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कुछ फासले तो है हमारे दरमियान में रहते हैं फिर भी हम एक ही मकान में दौलत हो तो मिल जाए हर शै जहाँ की शोहरत नहीं मिल सकती कोई दुकान में बुलंद हौसले हो तो क्या कुछ नहीं मुमकिन सूराख़ भी हो सकता है आसमान में अपने जो है सब कुछ वही हैं मान ले अजहर बाकी किसी का कोई नहीं इस जहान में
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May 16, 2025
May 16, 2025 at 6:31 AM UTC
कुछ फासले तो है हमारे दरमियान में
कुछ फासले तो है हमारे दरमियान में रहते हैं फिर भी हम एक ही मकान में दौलत हो तो मिल जाए हर शै जहाँ की शोहरत नहीं मिल सकती कोई दुकान में बुलंद हौसले हो तो क्या कुछ नहीं मुमकिन सूराख़ भी हो सकता है आसमान में अपने जो है सब कुछ वही हैं मान ले अजहर बाकी किसी का कोई नहीं इस जहान में
AzharSabri
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May 16, 2025
May 16, 2025 at 6:31 AM UTC
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