कुछ अक्स अधूरे नक्स रहे गुम
कुछ आँखें नम कुछ नींद हुई कम
कुछ लफ्ज़ रहे थे कभी अनकहे
कुछ जज्बातों में बेवज़ह कहे
कुछ धड़कन की अजब थी झनझन
कुछ मन की उलझन ख़ुद से अनबन
कुछ याद तुम्हारी कुछ बेक़रारी
कुछ हया हमारी कुछ समझदारी
कुछ कहती वो अपनी खामोशी
कुछ बेख़याली में थी मदहोशी
कब बात बात में बात हो गयी
एक दूजे में दिन रात हो गयी
टूट गयी एक कच्ची डोरी
दिल मिल गए चोरी चोरी
अब इंतेज़ार में दिन है गुजरें
तुम ही बताओ क्या हम करें
Sep 30, 2018
Sep 30, 2018 at 1:54 PM UTC
कुछ अक्स अधूरे नक्स रहे गुम
कुछ आँखें नम कुछ नींद हुई कम
कुछ लफ्ज़ रहे थे कभी अनकहे
कुछ जज्बातों में बेवज़ह कहे
कुछ धड़कन की अजब थी झनझन
कुछ मन की उलझन ख़ुद से अनबन
कुछ याद तुम्हारी कुछ बेक़रारी
कुछ हया हमारी कुछ समझदारी
कुछ कहती वो अपनी खामोशी
कुछ बेख़याली में थी मदहोशी
कब बात बात में बात हो गयी
एक दूजे में दिन रात हो गयी
टूट गयी एक कच्ची डोरी
दिल मिल गए चोरी चोरी
अब इंतेज़ार में दिन है गुजरें
तुम ही बताओ क्या हम करें
