प्यार चुन चुन के करती हूँ
कभी तुम्हारे आँखों से
जिसमें मिट्टी बहती है
कभी तुम्हारी बातों से
जो ख़ुद में मशरूफ़ रहती हैं
कभी तुम्हारे हाथों से
जो ज़ुल्फ़ों को सहलाते हैं
कभी तुम्हारे होठों से
जो ग़ुस्सा पिघलाते हैं
और कभी तुम्हारी धड़कन से
जो वक़्त को रोक लेती है
Apr 23, 2018
Apr 23, 2018 at 1:56 PM UTC
प्यार चुन चुन के करती हूँ
कभी तुम्हारे आँखों से
जिसमें मिट्टी बहती है
कभी तुम्हारी बातों से
जो ख़ुद में मशरूफ़ रहती हैं
कभी तुम्हारे हाथों से
जो ज़ुल्फ़ों को सहलाते हैं
कभी तुम्हारे होठों से
जो ग़ुस्सा पिघलाते हैं
और कभी तुम्हारी धड़कन से
जो वक़्त को रोक लेती है
