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लत दौलत की लत दौलत की हम को है कहाँ पर ले आई आईने भी जहाँ पर झूठी बात करते है ॥ जो भर कर खतो में प्यार भेजा करते थे । उनकी चिठ्ठीयों का मोल हम लगा बैठे ॥ पहले माँ बाप ही सोहरत सभी थे , ऐ साहब क्यों ?? दौलत को ही माँ बाप हम बना बैठे ॥ लत दौलत की हम को है कहाँ पर ले आई अपनो की हीं शौदा हम लगाने आये हैं ॥ जिन बुजुर्गो कि दुआ हर खुशी में शामिल थी उनकी हीं हँसी को हम हीं बेच आये है ॥ जो माई की लोरीयाँ, हमें सुलाती थी । वो पापा की थपकीयाँ, जो दम धराती थी । वो दादी की छोटी सी कहानी परीयों की, भाइ की हँसी जो हम को सबसे प्यारी थी । आज इन सब को हम दौलत मे तौल आये है ॥ आरजु थी कभी जो मैं भी सेवा माँ की करुं पर दौलत को हीं माँ बाप सब बना बैठे ॥ लत दौलत की हम को है कहाँ पर ले आई ॥ - सुरज कुमर सिहँ दिनांक :- 18 / 05 /14
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Feb 17, 2015
Feb 17, 2015 at 6:05 AM UTC
hindi poem lat daulat ki (लत दौलत की)
लत दौलत की लत दौलत की हम को है कहाँ पर ले आई आईने भी जहाँ पर झूठी बात करते है ॥ जो भर कर खतो में प्यार भेजा करते थे । उनकी चिठ्ठीयों का मोल हम लगा बैठे ॥ पहले माँ बाप ही सोहरत सभी थे , ऐ साहब क्यों ?? दौलत को ही माँ बाप हम बना बैठे ॥ लत दौलत की हम को है कहाँ पर ले आई अपनो की हीं शौदा हम लगाने आये हैं ॥ जिन बुजुर्गो कि दुआ हर खुशी में शामिल थी उनकी हीं हँसी को हम हीं बेच आये है ॥ जो माई की लोरीयाँ, हमें सुलाती थी । वो पापा की थपकीयाँ, जो दम धराती थी । वो दादी की छोटी सी कहानी परीयों की, भाइ की हँसी जो हम को सबसे प्यारी थी । आज इन सब को हम दौलत मे तौल आये है ॥ आरजु थी कभी जो मैं भी सेवा माँ की करुं पर दौलत को हीं माँ बाप सब बना बैठे ॥ लत दौलत की हम को है कहाँ पर ले आई ॥ - सुरज कुमर सिहँ दिनांक :- 18 / 05 /14
suraj-kumar-singh
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Feb 17, 2015
Feb 17, 2015 at 6:05 AM UTC
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