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बेटी हूँ तो मिटा दिया | क्या थी मेरी गलती माँ, जो तूने मुझे मिटा दिया, अपनी ही हांथो से तूने, आँचल अपना हटा दिया, देेख न पायी मैं तेरी सूरत , कैसी थी माँ तेरी मूरत, चली गई मैं यहाँ से रोवत, कैसी थी माँ पापा की सूरत | बेटी हूँ मैं इसी लिए क्या , हाथ अपना हटा लिया ? क्या थी मेरी गलती माँ, जो तूने मुझे मिटा दिया ? यह दुनिया देखने से पहले, क्यो तूने मुझे सुला दिया, क्या थी मेरी गलती माँ, जो इतना बड़ा सजा दिया? " बेटी है तो क्या हुआ,ये है आँखों का नूर | जीने का अद्दिकार छीन कर करो न इनको दूर |" संदीप कुमार सिंह | ( हिंदी विभाग, तेज़पुर विश्वविधयालय ) मो.नॉ. +918471910640
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Mar 11, 2015
Mar 11, 2015 at 5:19 AM UTC
बेटी हूँ तो मिटा दिया |
बेटी हूँ तो मिटा दिया | क्या थी मेरी गलती माँ, जो तूने मुझे मिटा दिया, अपनी ही हांथो से तूने, आँचल अपना हटा दिया, देेख न पायी मैं तेरी सूरत , कैसी थी माँ तेरी मूरत, चली गई मैं यहाँ से रोवत, कैसी थी माँ पापा की सूरत | बेटी हूँ मैं इसी लिए क्या , हाथ अपना हटा लिया ? क्या थी मेरी गलती माँ, जो तूने मुझे मिटा दिया ? यह दुनिया देखने से पहले, क्यो तूने मुझे सुला दिया, क्या थी मेरी गलती माँ, जो इतना बड़ा सजा दिया? " बेटी है तो क्या हुआ,ये है आँखों का नूर | जीने का अद्दिकार छीन कर करो न इनको दूर |" संदीप कुमार सिंह | ( हिंदी विभाग, तेज़पुर विश्वविधयालय ) मो.नॉ. +918471910640
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Mar 11, 2015
Mar 11, 2015 at 5:19 AM UTC
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