कल तक हवाओं में उड़ने वाले आज फिजाओं में भी नहीं दिखते ।
शहर को दूषित कर ने वाले आज बंद खिड़कियों में दिखते है।
तुम सड़कों को दूषित करते रहे और हम चुप से झेलते रहे ।
तुम एयरकंडीशनर में बैठे रहे और हम गर्मी झेलते रहे ।
तुम प्रकृति का दोहन करते रहे और वो झेलती रही।
शौक तुम ने किए और सजा हमे मिली।
Mar 27, 2020
Mar 27, 2020 at 5:36 AM UTC
कल तक हवाओं में उड़ने वाले आज फिजाओं में भी नहीं दिखते ।
शहर को दूषित कर ने वाले आज बंद खिड़कियों में दिखते है।
तुम सड़कों को दूषित करते रहे और हम चुप से झेलते रहे ।
तुम एयरकंडीशनर में बैठे रहे और हम गर्मी झेलते रहे ।
तुम प्रकृति का दोहन करते रहे और वो झेलती रही।
शौक तुम ने किए और सजा हमे मिली।