, हमेशा मेरे सपनो को ही लिखती है । और मेरे सपनो का हिस्सा, तुम भी हो । वैसे तो पत्तझड़ में गिरते पतो को कोन पूछता है ? पर पता नहीं क्यू, में, मेरा मन, हमेशा तुमसे यह आशा करता है की, बस तुम साथ देना । मंज़िल चाहे हो भी हो, जैसी भी हो, सफर बोहोत सुहाना होगा । जब मेरे हाथों में तुम्हारे हाथ, तुम्हारी बाहों में मेरा बदन, और दिल को इस बात की तस्सली की, मेरे पास तुम्हारा साथ होगा । कुछ अासान नहीं होगा, हर मोड़ पे तकलीफे होगी । एक पल में सब खो देने का डर तो होगा पर क्या फर्क पड़ता है ? झेल लेंगे न, क्यूंकि तुम्हारा साथ भी होगा । और अगर कठिन स्तिथि में तुम साथ हो, तो अच्छे दिन भी जल्द ही आ जाएंगे । ज्यादा कुछ नहीं मांगा है, क्यूंकि कठिनाईयां तो हर मोड़ पे है । में बस हर तकलीफ तुम्हारे साथ देखना चाहती हूं, उससे लड़, उससे बाहर आना चाहती हूं । हमेशा तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं, वोह हर लम्हा जब तक में यह पे हूं, वोह तुम्हारे साथ जीना चाहती हूं । ज़िन्दगी है यह, यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है । एक कदम, एक गलती, और सब खत्म हो सकता है, पर शायद उस एक कदम से, बोहोत कुछ बदल भी तो सकता है । आज जी रहे है, कल शायद यहा सांस लेने को नहीं होंगे । इसलिए तुमसे पूछ रही हूं । जैसे भी रास्ते हो, हर कदम में साथ दोगे ? हर खुशी और गम में, मेरे साथ रहोगे ? तो क्या बोलते हो तुम ? मेरे साथ जीना चाहोगे ?
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May 15, 2020
May 15, 2020 at 6:17 AM UTC
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मेरे जज़्बात से वाकिफ मेरी कलम, हमेशा मेरे सपनो को ही लिखती है । और मेरे सपनो का हिस्सा, तुम भी हो । वैसे तो पत्तझड़ में गिरते पतो को कोन पूछता है ? पर पता नहीं क्यू, में, मेरा मन, हमेशा तुमसे यह आशा करता है की, बस तुम साथ देना । मंज़िल चाहे हो भी हो, जैसी भी हो, सफर बोहोत सुहाना होगा । जब मेरे हाथों में तुम्हारे हाथ, तुम्हारी बाहों में मेरा बदन, और दिल को इस बात की तस्सली की, मेरे पास तुम्हारा साथ होगा । कुछ अासान नहीं होगा, हर मोड़ पे तकलीफे होगी । एक पल में सब खो देने का डर तो होगा पर क्या फर्क पड़ता है ? झेल लेंगे न, क्यूंकि तुम्हारा साथ भी होगा । और अगर कठिन स्तिथि में तुम साथ हो, तो अच्छे दिन भी जल्द ही आ जाएंगे । ज्यादा कुछ नहीं मांगा है, क्यूंकि कठिनाईयां तो हर मोड़ पे है । में बस हर तकलीफ तुम्हारे साथ देखना चाहती हूं, उससे लड़, उससे बाहर आना चाहती हूं । हमेशा तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं, वोह हर लम्हा जब तक में यह पे हूं, वोह तुम्हारे साथ जीना चाहती हूं । ज़िन्दगी है यह, यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है । एक कदम, एक गलती, और सब खत्म हो सकता है, पर शायद उस एक कदम से, बोहोत कुछ बदल भी तो सकता है । आज जी रहे है, कल शायद यहा सांस लेने को नहीं होंगे । इसलिए तुमसे पूछ रही हूं । जैसे भी रास्ते हो, हर कदम में साथ दोगे ? हर खुशी और गम में, मेरे साथ रहोगे ? तो क्या बोलते हो तुम ? मेरे साथ जीना चाहोगे ?
writingfreak
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May 15, 2020
May 15, 2020 at 6:17 AM UTC
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