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एक समय था जब दुनिया बदलने की चाह रखता था सीने में rebel सी दहक आँखों में बदलाव के सपने और मन में निडर निष्पक्ष नई सोच रखता था फिर वही हुआ जो होता आया है उम्र के साथ सीने की आग दबती चली गई जिम्मेदारियों की बोरियां लादते हुए मन में समझदार संतोष समझौते का शांत सा संसार बसता गया एक समय angry young man कहलाने वाला ठोकर खा खा कर रुद्र सी नदी से शांत झील बन गया था अरे और क्यों ना बनता मछलियाँ आ गईं थी, कमल खिल गए थे हंसों का जोड़ा भी तो अपने नई सदस्य की अपेक्षा कर रहा था अब तो वह उन ठोकरों को भगवान की देन मानने लगा था खिले हुए कमल को अपना उपहार और हंसों के नए परिवार को अपना प्यार मानने लगा था कि शायद जीवन इसी का नाम होगा अपने पूरे सफ़र को सीखों की लंबी किताब मानने लगा था यूँ ना तरस खायी उनपर यह सोचकर कि बेचारा ग़लत हुआ उनके साथ क्यूँकि वो ख़ुश था यह जानकर कि जो नदी कभी पहाड़ तोड़ती थी, वही झील बनकर एक पूरे नए संसार को थामने की शक्ति रखती थी।
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Nov 14, 2025
Nov 14, 2025 at 2:22 PM UTC
मैं या मैं?
एक समय था जब दुनिया बदलने की चाह रखता था सीने में rebel सी दहक आँखों में बदलाव के सपने और मन में निडर निष्पक्ष नई सोच रखता था फिर वही हुआ जो होता आया है उम्र के साथ सीने की आग दबती चली गई जिम्मेदारियों की बोरियां लादते हुए मन में समझदार संतोष समझौते का शांत सा संसार बसता गया एक समय angry young man कहलाने वाला ठोकर खा खा कर रुद्र सी नदी से शांत झील बन गया था अरे और क्यों ना बनता मछलियाँ आ गईं थी, कमल खिल गए थे हंसों का जोड़ा भी तो अपने नई सदस्य की अपेक्षा कर रहा था अब तो वह उन ठोकरों को भगवान की देन मानने लगा था खिले हुए कमल को अपना उपहार और हंसों के नए परिवार को अपना प्यार मानने लगा था कि शायद जीवन इसी का नाम होगा अपने पूरे सफ़र को सीखों की लंबी किताब मानने लगा था यूँ ना तरस खायी उनपर यह सोचकर कि बेचारा ग़लत हुआ उनके साथ क्यूँकि वो ख़ुश था यह जानकर कि जो नदी कभी पहाड़ तोड़ती थी, वही झील बनकर एक पूरे नए संसार को थामने की शक्ति रखती थी।
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Nov 14, 2025
Nov 14, 2025 at 2:22 PM UTC
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